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चुनाव के पहले के बजट के सपने और चुनाव परिणाम के बाद बजट की हकीकत

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12291575वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सातवां बजट (मुख्‍य बातें) पेश कर दिया है ये तो भला हो सचिन का जिसके शतक ने एक बार तो बजट की मार पर मरहम का काम किया पर बजट की मार तो आगे भी दर्द देगी ..

बहुत सपने दिखाए चुनाव के पहले और चुनाव के परिणाम के बाद बजट की घोषनाए,,,करते ही सारी हकीकत सामने आ गई माध्यम वर्ग पर मार सबसे ज्यादा ,टेक्स बदने के बाद हर चीज़ के दम बढ जायेंगे ,सरकार कैसे चलेगी अगर टेक्स नहीं बढेगा तो ?पेट्रोल के दाम बढ गए तो माध्यम वर्ग भुगतने के लिए है !वातानुकूलित कमरे में बैठकर नियम बनाने वाले इन नेताओं और अधिकारीयों के पेट्रोल का खर्चा तो सरकार वहन करती है ,इनकी जेब से क्या गया …इनकी जेब भरने के लिए सारी वसूली जनता की जेब से होती है

गरीब को क्या मिला

सर्विस टैक्‍स में 2 फीसदी की बढोतरी के साथ सर्विस टैक्‍स 12 फीसदी हुआ।वित्‍त मंत्री जी का कहना है टेक्स नहीं बढेगा तो सरकार कैसे चलेगी !

अब कुछ सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाओं पर सर्विस टैक्‍स लगेगा। होटल-रेस्‍टोरेंट में खाना, जिम, कोचिंग, फोन बिल, टीवी, फ्रिज, एसी, सीमेंट महंगा हुआ है। गोल्‍ड, डायमंड, प्‍लेटिनम, सिगरेट, पान मसाला, गुटखा के दाम भी बढ़ेंगे।बजट की बजट की घोषणा के बाद जाईये बाजार कुछ खरीद कर तो देखिये .हर चीज़ के दाम बड़े हुए ही मिलेंगे

पेट्रोल महंगा होने के भी पूरे आसार हैं।पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे तो सबसे पहली मार माध्यम वर्ग पर होगी,क्यूंकि उनकी गाड़ी पानी से नहीं चलती .! नेताओ और अधिकारियो के पेट्रोल का खर्चा तो वैसे भी सरकार वहन करती है !

काले धन पर श्‍वेत पत्र आएगा।……….कितने श्‍वेत पत्र आये और कितने काले हुए इसका हिसाब तो सरकार के पास भी नहीं है सबसे बड़ी बात विदेशो में जमा काला धन किसका है ,क्या जनता का .?….ये धन भी तो इन्ही नेताओ का है …

इस साल के बजट में एक्‍साइज ड्यूटी में भी दो फीसदी का इजाफा किया गया है। जिन चीजो के दाम नहीं बढ़ेंगे। उन्हें भी बाजार में जाकर खरीद कर देखिये तो असलियत सामने आएगी


आयकर छूट की सीमा बढ़ी,पर कितनी ……इससे कोई राहत नहीं मिलने वाली ,पहले की

आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर 2 लाख से बदकार ६ लाख करने का सपना चुनाव परिणाम आते ही धरा रह गया !


इनके राजीव गांधी इक्विटी योजना में निवेश पर 50 फीसदी कर छूट मिलेगी। शेयर बाजार में 50 हजार के निवेश पर 25 हजार टैक्‍स छूट मिलेगी। लघु बचत योजनाओं को हतोत्साहित किया जा कर सरकार निम्न आय वर्ग के साथ तो पहले ही खिलवाड़ कर चुकी है ! शेयर बाजार में निवेश के लिए मोटी रकम चाहिए जो गरीब वर्ग कहा से लायेगा !अपनी कम आमदनी से लघु बचत योजनाओ में निवेश में अपना भविष्य सुरक्षित करने का सपना तो( ब्याज दरे कम कर ) पहले ही तोड़ चुकी है !अभिकर्ताओ को दिया जाने कमीशन बंद कर अभिकर्ताओ का रुझान भी शेयर और जीवन बीमा योजनाओ की तरफ होने से लघु बचत योजनाओ में निवेश हतोत्साहित हुआ है


