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चाणक्य नीति

Posted On: 18 Feb, 2012 Others में

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मुसीबत या परेशानियां स्वयं किसी व्यक्ति के जीवन में नहीं आती। इंसान के कर्म ही उसे समस्याओं में उलझा देते हैं। अच्छे कार्यों का परिणाम देर से ही सही पर अच्छा ही आता है वहीं बुरे कर्मों का फल बुरा ही होता है। हर व्यक्ति के जीवन कुछ गोपनीय बातें अवश्य होती हैं। ऐसे में यदि ये राज की बातें किसी अन्य व्यक्ति को मालुम हो जाए तब यह गंभीर मुसीबतों को बुलाने जैसा ही है।

हर व्यक्ति के अपने जीवन की गोपनीय बातों के संबंध आचार्य चाणक्य ने बताया है कि राज की बातें किसी अन्य मित्र या रिश्तेदार को भी नहीं बताना चाहिए। क्योंकि जिस इंसान को आपके सारे राज मालुम है वही आपके लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकता है। भविष्य यदि किसी भी प्रकार से हमराज व्यक्ति से मतभेद हो तो तब वह आपकी गोपनीय बातों का गलत लाभ उठाता सकता है। इस प्रकार आप गंभीर मुसीबतों में फंस सकते हैं। इसी वजह से अपने जीवन की गोपनीय बातें किसी भी इंसान पर जाहिर नहीं करना चाहिए।

चाणक्य ने बताया कि राज की बातों को राज ही रहने देना चाहिए। इस प्रकार की गोपनीय बातें ही राजा-महाराजाओं की सत्ता को भी पलट सकती हैं। अत: आम व्यक्ति को भी इस प्रकार की गोपनीय बातें किसी पर भी जाहिर नहीं करना चाहिए।

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 21, 2012

दीप्ति जी नमस्कार !मैं आपके इस लेख और चाणक्य दोनों से सहमत हूँ…कोई भी रहस्य तभी तक रहस्य है जब तक उसे केवल आप ही जानते है…जैसे ही दूसरा व्यक्ति जान पाया रहस्य रहस्य नहीं रह जाता है…..सतर्क करता लेख …बधाइयाँ !

    D33P के द्वारा
    February 22, 2012

    सूरज जी आपका आगमन ही पेज पर ही बहुत रोशनी भर देता है .आभार

akraktale के द्वारा
February 20, 2012

आज के युग में भी चाणक्य की नीतिया प्रासंगिक है.आभार.

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    मेरे इस मंच पर आगमन और प्रथम लेखन पर प्रथम प्रतिक्रिया आपसे ही मिली थी .आपका हार्दिक अभिनन्दन है

sadhana thakur के द्वारा
February 19, 2012

बहुत ही सही कहा है आपने ,मैं आपसे पूर्ण सहमत हूँ ,,हो ..सुर्ख लाल भी पढ़े …..धन्यवाद्

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    धन्यवाद्….पिछले कुछ दिन कमेंट्स पोस्ट करने में आ रही परेशानी के कारण कुछ भी नहीं कर पाए .लेकिन अब सब ठीक है .आपका आमंत्रण पाकर मन प्रसन्न है

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 19, 2012

सुन्दर प्रस्तुति दिव्या जी.ये बात तो सही है कि गोपनीय बातों को दूसरों को बताने से ब्लैकमेलिंग का सामना भी करना पड़ सकता है.लेकिन जीवन में कुछ छिपाने लायक ही न हो तो कितना अच्छा.

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    धन्यवाद राजीव जी ,आपने सही कहा अगर जीवन में कुछ छिपाने लायक ही न हो तो कितना अच्छा,पर क्या आपको लगता है कि ऐसा संभव है .यहाँ तो हर बात में राज़ है .हर चेहरे के पीछे दूसरा चेहरा है जिसे छुपाना भी लाजिमी ही होगा .जो बाते आज से सदियों पहले कही गई उनकी महत्ता आज भी उतनी ही है

    D33P के द्वारा
    February 20, 2012

    राजीव जी मै इतनी दिव्य नहीं केवल मात्र दीप्ति हूँ

dineshaastik के द्वारा
February 19, 2012

दीप्ती जी नमस्कार,     चाणक्य नीति आज भी उसकी प्रासंगिकता है उतनी ही है जितनी हजारों साल पहले थी। लेकिन क्षमा चाहता हूँ, आपकी प्रारम्भिक देरी वाली बात से सहमत नहीं हूँ, क्योंकि मेरा मानना है कि देर ही अंधेर का कारण हैं।     ज्ञान वर्धक एवं मार्गदर्शक आलेख के लिये बधाई……

    D33P के द्वारा
    February 19, 2012

    दिनेश जी सुबह सुबह आपके दर्शन कर अत्यंत हर्ष हुआ . सही कहा आपने इन नीतिगत बातो की प्रासंगिगता जितनी पहले थी ,उतनी ही आज भी है ,जीवन की उथल पुथल में इंसान इन सब बातो को भूल गया है !सही मायने में देखा जाये तो चाणक्य नीति जीवन का सार है जिसका अनुसरण अगर किया जाये तो बहुत से परेशानियों से बचा जा सकता है !आपने कहा देर ही अंधेर का कारन है ,सही है पर आपने एक कहावत सुनी ही है इश्वर के घर देर है पर अंधेर नहीं

    dineshaastik के द्वारा
    February 20, 2012

    दीप्ति जी बुरा न माने तो एक बात कहूँ, इस अंधेर का मुख्य कारण अज्ञान और डर का पुत्र ईश्वर ही है।

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 18, 2012

आदरणीया महोदया, सादर इस पोस्ट को जरी करके आपने वापस लिया था. प्रतीक्षा थी. जानकारी लाभकर है. धन्यवाद.

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    आभार प्रदीप जी,आपकी नज़र बहुत पैनी है

    D33P के द्वारा
    February 19, 2012

    प्रदीप जी ,आपकी लेखनी पर कुछ कमेंट्स करने गई पर जागरण ने मुझे अभी भी इसकी इज़ाज़त नहीं दी है ,कुछ error आ रहा है .उम्मीद है थोड़ी प्रतीक्षा के बाद सब कुछ ठीक हो जायेगा

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 18, 2012

दीप्ती जी, नमस्कार आपके द्वारा आचार्य “विष्णु गुप्त” “कौटिल्य” “चनक” पुत्र “चाणक्य” की नीतिगत तर्कों पर आधारित “चाणक्य निति” के छंद के बारे में बताने के लिए बहुत आभार वैसे मैं भी उनका मुरीद हूँ

    D33P के द्वारा
    February 18, 2012

    आनंद जी ,यही जीवन का सार है ,कई बार छोटी छोटी बाते जिनकी हम रोजमर्रा के जीवन में अवहेलना कर जाते है ,वो भविष्य के लिए क्या रंग लाएगी कुछ नहीं कह सकते ,बेहतर है हम पहले से ही सचेत रहे


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