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जिन्दगी और मौत

Posted On: 21 Mar, 2012 Others,लोकल टिकेट में

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
July 17, 2012

किसी कारण से उपरोक्त पोस्ट कीतस्वीर दिखाई नहीं दे रही और इसे एडिट करने में भी परेशानी हो रही है …तो इस पोस्ट का matter दुबारा यहाँ पेश है जिन्दगी और मौत जिन्दा थे तो किसी ने पास बिठाया भी नहीं ! अब खुद मेरे चारो और बैठे जा रहे है! पहले कभी किसी ने मेरा हाल न पुछा! अब सभी आंसू बहाए जा रहे है ! एक रुमाल भी भेंट न किया जब हम जिन्दा थे! अब शालें और कपडे ऊपर से ओडाए जा रहे है ! सब को पता है कि अब हम इनके काम के नहीं ! मगर फिर भी बेचारे दुनियादारी निभाए जा रहे है! कभी किसी ने एक वक्त का खाना भी न खिलाया! अब देसी घी मुह में डाले जा रहे है ! जिन्दगी में एक कदम भी साथ न चल सका कोई ! अब फूलो से सजा कर कंधो पर उठाये जा रहे है ! आज पता चल कि मौत जिदंगी से कितनी बेहतर है ! हम तो बेवजह ही जिन्दगी की चाहत किये जा रहे है !!!

yogi sarswat के द्वारा
April 2, 2012

आदरणीय दीप्ति जी सदर नमस्कार ! बहुत सुन्दर और गहरे भाव लिए हुए कविता कही है आपने ! आभार ! कुछ इन्हीं भावों से सजी रचना मेरी भी इस मंच पर है , संभव हो तो एक बार समय अवश्य दें ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/03/26 http://yogi-saraswat.blogspot.in जिंदगी ……………एक पहेली

    D33P के द्वारा
    April 6, 2012

    योगी जी ,प्रतिक्रिया के बहुत बहुत आभार

yogi sarswat के द्वारा
April 2, 2012

आदरणीय दीप्ति जी नमस्कार ! बहुत बेहतरीन रचना दी है आपने ! बहुत गहरे भाव ! लेकिन जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं ! कुछ यही भाव लिए हुए मेरी भी एक रचना इस मंच पर है ! आपका ध्यान चाहूँगा ! कृपया समय दें ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/03/२६ http://yogi-saraswat.blogspot.in जिंदगी ………………एक पहेली

    D33P के द्वारा
    April 6, 2012

    सही कहा जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं , पर इसका दर्द वही जनता है जिसके साथ बीतती है जिन्दगी का दर्द झेलने के बाद मौत के आगोश में सामने वाला तभी तो कहता है—- . बाती से न पूछो दिए में तेल कितना है कफ़न में सोये इंसान से पूछो जिन्दगी में गम और कफ़न में सुकून कितना है

yogi sarswat के द्वारा
April 2, 2012

दीप्ति जी नमस्कार ! बहुत ही गहरे भाव लिए , कविता कही है आपने ! कुछ इसी भाव को लिए मेरी रचना भी पढियेगा अगर समय मिलता है तो ! अपने विचारों से भी नवाजें ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/03/26 http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/03/26 ज़िन्दगी …………………एक पहेली

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 30, 2012

जीवन भर दुःख- दर्द में रहा पोर-पोर बस पीर ही सहा पुत्र दे रहा है अब तर्पण | यह तन-मन का कैसा अर्पण || बधाई !!

    D33P के द्वारा
    April 1, 2012

    विजय जी  प्रतिक्रिया के लिए आभार

March 23, 2012

ऐसा भी नहीं है, की जिंदगी इतनी फीकी हो.. पर हाँ, कभी-कभी हो जाती है, तो पलायन नहीं होना चाहिए. समस्या तब आती है, जब हम उन लोगों के बीच रहते हैं, जो भीतर-बाहर से अलग व्यवहार किया करते हैं. इसलिए, चयन बुद्धिमान होकर किया जाना चाहिए. जिंदगी के बहुत से रोशन पहलु भी हैं. पर नज़र-नज़र की बात है. ऐसा मेरा मत है. नव सम्वत्सर, एवं पावन नवरात्र की बधाई स्वीकारें, सादर.

    D33P के द्वारा
    March 24, 2012

    टिम्सी जी आपका हार्धिक स्वागत है आपको भी .नव सम्वत्सर एवं नवरात्र की बधाई…साथ ही आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार .आपने सच कहा कि जिन्दगी को जिस नज़रिए से देखेंगे उसी रूप में नज़र आएगी पर जिन्दगी में फैली व्यवस्था का एक पहलु ये भी है ! कुछ रिश्ते जीते जी दर्द देते है पर मरने के बाद .लोग क्या कहेंगे की तर्ज़ पर दिखावा करने के लिए मजबूर है ! कुछ रिश्तो के चयन हमारे हाथ में है कुछ नेसर्गिक रिश्ते है जिनको आखिरी साँस तक निभाना पड़ता है चाहे वो अच्छे हो या तकलीफ देह ।

vikramjitsingh के द्वारा
March 22, 2012

दीप्ति जी, सादर, कहाँ से ढूंढ-ढूंढ के लाती हैं आप ऐसी अनमोल चीजें…. ”बस यही कहेंगे, जिंदगी की एक कड़वी सच्चाई, जानते तो कब से थे, एक बार फिर से आपने रूबरू करवाई……”