दिसंबर 2012 तक पीडीएस की नई स्‍कीम लागू होगी। पीडीएस नेटवर्क कंप्‍यूटरीकृत होगा। इंदिरा गांधी पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली राशि 200 से बढ़ाकर 300 रुपये हर महीने कर दी गई है। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए लोन के लिए क्रेडिट गारंटी फंड की व्‍यवस्‍था की जाएगी। क्या कहने है .. आज एक आई ए एस को अपने बच्चो की शिक्षा के लिए भरी गई फीस का पुनर्भरण किया जाता है मगर गरीब लोन लेकर अपनी शिक्षा पूरी करेगा !कितने  साल हो गए बेरोजगार  लोगो के लिए मंत्रालयिक परीक्षाये नहीं हो रही परिणाम स्वरूप  नियुक्ति नहीं हो रही ,अधिकार वर्ग की लिए हर साल  परीक्षाये होती है और उनकी खेप   बढ़ा दी जाती है  ,बेरोजगार कहा जाये इसका कोई इलाज है बजट में ?


इंदिरा गांधी पेंशन योजना के तहत विधवा और विकलांग मासिक पेंशन 200 से बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई है। एक गेस  सिलेंडर भी ४०० रुपये का आता है वाही 300 रुपये में पूरा महिना गुजारना  है ! वहीं बीपीएल परिवार के मुखिया की मौत पर 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। उनको जीने के लिए 20 हजार नहीं दिए जा सकते, मरने पर दिए जायेंगे ,यही नियति है गरीब की !



प्रणब जी ने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार की उम्‍मीद थी पर नहीं हुई और होगी भी नहीं ..


सरकार का घाटा लक्ष्‍य से 1.25 फीसदी ज्‍यादा हुआ है। सब्सिडी से सरकारी घाटा बढ़ा है, और धीरे धीरे हर चीज़ की सब्सिडी समाप्त होती जाएगी जिसका सीधा असर मध्यम वर्ग उअर गरीब वर्ग पर ही पड़ेगा !अगले साल महंगाई दर और कम होगी-किसी ने देखा है गत वर्ष की तुलना में महगाई कम हुई हो या किसी चीज़ के दाम कम हुवे हो हर साल हर चीज़ के दाम बड़ते ही है कम नहीं होते !

तेल सब्सिडी में कटौती के संकेत हैं…….जिसकी मार किस पर पड़ेगी ये भी सोचने की बात है ! सरकार खाद्य सुरक्षा कानून के लिए पैसा जुटाएगी। साल 2012-13 में 30 हजार करोड़ रुपये विनिवेश का लक्ष्‍य रखा गया है। 60 हजार करोड़ के इंफ्रास्‍टक्‍चर बॉन्‍ड जारी किए जाएंगे। ये बॉन्‍ड टैक्‍स फ्री होंगे। ये पैसा कहा से आएगा ,जनता की जेब से, हर चीज़ के दाम बढेंगे तो सरकार की जेब भरेगी

योजनाएं बनती है उसका फायदा किसको होता है आपको हुआ ..? पता नहीं किसे होता है ……ये सब सरकारी जादू है जिसके दायरे में केवल नेता और आला अधिकारी आते है ,गरीब और आम जनता तो उस जादू के असर से नीचे ही रह जाते है


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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 19, 2012

दीप्ति जी नमस्कार ! आमतौर पर आम आदमी बज़ट की ज्यादातर बातें नहीं समझ पाता ! वो बस अपने मतलब की बातें ही सुनता है और उनपर ही अपनी राय व्यक्त कर पाता है ! हर कोई आर्थिक विशेषज्ञ नहीं होता इसलिए सरकार इस तरह से अपनी भाषा बनती है की अच्छे अच्छे पढ़े लिखे भी धोखा खा जाते हैं ! आप्कने बहुत म्हणत और विश्लेषण करके लेख लिखा है ! बहुत बेहतर लेख !

