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तुम नहीं आये

Posted On: 8 Jan, 2012 Others में

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हमने जान तो नहीं प्यार माँगा था ,वो भी न मिला
जबकि हमने प्यार करने वालो को परस्पर जान लुटते देखा
सुना था फूल तो सदा खिलते है जबकि हमने
फूलो को मुरझाकर बिखरते देखा
लोग प्यार में महकते और मुस्कराकर जीते है ,
पर हमने खुद को बेखुदी में लुटते और मिटते देखा !
सोचा था आसमा में सितारे सदा चमकेंगे ,
पर हमने उन्हें मिटते और मिटटी में बदलते देखा
प्यार करने वाले सिमटकर करीब आते है ,
पर हमने तुम्हे खुद से जुदा होकर दूर जाते देखा
तुम नहीं आये पर हमने तुम्हे करीब आते देखा
अरमानो को बिलखते और सिसकते देखा !
खिलाये थे जो ख्वाबो में गुलशन ,
उनको उजड़ते और वीराने में बदलते देखा !
अरमानो को अर्थी में और जिन्दगी को मौत में बदलते देखा !

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
January 20, 2012

सुन्दर अलंकारित एवं अपने मकसद में कामयाब रचना। निःसंदेह सराहनीय। कृपया इसे भी पढ़े– आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    D33P के द्वारा
    January 20, 2012

    दिनेश जी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद  ।.आपकी रचना  (आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 )घरेलु उपचार वो भी कविता के रूप में ,बहुत खूबसूरत और उपयोगी अभिव्यक्ति है l

    D33P के द्वारा
    January 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ,मेरी और रचनाओं पर भी मुझे आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है

Deepak Sahu के द्वारा
January 9, 2012

खिलाये थे जो ख्वाबो में गुलशन , उनको उजड़ते और वीराने में बदलते देखा ! अरमानो को अर्थी में और जिन्दगी को मौत में बदलते देखा ! । महोदया जी! बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ आपकी! बधाई दीपक

    D33P के द्वारा
    January 9, 2012

    धन्यवाद दीपक जी आपने समय दिया ,मुझे आपसे और भी समय और प्रतिक्रिया की अपेक्षा है


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