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अरमान

Posted On: 18 Feb, 2012 Others में

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मेरे दिल में अरमान न थे तुम प्यार बनकर आ गए

आँखों में केवल पानी था तुम खवाब बनकर आ गए

चले जा रहे थे सूनी राहो ओ अजनबी

तुम हमराह बनकर आ गए

दुनिया की इस भीड़ में तन्हा थे हम ,

मेरी तन्हाई में तुम मेरी दुनिया बनकर आ गए

कभी रात की अँधेरी कालिमा में खोजते थे

तारो के बीच तुम चाँद बनकर आ गए

कोई अपना भी होगा यहाँ नहीं तो   वहां होगा

और अजनबी तुम अपने बनकर आ गए

मेरे दिल में अरमान न थे तुम प्यार बनकर आ गए

तुम्हारे प्यार में ,हर ख,वाब सिंदूरी हो गया

जो जीवन मेरा न हुआ वो तुम्हारा हो गया

गुनगुनाया है हर मंजर तुम्हारे  करीब आने से

वो अपने हो गए ,जो लगते थे कभी बेगाने से

सब दूरियां मिटाकर करीब आ गए

मेरे दिल में अरमान न थे तुम प्यार बनकर आ गए91-352448

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 22, 2012

सादर नमस्कार! आपकी इस पोस्ट को देखा था . पर…………बस इतना ही कहूँगा कि पिता श्री के बातों पर गौर करियेगा…भाव यक़ीनन सराहनीय है परन्तु अभिव्यक्ति में सुधर कि गुंजाईश बहुत है…..

    D33P के द्वारा
    February 23, 2012

    अनिल जी आपने समय दिया उसके लिए आपका बहुत बहुत आभार

akraktale के द्वारा
February 20, 2012

बहुत सुन्दर अरमानो का बयान. आदरणीय शशिभूषण जी की बात से सहमत हूँ. हाँ सुधार की गुंजाइशें बाकी हैं.

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    श्रीमान आपका बहुत अन्तराल से आगमन पर स्वागत है ,जानती हु यहाँ इस मंच पर बहुत उत्क्रष्ठ लेखक है जिनकी लेखनी के सामने ..मै क्या कहूँ फिर भी आप लोगो की प्रतिक्रिया और सुझाव जज़बाते इज़हार का कुछ हौसला देते है ,मुझे आप सबसे यही अपेक्षा भविष्य के लिए भी है ….

sadhana thakur के द्वारा
February 19, 2012

बहुत अच्छे भाव ,अच्छा लिखा आपने .बधाई हो ……..

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    धन्यवाद साधना जी ,मुझे आपके दो शब्दों का हमेशा इंतज़ार रहता है ,

abodhbaalak के द्वारा
February 19, 2012

दीप्ति जइ आजकल मेरी मानसिक श्तिति इस तरह की रचनाओ पर कुछ ………… खूबसूरत ग़ज़ल और वैसा ही चित्र :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    अबोध जी आपका आभार ,आपके मानसिक स्तर को यक़ीनन मै नहीं छु सकती .फिर भी मुझे अपनी लेखनी पर आपकी प्रतिक्रिया से कुछ हौसला मिलता है

jlsingh के द्वारा
February 19, 2012

दीप्ति जी, कविता के भाव रूमानी है, अच्छी लगी! बधाई!

    D33P के द्वारा
    February 19, 2012

    अभिवादन श्रीमान जी …प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ,मुझे मेरी और रचनाओं पर आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा ,आपके कीमती समय का थोड़ा हिस्सा मेरे लिए भी जाया कर दीजिये

shashibhushan1959 के द्वारा
February 19, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर ! भावनाएं अच्छी लगीं. पंक्तियों को थोड़ा और मजबूत बंधन दें ! ऐसा चित्र ……………?????????????

    D33P के द्वारा
    February 19, 2012

    शशि भूषण जी अभिवादन स्वीकार करें ! आपने समय दिया उसके लिए धन्यवाद …आपके सुझाव मेरे लिए बेशकीमती है .अगर आप ऐसा चित्र …..के आगे भी कुछ लिखते तो…

    shashibhushan1959 के द्वारा
    February 19, 2012

    दिल से कहूं तो अच्छा ही है, दिमाग से कहूं तो…. आप खुद एक बार विचार कर लीजिये !

dineshaastik के द्वारा
February 19, 2012

दीप्ती जी नमस्कार,    प्रत्येक पंक्ति बेहद खूबसूरत…..अत्यंत सराहनीय रचना…..

    D33P के द्वारा
    February 19, 2012

    दिनेश जी…. आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 18, 2012

तुम्हारे प्यार में ,हर ख,वाब सिंदूरी हो गया जो जीवन मेरा न हुआ वो तुम्हारा हो गया आदरणीया महोदया . क्या बात है. बधाई.

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    आभार प्रदीप जी आपका स्वागत है .विगत कुछ दिनों से कुछ error आने से कमेंट्स पोस्ट करने में दिक्कत आ रही थी ,और कुछ व्यस्त होने के कारण इतने दिन यहाँ नहीं आ सकी !जिसके लिए क्षमा चाहूंगी .और आपसे अपेक्षा करती हु कि आपका स्नेह मुझे मिलता रहेगा

tosi के द्वारा
February 18, 2012

दीप्ति जी अच्छी कविता है … ऐसे ही लिखती रहें ॥ साधुवाद

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    आज आपसे पहली बार रूबरू हु ,प्रतिक्रिया के लिए आभार

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 18, 2012

दीप्ती जी, नमस्कार आदम के लिए नियम बनाने के बाद यदि आदम को गुस्सा आया तो आपने उसे मनाने का भी नियम खोज लिया है लगता है ……………हा हा हा हा बहुत ही स्वीट कविता आपकी

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    आनंद जी अभिवादन … नियम बनते है तो उनके तोड़ भी बनते है …प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

D33P के द्वारा
February 20, 2012

…”तो” के आगे कुछ सोच पाना बहुत कठिन है .चित्र चुनाव में मुझे कुछ हिचक थी सो इसी का चुनाव किया ,लेखन भाव और चित्र की भाषा में कुछ अलगाव है शायद आप यही कहना चाहते है …आपका बहुत बहुत धन्यवाद


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