    D33P के द्वारा
    March 19, 2012

    !योगी जी आपका अभारमय अभिनन्दन आपने सही कहा आमतौर पर आम आदमी बज़ट की ज्यादातर बातें नहीं समझ पाता ! वो बस अपने मतलब की बातें ही सुनता है और उन पर अपनी राय भी व्यक्त करता है पर उसका तात्पर्य समझता कुछ है और होता कुछ और है क्यूंकि हर कोई आर्थिक विशेषज्ञ नहीं होता लेकिन सरकार की कुर्सी पर आर्थिक विशेषज्ञ विराजमान है इसलिए सरकार इस तरह से अपनी भाषा बनाती है कि अच्छे भले , पढ़े लिखे भी छले जाते है मैंने तो बस अपने मन का गुबार निकाला है

akraktale के द्वारा
March 18, 2012

दीप्ति जी नमस्कार, सदैव बजट के नाम से ही माध्यम वर्ग के पसीने छुट जाते हैं चाहे वह केंद्र का बजट हो या घर का.जिस तरह महंगाई बढती जा रही है.समझ नहीं आता माध्यम वर्ग किस किस जगह कटौती करेगा और इतना करके भी जब वह सेविंग करेगा तो उसकी वापसी पर भी उसे टैक्स देना ही पडेगा.आयकर में छुट तो महज एक छलावा है इसमें भी लाभ तो उच्च वर्ग को ही दिया है एक हजार की छुट तो इनके छल के कारण मात्र एक महीने में ही सरकार की जेब में आजायेंगे. standard deduction को तो ये भूल ही चुके हैं यही नतीजा है इमानदारी से टैक्स जमा करने का. विधवा पेंशन ३०० रुपये किसी मजाक से कम नहीं है. इनको शर्म नहीं आती स्वयं के लिए तनख्वाह क्यों नहीं ३०० रुपये कर लेते.जनता के पैसे पे मौज करने वाले जनता को ही आँखे दिखाते हैं.आपके आलेख में आपका भी आक्रोश स्पष्ट झलकता है. किन्तु अब भी जनता जाग नहीं रही है. जनता आज भी इन्हें राजा और स्वयं को प्रजा मानकर ही खुश है.

    D33P के द्वारा
    March 19, 2012

    वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का कहाँ है कि जो लोग बजट कि आलोचना कर रहे है उनको जमीनी हकीकत देखनी चाहिए ,शायद उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है जहा लोग केवल एक समय रोटी खाकर जमीन पर या फुटपाथ पर सोने की कोशिश करते है !वही इन नेताओकी तिजोरियो में धन भरा पड़ा है मध्यम वर्ग के लिए बच्चो की फीस,पानी बिजली के बिल ,घर का राशन रोजमर्रा की जरुरत की भरपाई करने में पसीने आने लग गए है ! अब बाकि सब जमाये तो जाने दीजिये बचत खातो पर अर्जित ब्याज भी कर योग्य है !बाकि सब जमाओं पर भी ब्याज दरे दिन प दिन कम की जा रही है !पार्षदों को राज कार्य हेतु लेपटोप भी दिए जाने का प्रावधान है! क्या कहने है काम तो बाबु करते है लेपटोप का उपयोग पार्षद करेंगे ..अब क्या कहे ..किस किस को रोये … प्रतिक्रिया के आपका बहुत बहुत धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
March 18, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, नमस्कार! आपका आलेख पढ़कर बजट का सार समझ में आया. समझ में आने से दुःख भी ज्यादा हुआ! पर आपका आलेख काबिले तारीफ है यह तो कहना ही पड़ेगा! …….प्रणव दा आज भी NDTV पर प्रणय राय को कुछ समझा रहे थे, बीच में ममता और सपा का नाम ले रहे थे, मेरी समझ में यही आया कि ममता अगर नहीं मानी तो मुलायम तैयार हैं…. हम सबका तो होना ही बंटाधार है…… टीवी पर क्रिकेट देखिये और भूल जाइये सारे दुःख दर्द को क्योंकि वही (पलेयर) लोग फिर आकर विज्ञापन में कहेंगे….. ले लो भाई फलां बैंक का क्रेडिट कार्ड…. सर्विस टैक्स माफ़ (वापस)!… और कितना लिखूं… अंधेर नगरी के सिवा!….

