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वफाओं के शहर में

Posted On: 20 Jan, 2012 Others में

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वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है

चाँद भी रोज़ चमकता है यहाँ पर ..
ये भी आग उगलता है

चलते रहे ,भीगते रहे हम समंदर में
जाना भी नहीं कि वो आंसुओ के रेले है

वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है

हवाओं में भी सिसकियों का शोर है
जब खुद पर ही बस नहीं चलता
तो औरों पर क्या जोर है

हम तो तुमसे मिलकर भी अकेले है
यादे है और तम्मनाओं के मेले है

वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 22, 2012

हवाओं में भी सिसकियों का शोर है जब खुद पर ही बस नहीं चलता तो औरों पर क्या जोर है हम तो तुमसे मिलकर भी अकेले है यादे है और तम्मनाओं के मेले है वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है आदरणीय दीप्ती जी, सादर अभिवादन. सुन्दर भाव. बधाई.

    D33P के द्वारा
    February 22, 2012

    नमस्कार प्रदीप जी ,आपके तारीफ भरे शब्दों के लिए आभार .

dineshaastik के द्वारा
January 31, 2012

इक बेवफा से गाँव छोड़ा था, शहर आया  बेवफाओं का लगा मेला, सराहनीय रचना……..

    D33P के द्वारा
    January 31, 2012

    वफ़ा की उम्मीद किससे करें ,,हर चेहरे के पीछे एक और चेहरा है,.तारीफ के लिए धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 22, 2012

वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है हवाओं में भी सिसकियों का शोर है जब खुद पर ही बस नहीं चलता तो औरों पर क्या जोर है मैं तो यही कहूँगा कि, अगर जिन्दगी है तो ऐसे ही झमेले हैं! …. हा हाहा हा !!!!! सभी पंक्तियाँ भावपूर्ण हैं!

    D33P के द्वारा
    January 22, 2012

    सच कहा आपने ये जिन्दगी के मेले और झमेले दुनिया में कम न होंगे,आभार

sadhana thakur के द्वारा
January 20, 2012

भाव अच्छे है ,लिखते रहिये .

    D33P के द्वारा
    January 21, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद साधना जी कृपया मेरी और भी रचनाओ पर भी आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है ,मुझे इंतज़ार रहेगा

Sumit के द्वारा
January 20, 2012

वफाओं के शहर में बेवफाइयों के मेले है : बहुत ही सुंदर http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/19/नारी-और-बेचारा-पुरुष-पति-द/

    D33P के द्वारा
    January 20, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

    D33P के द्वारा
    January 20, 2012

    सुमित जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद


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