मुझे याद आते है

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मुझे याद आते है

Posted On: 20 Dec, 2011 Others में

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मुझे याद आते है वो पल, तेरा आना और तेरा जाना
छलकते हुए उन पलो में, तेरे साथ खो जाना
मुझसे बात करने के लिए तेरा नेटवर्क तलाशना
बारिश में भीगना और सबकी नज़रे बचाकर
छत्त के कोने में बैठकर मुझसे बतियाना
मुझे याद आती है कहना और मेरी याद आती है पूछना
हां मुझे याद आते है तेरे साथ गुजरे हुए वो लम्हे
हां मुझे याद आता है तुम्हारा अनछुआ स्पर्श
मुझे याद आता है देर रात तक तुम्हारा सन्देश देना
और सुबह उनींदी आखों से उलाहना देना ,
तुम्हारी छलकती हुई हंसी में ,अपना नाम सुनना
मुझे याद आता है आदि से अंत तक का सफ़र
मुझे याद आता है तेरा आना और तेरा जाना
पर मुझे इंतज़ार रहेगा तेरा आदि अंत तक

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 5, 2012

झलक रहा है की यह सिर्फ कविता नहीं आपका जिया हुआ समय है जो आपको याद आता है …….यादें मेरी भी ताज़ा हो गईं नेटवर्क तलाशने की और सबकी नज़रें और सबके कान बचाकर छत के कोने में….. बारिश में तो नहीं पर मई जून की धूप में बैठकर बात करने की …….आपकी सुन्दर यादें बनी रहें …..धन्यवाद..!

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    अभिनव जी आगमन पर आपका स्वागत है , सही कहा कुछ मधुर यादे होती है जो भूलती नहीं …..आभार

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 21, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, सुन्दर अभियक्ति, बस एक लाइन खटक रही है……. मुझसे बात करने के लिए तेरा नेटवर्क तलाशना

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    सच कहा ये बात मुझे भी अखरी थी सुनकर पर उसका कारण भी सुना क्यूंकि छोटी जगहों पर आज भी नेटवर्क की समस्या रहती है जहा ऊंचाई पर जाकर ही मोबाइल का उपयोग किया जा सकता है ,ये सिर्फ एक कविता नहीं है ये सच है जो मैंने जिया है .अजय जी पता नहीं कैसे मै आपकी प्रतिक्रिया देख नहीं पाई सो जवाब भी नहीं दिया .. इसके लिए माफ़ी चाहूंगी !आज अभिनव श्रीवास्तव की “वो चाँद मुलाकाते ” पढकर मुझे मेरी इस कविता की याद हो आई तो इसे खोला क्यूंकि ये मेरी पहली पोस्ट थी यहाँ पर और आप बीती भी !

sadhana thakur के द्वारा
December 24, 2011

प्रयास अच्छा है ….

    D33P के द्वारा
    December 28, 2011

    धन्यवाद साधना जी


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