    D33P के द्वारा
    March 18, 2012

    श्रीमान जी ये तो सब राजनीती के खेल है मुलायम जी, ममता जी ,माया जी ये सब एक ही ठेली के चट्टे बट्टे है .ये तो माया जी की ही माया है जो एक पुलिस के आला अधिकारी से अपने चप्पल तक साफ करवा दिए जिसका कवरेज़ हो सकता है आपने भी टीवी पर देखा भी हो !,देश की रक्षा का भर जिनके कंधो पर हो वो इन नेताओ और मंत्रियो के जूते साफ़ करते हो वो देश की गंदगी साफ़ कैसे करेंगे .? .सुविधा के नाम पर क्रेडिट कार्ड्स.डेबिट कार्ड्स जनता की जेब में डाल दिए, जिससे जनता की जेब से पैसा आसानी से निकले ,इनके पीछे कितने Hidden चार्जेस है.. बेचारी जनता की आँखों पर पट्टी बाध कर शीशा दिखाया जाता है !.बजट में जो है वो तो जनता सहेगी ही ,सहेगी क्या सहने के लिए मजबूर है ! प्लेयर लोग आकर विज्ञापन में कहेंगे….. ले लो भाई फलां बैंक का क्रेडिट कार्ड…. सर्विस टैक्स माफ़ (वापस)! उनको ये बोलने के लिए भी पैसे मिलते है…. क्यों नहीं बोलेंगे

March 18, 2012

सादर नमस्कार! सार्थक और अर्थपूर्ण आलेख…….बजट के सच को उजागर करता है.

    D33P के द्वारा
    March 18, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद अनिल जी ..मेरे ब्लॉग पर आपका हमेशा अभिनन्दन है

dineshaastik के द्वारा
March 18, 2012

ये सरकार यहाँ भी घोटाले करने से वाज नहीं आई, जो दिया 2 प्रतिशत सर्विस टेक्स लगाकर वापिस ले लिया। ये नेता स्विस बैंक में जमा अपना काला धन वापस क्यों नहीं लाते। सारी समस्याओं का हल अलाद्दीन के चिराग की तरह हो जायगा। दीप्ति जी एक बात तो कहना पढ़ेगी, कि अर्थ शास्त्र पर आपकी अच्छी पकड़ है।

    D33P के द्वारा
    March 18, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद .दिनेश जी .आप लोगो से स्नेह और अश्रीवाद से मेरे इस ब्लॉग को फीचर्ड ब्लॉग के लिए चुना गया है ,मै आप सब साथियों की आभारी हु

    D33P के द्वारा
    March 18, 2012

    दिनेश जी घोटाले हम और आप कैसे कर सकते है सत्ता हमारे हाथ में तो नहीं है ,मैंने आज ही एक समाचार पत्र में पढा देश की विकास दर 7 प्रतिशत और इन नेताओ और सांसदों की विकास दर 100 प्रतिशत .तो बताइए ये पैसा घर में तो रख नहीं सकते , रखे तो पकडे जाने का डर, इसलिए स्विस बैंक से अच्छी जगह और क्या हो सकती है ?जो पैसा वापिस लाने की बात करते है उनका खुद का क्या…?

