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मर्द बेचारा

Posted On: 7 Apr, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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बुरा न माने बस थोडा सा मजाक और थोड़ी सी मस्ती

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
April 8, 2012

दीप्ति जी सादर नमस्कार, हाथ उठाये आशीष भी देता, माँ की मार से सीख भी लेता, सुन्दरता का यह रहा पुजारी, देख सुंदरी यह इर्ष्या करता. कुछ न कहे तो समझो साधो, घर में रहे तो समझो माधो. बच्चों संग ये मौज भी करता. खुशियाँ बिखेरे ज्यूँ सावन भादों, घर का रक्षक मर्द कहो तुम समझो ना मिटटी का माधो. किसी पर वार के लिए दुसरे के कंधे का सहारा लेना ठीक नहीं. लगता है आजकल आपका विचरण जंक्शन के अतिरिक्त फेसबुक पर भी अधिक हो रहा है जहां से नित नयी खोज यहाँ के परदे पर चिपकाई जा रही है. सुन्दर प्रयास है. कुछ ऐसी सामग्रियां होती है जिन्हें शेयर करने का मन करता है.आपका भी सराहनीय प्रयास है.बधाई.

    D33P के द्वारा
    April 8, 2012

    प्रणाम स्वीकार करे श्रीमान …..क्षमा चाहूंगी फेसबुक के धरातल पर हूँ ,तो विचरण तो होगा ही ,पहले मै वहा नोट लिखा करती थी पर मुझे वहा कुछ कमी महसूस हुई तो मैंने आप सबके बीच आना चाहा.पर मेरा तो ये मानना है अगर आप कही कुछ अच्छा और दूसरो के साथ साँझा करने लायक  दिख जाये तो जरुर करे ,कुछ पढते और देखते समय अचानक दिल में आता है ये सबको बताना चाहिए बस वही हो जाता है ,मार्च में बहुत व्यस्त थी आप सबके साथ की कमी थी ,अब मजा आ रहा है कुछ सुनने में कुछ सुनाने में.कुछ गलत कह दिया हो तो माफ़ी की हकदार तो हु ही

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 7, 2012

Aadrniy दीप्ती जी …. सादर प्रणाम ! आपके नाम को देख कर हमेशा ही “कभी खुशी कभी गम” फिल्म का टाइटल याद आ जाता है मर्द इर्ष्यालू नहीं बल्कि शक्की (झक्की ) हुआ करता है इस इर्ष्या रूपी गुण से तो उस पाक परवरदिगार ने सिर्फ औरतो को ही नवाजा है बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाये :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    राजकमल जी सादर प्रणाम …. आप भी हद करते है मेरे नाम को देखकर उजाले (ख़ुशी) याद आने चाहिए अँधेरे (दुःख ) नहीं …ये तो थी मजाक कि बात.आपकी प्रतिक्रिया अनमोल है बहुत बहुत धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 7, 2012

पका पकाया फास्ट फ़ूड स्वास्थ्य के लिए हानिकर होता है. मेहनत करके भोजन बनाइये , स्वाद ही निराला होगा, वैसे ये भी अच्छा है. आदरणीय दीप्ती जी, सादर अभिवादन के साथ. बधाई.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    April 7, 2012

    आदरणीया दीप्ती जी, नमस्कार. आदरणीय कुशवाहा जी की बातों से सहमति है. लेकिन जो भी ला रहीं हैं सुन्दर है…. यह आप जरुर ध्यान रख रहीं हैं. ताकि सेहत न ख़राब हो जाये.

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    प्रदीप जी प्रणाम स्वीकार करे …. आपकी बात सही है पर क्या करे औरत की फितरत है ना रोज़ रोज़ रसोई में खाना बनाते बनाते कभी इच्छा होती है कि आज कुछ ना बनाये और बाजार से फास्ट फ़ूड ही खा ले ,और ज्यादा टेस्टी लगता है तो सोचते है सबके साथ बाँट कर खाया जाये

    D33P के द्वारा
    April 8, 2012

    अजय जी प्रदीप जी ने अपनी बात में बहुत कुछ कह दिया है मै भी उनकी बात से सहमत हु ,पर क्या करू मार्च माह में वित्तीय वर्ष समाप्ति के कारण बहुत व्यस्त थी और अब जब समय मिला तो सोचा शुरुआत थोड़ी मस्ती से की जाये ,आपने पसंद किया जिसके लिए आपका शुक्रिया

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    April 8, 2012

    आदरणीय दीप्ती जी, सादर अभिवादन. आपकी रचनाओं की जितनी प्रत्क्षा मुझे रहती है शायद और लोग भी करते होंगे. आपके लेखन की विशेषता है की लेखक, रचना का पात्र, और उसकी थीम इतनी आपस में एक होती है जो उत्कृष्टता की निशानी है. सबसे ज्यादर मुझे आपकी रचना को पढने में लगता है, चरित्र को आप आत्मसात कर लेती हैं. ये वास्तविकता है. और आपके रचना के चरित्र पर मैं एक रचना बना लेता हूँ.

    D33P के द्वारा
    April 8, 2012

    प्रदीप जी ,आपकी तारीफ भरे शब्द हो या आपकी रचना की लेखनी ,आपकी अभिव्यक्ति उत्कृष्ठ है ,धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
April 7, 2012

दीप्ति जी, नमस्कार! अच्छा लगा आपका मजाक! और मस्ती! अब जरा स्वर्ण ब्यापारी के दर्द को भी बयान करिए न! बेचारे बड़े परेशान हैं और लालू जी भी उनके साथ हो गए हैं!

