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मेरा मौन समर्पण

Posted On: 28 Dec, 2011 Others में

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मेरा मौन समर्पण
आज तुम्हे देता निमंत्रण
भाव श्रंखला लिपटी है बेडी बनकर,
मेरा मौन समर्पण आज तुम्हे देता निमंत्रण
जी करता है दौड़ जाऊ पवन बनकर
या बन जाऊ टुकड़ा बादल का
लहराऊ तेरे आँचल सा
लिपट जाऊ तेरे कदमो से
मगर…….
अनजानी सी एक जंजीर
लिपटी है बेडी बनकर
तोड़ दो तुम इस जंजीर को
जी करता है कर दू तुम पर
अपना सब कुछ अर्पण
और मेरा मौन मेरा मौन समर्पण
आज तुम्हे देता निमंत्रण

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 22, 2012

जी करता है दौड़ जाऊ पवन बनकर या बन जाऊ टुकड़ा बादल का लहराऊ तेरे आँचल सा लिपट जाऊ तेरे कदमो से जैसे पायल की छन छन ……

    D33P के द्वारा
    January 22, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद


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