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मेरा इख़्तियार नहीं

Posted On: 16 Jan, 2012 Others में

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तेरी तन्हाइयो के काबिल मै नहीं
तेरी सोच और जज्बातों से गाफिल मै नहीं
तु मुझे चाहे या न चाहे ,पर मुझसे तु अंजान नहीं

आज भी मेरी तन्हाई तुम्हे बुलाती है
तु आये या ना आये इस पर मेरा इख़्तियार नहीं

रात के आगोश में चमकता चाँद है
उसमे तेरा अक्स है इससे मुझे इंकार नहीं

राहे वफ़ा में मुसाफिर बहुत मिले पर
तू कुछ उनसे जुदा सा लगा इससे मुझे इंकार नहीं

आहट घुलती है इन सर्द रातो में जब तेरी
मेरी रग रग में घुल जाती है क़यामत
क़यामत की ख़ामोशी में ठहरने से मुझे इंकार नहीं

सनसनाती तेरी आवाज़ मेरे दिल में उतर जाती है
तुझे दिल में उतार लू इस पर मेरा इख़्तियार नहीं

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
January 24, 2012
    D33P के द्वारा
    January 25, 2012

    आभार सुमित जी

dineshaastik के द्वारा
January 20, 2012

आज भी मेरी तन्हाई तुम्हें बुलाती है, तू आए न आए इस पर मेरा इख्तियार नहीं। सूफियाना अंदाज एवं अध्यात्मिक अहसास कराती बेहतरीन रचना। बधाई…… कृपया इसे भी पढ़े– आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    D33P के द्वारा
    January 20, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी ,आपकी प्रतिक्रिया निसंदेह हौसला बढाने वाली है l

shashibhushan1959 के द्वारा
January 17, 2012

बहुत अच्छी भावपूर्ण रचना !

    D33P के द्वारा
    January 17, 2012

    …आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

    D33P के द्वारा
    January 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ,

minujha के द्वारा
January 17, 2012

बहुत खुबसूरती से अपनी भावनाओं को उकेरा है आपने,बधाई

    D33P के द्वारा
    January 17, 2012

    आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    D33P के द्वारा
    January 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद ,मेरी और रचनाओं पर भी मुझे आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा

nishamittal के द्वारा
January 17, 2012

बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना.बधाई

    D33P के द्वारा
    January 17, 2012

    निशा जी प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
January 17, 2012

दिल की गहराईयों तक उतर जाने वाली रचना। भावों से भरी हुई रचना सचमुच दिल में उतर गई। बधाई…..

    D33P के द्वारा
    January 17, 2012

    आपका हार्दिक स्वागत है , आपकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी लगी …आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

January 16, 2012

दीप्ति जी ! बहुत अच्छी रचना । आहटें घुलती हैं ……………….रग मे घुल जाती क़यामत…..क्या खूब लाइन है। अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकार करें !

    D33P के द्वारा
    January 16, 2012

    सूरज जी धन्यवाद आपने मुझे थोडा सा समय दिया ,मुझे उम्मीद है आप मुझे थोडा सा समय और होसला देंगे


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