Sumit के द्वारा
April 7, 2012

सच में ,,,,,और लोग कहते है की मर्द सबसे ज्यादा हिंसक होता है ,,,,,,मगर सच तो सच है जो एक न एक दिन सामने आता ही है ,,,,जैसे आप लेके आ गयी हो हे हे हे http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/06/पेटू-कही-का/

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    सुमित जी आपने कहा मर्द सबसे हिंसक होता है ,पर मेरा ये मानना है हर इंसा चाहे वो औरत हो या मर्द हर एक के भीतर हिंसक जानवर मौजूद है ,वो कब बहार आकर कहर बरपायेगा ये कोई नहीं जानता आपने मेरी पोस्ट को पसंद किया जिसके लिए आपका शुक्रिया

चन्दन राय के द्वारा
April 7, 2012

दीप्ति जी, आप की इस नई विधा ने खूब रंग जमाया मन हर्षित हो गया

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    thnx chandan ji ,nice to see ur comment on my post

follyofawiseman के द्वारा
April 7, 2012

बेचारी औरत दूसरों के दुखों को बढ़ा चढ़ा कर देख कर अपना दुख भुला रहीं हैं……..हमको मालूम हैं जन्नत की हक़ीक़त  ग़ालिब, दिल को बहलाने को ये ख़याल अच्छा है…..

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    follly really u are a wise man ….दूसरों के दुखों को देख कर अपना दुख भूलने मे बुराई भी क्या है thanx for your wise comment…. ब्लॉग पर आते रहिएगा हमेशा आपका स्वागत है

    follyofawiseman के द्वारा
    April 8, 2012

    आपने मुझे wise man बोला, बड़ा अच्छा लगा…..अहंकार को बड़ी तृप्ति मिली,  दूसरों के दुख को देख कर अपना दुख भुलाने मे कोई बुराई नहीं है……मगर……अगर हम अपने दुखों को ही ठीक से देख लें तो………..शायद भूलने की ज़रूरत ही न पड़े………….What you say wise lady…..?

    D33P के द्वारा
    April 8, 2012

    wise man,आपने बिलकुल सही कहा पर सब कुछ इंसान के बस में नहीं होता कभी कभी हालात न चाहते हुए भी हमारे पक्ष में नहीं होते ,और हम दुखी हो जाते है लेकिन दुनिया में चारो तरफ इतने दुःख है कि उनके दुखो को देखकर हमारे दुःख बहुत छोटे लगते है और हम भूल जाते है कि हम दुखी है क्यूंकि हमारे सामने दुसरे का बड़ा दुःख होता है .आपके कीमती समय के लिए आपका आभार

    follyofawiseman के द्वारा
    April 8, 2012

    मैंने सुना है कि पुरुष आज तक स्त्री से विवाद मे नहीं जीत पाया…..लेकिन फिर भी मैं आपसे विवाद करना चाहता हूँ…..क्योंकि मुझे हार जाना पसंद है…. दो तरह की बीमारी होती है, एक का नाम है दुख देखने की बीमारी, और दूसरे का नाम हैं सुख   देखने की बीमारी……….  सुख देखना या दुख देखना बस नज़र की दोष है……. और स्वस्थ आँख वाला वो है जो ये देख लेता है कि सुख और दुख अलग नहीं है…………फिर कहाँ सुख कहाँ दुख……! 

    D33P के द्वारा
    April 8, 2012

    wise man मुझे विवाद करना नहीं आता और मेरा दिमागी स्तर भी इतना नहीं कि आपकी बराबरी कर सकूँ ,!आपने एक कहावत तो सुनी होगी सावन के अंधे को हरा ही हरा दीखता है ,जो दुखी है उसकी नज़र दूसरो के दुःख पर ही जाएगी और जो सुखी है उसकी नज़र दूसरो के सुख पर ,आप मेरी इस बात का विरोध भी कर सकते है कि दुखी इंसान की दुसरे के सुख पर जाएगी कि वो सुखी है और मै दुखी क्यों? सुख और दुःख बीमारी नहीं जैसा कि आपने खुद ही कहा कि नज़र का दोष है एक कार वाला भी कहेगा दुसरे के पास दो कार क्यों? फिर आज के टाइम में आप ये भी बता दीजिये स्वस्थ आँख वाला है कहाँ ?हर इंसान दुसरे के सुख से पीड़ित है और अपने आपको जलाता है

dineshaastik के द्वारा
April 7, 2012

दीप्ति जी  आपने जो लिखा है सच  लिखा है।  मेरे ब्लॉग  पर आपका स्वागत है।

    D33P के द्वारा
    April 7, 2012

    मार्च मे बहुत व्यस्त होने के कारण यहाँ ज़्यादा समय नही दे पाई .आज जब आई तो थोड़ा मस्ती के मूड मे थी तो सोचा मज़ाक भी कर ले तो ये पोस्ट डाली आशा है आप बुरा नही मानेंगे ,वैसे देखा जाए तो ये ग़लत भी नही है रोज़मर्रा की जिंदगी मे यही सब देखने को मिलता है


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