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आदम के लिए हवा के नियम

Posted On: 9 Feb, 2012 Others में

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  • आदम के लिए हवा के नियम
  • नियम हमेशा ही स्त्रिया बनाती है
  • बिना किसी सूचना के इन  नियमो में कभी भी परिवर्तन किया जा सकता है
  • कोई भी पुरुष सभी नियमो को कभी नहीं जान  सकता है
  • यदि स्त्री को भान हो गया है तो वो तत्काल ही कुछ  या कभी सभी नियमो का बदल डालती है
  • स्त्री कभी गलत नहीं हो सकती है
  • यदि स्त्री कभी गलत प्रतीत होती है तोइसका मतलब है कि पुरुष ने कही न कही कुछ गलत्त कहा या गलत किया होगा
  • यदि ऊपर का नियम लागु होता है तो पुरुष को misunderstanding के लिए माफ़ी मांगनी होगी
  • स्त्री अपने विचार किसी भी समय बदल सकती है
  • स्त्री की सहमति के बिना या स्त्री से बिना पूछे पुरुष कभी भी अपने विचार नहीं बदल सकता
  • स्त्री के पास बिना किसी कारण.या अकारण  किसी भी समय गुस्सा होने का पूरा अधिकार है
  • पुरुष को पूरे समय सयम से  एवं शांत रहना होगा जब तक स्त्री न चाहे कि पुरुष किसी बात पर गुस्सा हो
  • स्त्री किसी भी भी परिस्थिति में पुरुष को यह जानने नहीं देगी कि पुरुष को किस बात पर गुस्सा या अपसेट होना चाहिए
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    15 प्रतिक्रिया

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    नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    abhishektripathi के द्वारा
    February 14, 2012

    सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

      D33P के द्वारा
      February 18, 2012

      i dont knw why i cant submit reply am sorry

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    February 11, 2012

    आदरणीया महोदया जी, भाई राज कमल जी ने मुझे आप से अनुमति लेने को कहा है, गलती हो गई, माफ़ कीजिये. जी सादर निवेदन है कि जी यदि आप की जी महान कृपा हो जाये जी तो मुझे भी जी आप की जी पोस्ट पर जी दो लाइना जी लिखने की जी अनुमति प्रदान करने की जी किरपा करें जी. आज्ञा है जी तो फिर लो जी पेश है जी. मेरी बात सबको क्यों बताई. हो गई मेरी जग हंसाई सबसे बड़ी गलती तुम्हारी स्त्री होकर स्त्री की बात बताई. बधाई, बधाई, बधाई. अपनी बातें हम से पढवाई हमरी पोस्टन पर क्यूँ न आयीं बधाई, बधाई, बधाई.

      D33P के द्वारा
      February 11, 2012

      प्रदीप जी अभिवादन स्वीकार करें ,मेरा अहोभाग्य …आप ने मेरी लिखी हुई बात पढने के लिए समय दिया .और बात दुहरानी पड़ी ,जिसके लिए शर्मिंदा हूँ . मेरी रेलगाड़ी की रफ़्तार थोड़ी धीमी है ,जो junction पर थोडा रुक रुक कर चलती है ,जिसके लिए मै आपसे  पुनः माफ़ी चाहूंगी !

    dineshaastik के द्वारा
    February 11, 2012

    इतने कड़े नियम। कैसे अब तक जिया आदम। कुछ अपवाद तो छोड़ दो। केवल एक नियम आदम का जोड़ दो। आदम बाध्य न हों कोई नियम मानने के लिये। क्यों नहीं माना यह जरूरी न हो हउआ के जानने के लिये। कृपया मेरी “बहस” को देखकर अपने विचार व्यक्त करें। http://dineshaastik.jagranjunction.com/

      D33P के द्वारा
      February 11, 2012

      कहते है इश्वर ने पहले आदम बनाया , खुश हुआ ! फिर सोचा कुछ और बनाया जाये हव्वा को बनाया ,तब से न तो इश्वर खुश हुआ न आदम ,हा हा हा .पर आपने तो एक ही आदम के नियम में सब कुछ आदम के पक्ष में करने का सोच लिया ,ये विचार इश्वर के दिमाग में क्यों नहीं आया क्यों इश्वर ने आंसू की सौगात हव्वा के हिस्से में दे दी जो आदम के सारे नियम हवा में उड़ा देते है :D

    shashibhushan1959 के द्वारा
    February 10, 2012

    सेवा में, आदरणीया महोदया, सादर ! मैंने सभी नियम शर्तों को बेमन से पढ़ा और न चाहते हुए भी अपनी स्वीकृति देने को मजबूर हूँ. ……………………………………….हस्ताक्षर / मैं स्वयं (शंका : क्या इन नियमों को –बेमन से ही— मानने के बाद शांतिमय दिनचर्या की उम्मीद की जा सकती है ?)

    akraktale के द्वारा
    February 10, 2012

    बहुत खूब नियम. शायद इसी लिए हमारे यहाँ कहा जाता है की सड़क पर कोई औरत या भेंसिया जा रही हो तो सावधान क्योंकि वे कभी भी मार्ग बदल सकती है और दुर्घटना की स्थिति में साड़ी गलती वाहन चालक की ही होगी.बधाई.

    Amar Singh के द्वारा
    February 10, 2012

    हव्वा ने तो आदम की हवा ही निकाल दी. बड़े ही जालिम नियम है. :-) :-)

      D33P के द्वारा
      February 10, 2012

      :D :D :D :D

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    February 9, 2012

    आपके बाते सुन कर तो लगता है की शादी करने में बहुत ख़तरा है……………हा हा हा

      D33P के द्वारा
      February 9, 2012

      अभिवादन सहित ….. शादी ऐसा लड्डू है जो खाए सो पछताए जो न खाए सो पछताए,आनंद जी डरिये मत अनुभव भी कुछ होना चाहिए

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    February 9, 2012

    मेरी बात सबको क्यों बताई. हो गई मेरी जग हंसाई सबसे बड़ी गलती तुम्हारी स्त्री होकर स्त्री की बात बताई. बधाई, बधाई, बधाई. अपनी बातें हम से पढवाई हमरी पोस्टन पर क्यूँ न आयीं बधाई, बधाई, बधाई.

      Rajkamal Sharma के द्वारा
      February 9, 2012

      बिना इनकी अनुमति के आपके दिमाग में यह सब बाते कैसे आई ? प्रणाम

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    i tryed many times to comments on ur post but i was unable to submit,sorry pradeep ji


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