    D33P के द्वारा
    March 22, 2012

    ”बस यही है अनमोल जिंदगी की एक कड़वी सच्चाई, जानते तो सब है पर सबको प्यार है इससे विक्रम जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद ब्लॉग पर आने और प्रतिक्रिया करने के लिए

Tamanna के द्वारा
March 22, 2012

बहुत सुंदर और भावनात्मक रचना http://tamanna.jagranjunction.com/2012/03/22/family-relationships-and-mutual-duties/

    D33P के द्वारा
    March 22, 2012

    मेरे ब्लॉग पेज पर आपका स्वागत है ..प्रातिक्रिया के लिए धन्यवाद

Sumit के द्वारा
March 22, 2012

मौत के बाद शायद हर आत्मा यही सोचती हो …….सुंदर रचना

    D33P के द्वारा
    March 22, 2012

    सुमीत जी आपका स्वागत है …. इस आडम्बर भरी दिखावे की दुनिया से मुक्त होकर शायद हर आत्मा सुकून महसूस करती होगी .जिन्दगी से मौत बेहतर लगती होगी फिर भी हर कोई जीना चाहता है ….यही इन्ही सबके बीच ..

dineshaastik के द्वारा
March 22, 2012

जिन्दा था तो खुद जिन्दा नहीं लगता था मैं, आज मर कर सचमच जिन्दा हुआ हूँ मैं। कितनी गहरी और सच्ची बात व्यक्त की आपने मुझे बेकार दुनियाँदारी लगती है, मौत जिन्दगी से प्यारी लगती है। कौन अपना सगा मालुम नहीं पड़ता, लेकिन मुझे मौत अपनी हमारी लगती है। बधाई…बधाई…बधाई….

    D33P के द्वारा
    March 22, 2012

    जिन्दा था तो खुद जिन्दा नहीं लगता था मैं, आज मर कर सचमच जिन्दा हुआ हूँ मैं। जो चाह कर भी जीते जी न पाया उसे लोगो ने मरने पर जबरदस्ती थमाया जीते जी किसी ने न सुनी मेरी पदचाप आज उनके पद मेरे पीछे दौड़ रहे है जिनके लिए मेरे होने न होने की अहमियत न थी आज अपने अहम् काम मेरे लिए छोड़ रहे है आज पता चला मौत जिन्दगी से कितनी बेहतर है हम तो बेवजह जिन्दगी की चाहत किये जा रहे है दिनेश जी आपकी कवितामयी प्रतिक्रिया के लिए आभार …

akraktale के द्वारा
March 21, 2012

दीप्ति जी, समाज के रीति रिवाजों पर प्रहार करती रचना. मंच पर शेयर करने के लिए शुक्रिया.

    D33P के द्वारा
    March 21, 2012

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया ,शुभ रात्रि

March 21, 2012

हम तो बस इतना ही कहेंगे……. इब्त दायें इश्क है, रोता है क्या? आगे-२ देखिये होता है क्या?….जय हो!…..एक बार जोर से बोलिए…… भारतमाता की…….जय! एक बार प्रेम से बोलिए…….हमारी संस्कृति और सभ्य्यता की…..जय!. ….बोल….बोल …..बोल….. अब आप सभी जाइये और सो जियें. ……….शुभ रात्रि.

    D33P के द्वारा
    March 21, 2012

    यही सत्य है जीवन का अनिल जी जिसकी तरफ हर एक की आँखे बंद है या यह कह लीजिये सबने आँखे बंद कर रखी है .प्रतिक्रिया के लिए आभार… शुभ रात्रि

    D33P के द्वारा
    March 21, 2012

    बाती से न पूछो दिए में तेल कितना है कफ़न में सोये इंसान से पूछो जिन्दगी में गम और कफ़न में सुकून कितना है

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 21, 2012

जीवन दर्शन, वास्तविकता. से अवगत कराने हेतु धन्यवाद . बधाई.

    D33P के द्वारा
    March 21, 2012

    सादर अभिवादन …..प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 21, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, जीवन की एक सत्यता को दर्शाती हुई सुन्दर रचना. क्षमा चाहता हूँ. कृपया यह बताने का कष्ट करें कि आपने यह रचना स्कैन कर के क्यों पोस्ट की है?

    D33P के द्वारा
    March 21, 2012

    अजय जी अभिवादन स्वीकार करे…..ऐसे ही एक मै बाजार गई .किसी दुकान पर चढते ही पहली नज़र इस जीवन सत्य को दर्शाती हुई रचना पर पड़ी .जो दुकानदार ने शीशे के भीतर फोटो स्टेट करवाकर लगा रखी थी !मुझसे रहा नहीं गया और दुकानदार से उसकी एक फोटो कॉपी देने का आग्रह किया .और उसी तरह मैंने उसे यहाँ स्कैन कर पोस्ट किया


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