    dineshaastik के द्वारा
    March 19, 2012

    दीप्ति जी आपकी पोस्ट का फीचर्ड ब्लॉग में सम्मलित होने के लिये बधाई…. सच कहा आपने जो विदेशों से काला धन लाने की बात करते हैं कहीं उनका भी धन…..

vikramjitsingh के द्वारा
March 18, 2012

दीप्ति जी, सादर, क्यों नहीं हुआ, फायदा हुआ है, आपको……. हमको….. इस बजट के गोरखधंधे से, एक रचना लिख दी आपने, और हम सबने पढ़ ली, रात के दो बजे अच्छा टाइम पास हुआ.. अब आगे देखते हैं इस मंच पर, (बजट के बारे में)……..धन्यवाद…….

    D33P के द्वारा
    May 13, 2012

    विक्रम जी कोई कुछ करेगा तो कुछ लिखने वाला मसाला जुटाएगा न ,जवाब देर से दिया उसके लिए माफ़ी की तलबगार हु …आप यहाँ नहीं है पर फिर भी ….

    vikramjitsingh के द्वारा
    May 13, 2012

    हम तो अंतर्यामीं हैं देवी …..किन्तु आपके तलबगार हैं…… मसाला अच्छा जुटाएंगे………..चिंता मत कीजिये …….. देर से ही सही…….आपने देखा तो सही…….शुक्रगुजार हैं आपके….. ”मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है…. वही होता है…जो मंजूर-ऐ-खुदा होता है…”

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 17, 2012

मैंने बजट न तो पढ़ा और न ही सुना. समय की बर्बादी है. सरकार का लेबल ही काफी है. पूंजीपतियों को हमेशा लाभ दिया है . रेल मंत्री के साहसिक कदम से उन्हें कितनी फजीहत उठानी पड़ी है जग जाहिर है. लेख हेतु आभार. सादर अभिवादन के साथ.

    D33P के द्वारा
    March 17, 2012

    प्रदीप जी आपने सही किया समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं ,..ब्लॉग पर आपकी उपस्थिति के लिए आभार

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 17, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, यह हमारा देश है. यहाँ का राज-काज ऐसे ही चलता है और चलता रहेगा. इस देश का गरीब यदि खुशहाल हो जायेगा तो इनकी चाकरी कौन करेगा. यह विडम्बना ही है कि यहाँ गरीबों की खुशहाली की बात वातानुकूलित कमरों में की जाती है. मद्ध्यम वर्ग का क्या ? यह तो समस्याओं से झूझने के लिए ही बनी है. खोने के लिए न तो अमीरों के पास है और न ही निम्न वर्ग के पास… ऐसी पालिसी ही बनायीं जा रही है कि अमीर दिन-प्रतिदिन अमीर होता रहे और गरीब जीवन भर, जिंदगी के जद्दो-जहद में फंसा रहे..उसको कुछ अलग सोचने का मौका ही न मिले….हम नाहक ही इनको कोसते हैं.

    D33P के द्वारा
    March 17, 2012

    अजय जी ब्लॉग पर आगमन पर अभिनन्दन प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद !यही हमारे देश की विडंबना है हमारा देश जो कभी सोने की चिड़िया कहलाया जाता था आज अपने ही देख के सत्ताधारको के हाथ में गुलाम हो गया है जो जनता को कठपुतली की तरह नाच नचा रहे है

chandanrai के द्वारा
March 17, 2012

Dear Dipti ji I have to praise on your deep knowledge over ecnomices . You have beautifully projected the pros & cons of this budget

    D33P के द्वारा
    March 17, 2012

    चंदन जी ज्यादा तो मुझे भी नहीं आता पर ये एक आम आदमी का दर्द है जिसे मैंने बहुत सरल भाषा में लिखने का प्रयास किया है .ब्लॉग पर आने और अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद


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