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कैसे बताये

Posted On: 28 Dec, 2011 Others में

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जो कभी रखते थे

जख्मो पर मरहम मोहब्बत का

वही आज अपने हाथो में

नफ़रत का नमक लिए फिरते है

मै तो वफ़ा की अक धुंधली तस्वीर बनकर रह गई हू

और वो अपने मासूम चेहरे पर

बेवफाई की चमक लिए फिरते है

जी भरने तक मुझसे उनका

खिलवाड़ चलता रहा

और एक हम है …….

आज भी प्यार के नाम पर

मर मिटने की सनक लिए फिरते है

यकीन तो नहीं कि..

लौट के आयेंगे वो मेरे आगोश में

आज जायेंगे !!!

जनाजे शरीक होने

हम ऐसी ही भनक लिए फिरते है

याद आते है जब एक एक कर वो गुजरे पल

हम कैसे बताये कि हम क्या क्या लिए फिरते है

नाकाम आस लिए फिरते है  और

अपने ही हाथो अपनी जिन्दगी कि लाश लिए फिरते है

जख्मो पर मरहम मोहब्बत का
वही आज अपने हाथो में
नफ़रत का नमक लिए फिरते है
मै तो वफ़ा की अक धुंधली तस्वीर बनकर रह गई हू
और वो अपने मासूम चेहरे पर
बेवफाई की चमक लिए फिरते है
जी भरने तक मुझसे उनका
खिलवाड़ चलता रहा
और एक हम है …….
आज भी प्यार के नाम पर
मर मिटने की सनक लिए फिरते है
यकीन तो नहीं कि..
लौट के आयेंगे वो मेरे आगोश में
आज जायेंगे !!!
जनाजे शरीक होने
हम ऐसी ही भनक लिए फिरते है
याद आते है जब एक एक कर वो गुजरे पल
हम कैसे बताये कि हम क्या क्या लिए फिरते है
नाकाम आस लिए फिरते है  और
अपने ही हाथो अपनी जिन्दगी कि लाश लिए फिरते है जो कभी रखते थे
जख्मो पर मरहम मोहब्बत का
वही आज अपने हाथो में
नफ़रत का नमक लिए फिरते है
मै तो वफ़ा की अक धुंधली तस्वीर बनकर रह गई हू
और वो अपने मासूम चेहरे पर
बेवफाई की चमक लिए फिरते है
जी भरने तक मुझसे उनका
खिलवाड़ चलता रहा
और एक हम है …….
आज भी प्यार के नाम पर
मर मिटने की सनक लिए फिरते है
यकीन तो नहीं कि..
लौट के आयेंगे वो मेरे आगोश में
आज जायेंगे !!!
जनाजे शरीक होने
हम ऐसी ही भनक लिए फिरते है
याद आते है जब एक एक कर वो गुजरे पल
हम कैसे बताये कि हम क्या क्या लिए फिरते है
नाकाम आस लिए फिरते है  और
अपने ही हाथो अपनी जिन्दगी कि लाश लिए फिरते जो कभी रखते थे
जख्मो पर मरहम मोहब्बत का
वही आज अपने हाथो में
नफ़रत का नमक लिए फिरते है
मै तो वफ़ा की अक धुंधली तस्वीर बनकर रह गई हू
और वो अपने मासूम चेहरे पर
बेवफाई की चमक लिए फिरते है
जी भरने तक मुझसे उनका
खिलवाड़ चलता रहा
और एक हम है …….
आज भी प्यार के नाम पर
मर मिटने की सनक लिए फिरते है
यकीन तो नहीं कि..
लौट के आयेंगे वो मेरे आगोश में
आज जायेंगे !!!
जनाजे शरीक होने
हम ऐसी ही भनक लिए फिरते है
याद आते है जब एक एक कर वो गुजरे पल
हम कैसे बताये कि हम क्या क्या लिए फिरते है
नाकाम आस लिए फिरते है  और
अपने ही हाथो अपनी जिन्दगी कि लाश लिए फिरते है

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
January 2, 2012

हम  कैसे  बतायें  कि  क्या  क्या  लिये  फिरते  हैं, अपने ही हाथों में जिन्दगी की लाश लिये फिरते हैं। आपकी कविता सच्ची कहानी सी लग रही। रचना के लिये बधाई एवं आपको नये वर्ष की शुभकामनायें।

    D33P के द्वारा
    January 6, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी आपने समय दिया ,लिखा हुआ सब सच ही होता है ,हमेशा अहसास ही कागज पर शब्दों का रूप लेते है , आपको भी नये वर्ष की शुभकामनायें।

akraktale के द्वारा
December 29, 2011

जी भरने तक मुझसे उनका खिलवाड़ चलता रहा और एक हम है ……. आज भी प्यार के नाम पर मर मिटने की सनक लिए फिरते सुन्दर रचना बधाई.

    D33P के द्वारा
    December 29, 2011

    thanx for giving ur time and read me


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