मुझे याद आते है

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तुम नहीं आये

Posted On: 14 Apr, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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eyes

हमने जान तो नहीं प्यार माँगा ,वो भी न मिला
जबकि हमने प्यार करने वालो को परस्पर जान लुटते देखा
सुना था फूल तो सदा खिलते है ,हम फूलों को मुरझाकर बिखरते देखा
लोग प्यार में महकते और मुस्कराते है ,पर हमने खुद को बेखुदी में लुटते देखा
सोचा था आंसमा में सितारे सदा चमकेंगे
हमने उन्हें बिखरकर मिटटी में मिलते देखा
प्यार करने वाले सिमटकर करीब आते है
हमने तुम्हें खुद से जुदा होकर दूर जाते देखा
तुमने हमें करीब बुलाते देखा
तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा
अरमानो को बिलखते और सिसकते देखा
खिलाये थे जो ख्वाबो में गुलशन
उनको उजड़ते और वीराने में बदलते देखा
अरमानों को अर्थी में जिन्दगी को मौत में बदलते देखा

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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vijay के द्वारा
August 1, 2012

तुमने हमें करीब बुलाते देखा तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा अरमानो को बिलखते और सिसकते देखा खिलाये थे जो ख्वाबो में गुलशन उनको उजड़ते और वीराने में बदलते देखा अरमानों को अर्थी में जिन्दगी को मौत में बदलते देखा, आपने तो निदा फाजिली जी कि याद दिला दी ,बहुत अच्छा लिखा है

    D33P के द्वारा
    August 1, 2012

    विजय जी तारीफ का बहुत बहुत धन्यवाद

कुमार गौरव के द्वारा
April 27, 2012

दीप्ति जी सादर ! बेहद अच्छी काव्यात्मक प्रस्तुति…बधाई…

    D33P के द्वारा
    April 27, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

follyofawiseman के द्वारा
April 21, 2012

तुम्हारी आरजू थी मौत आई, तुम नहीं आए, जो शम्मे आरजू मैंने जलाई तुम नहीं आए !……….

    D33P के द्वारा
    April 22, 2012

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया ….नमस्कार स्वीकार करे मेरी आरजू थी कि मौत कहे जिन्दगी देने के लिए आई हु ! जो शम्मे आरजू तुमने जलाई .उससे जहान तेरा रोशन हो जाये !!

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 18, 2012

सोचा था आंसमा में सितारे सदा चमकेंगे हमने उन्हें बिखरकर मिटटी में मिलते देखा प्यार करने वाले सिमटकर करीब आते है हमने तुम्हें खुद से जुदा होकर दूर जाते देखा तुमने हमें करीब बुलाते देखा तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा बेहद सुंदर अभिवयक्ति दीप्ति जी ..अच्छा लगा आपको पढ़ कर ……तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा…मन कही खो गया इन लाइनों को पढ़ कर ..बहुत-२ बधाई आपको

    D33P के द्वारा
    April 18, 2012

    महिमा जी आपका प्रथम स्वागत करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है ….आपका बहुत बहुत शुक्रिया …..मेरा मन भी खो गया था …..जब आते देखा और कोई आया ही नहीं !!

yogi sarswat के द्वारा
April 16, 2012

बहुत खूब रचना ! आदरणीय दीप्ति जी ! तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा अरमानो को बिलखते और सिसकते देखा खिलाये थे जो ख्वाबो में गुलशन उनको उजड़ते और वीराने में बदलते देखा अरमानों को अर्थी में जिन्दगी को मौत में बदलते देखा बहुत बढ़िया

    D33P के द्वारा
    April 16, 2012

    योगी जी तारीफ के लिए शुक्रिया ………..पर मेरा खुद का मन इससे संतुष्ट नहीं हो पाया ..कारण आपने नीचे कमेंट्स में देखा ही होगा …पर बस हो गया …….ये आप सबकी सह्रदयता है जो ह्तौत्साहित नहीं होने देते ..आभार

sinsera के द्वारा
April 16, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, ज़रा अपनी कविता का alignment ध्यान से देखिये…..लग रहा है जैसे एक घर बना है….है न….. कितना सांकेतिक, ये दर्द तो घर घर की कहानी है…

    D33P के द्वारा
    April 16, 2012

    आपका स्वागत है sinsera ji …सच कहा आपने ये एक घर है मोहब्बत का, जो घर घर की नहीं हर टूटे दिल की कहानी है ……..जैसा कि मैंने कुशवाहा जी को भी कहा क उस दिन सर्वर में कुछ error होने से alignment गड़बड़ा गया ,आगे से पूरी कोशिश करुँगी बस आपके सहयोग की जरुरत रहेगी… आभार

Sumit के द्वारा
April 15, 2012

sunder panktiya magar inka size kuch bada hona chaiye tha,,,agar sab aise hi likhne lage to mera chasma pakka है……………..बाकि रचना सुंदर ….. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/12/नर-और-नारायण/

    D33P के द्वारा
    April 16, 2012

    माफ़ी चाहूंगी सुमीत जी आपको तकलीफ हुई ..मै कोशिश करुँगी आपको तकलीफ न हो बस मेरे ब्लॉग पर डरकर आना मत भूलियेगा जैसा कि मैंने कुशवाहा जी से भी निवेदन किया था कि कुछ सर्वर में परेशानी होने से अक्षर बड़े नहीं हो पा रहे थे .आगे से कोशिश करुँगी इस तरह की परेशानी हो तो कोई पोस्ट ही न डाली जाये ………..आभारी हु मै आपकी आप आये और तकलीफ उठाई

jlsingh के द्वारा
April 15, 2012

आदरणीया दीप्ति जी, सादर अभिवादन! “सर्वर मुझे अक्षर बड़े करने ही नहीं दे रहा था जैसे अक्षर बड़े होते ही मेरा दर्द भी बड़ा हो जायेगा ….समझता ही नहीं!” यह चुटीली पंक्तियाँ जो आपने कुशवाहा जी के प्रतिक्रिया के जवाब में लिखी हैं बड़ा रोचक लगा! साथ ही कुशवाहा जी का पुन: प्रतिक्रिया और भी रोचक लगी. “नियंत्रण अपने हाथ में होना चाहिए!” वाकई बड़े लोगों (गुरुजनों) का अनुभव काम के योग्य होता है! कविता भी रोचक पर निराशावादी की तरफ ले जानेवाली लगी.पर कहते हैं साझा करने से गम हल्का हो जाता है और खुशी बढ़ जातीहै.! आभार!

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    अभिवादन स्वीकार करे ,,,,,,,,,आदरणीय कुशवाहा जी का कोई जवाब नहीं उनकी लेखनी अपने आप में जादू का काम करती है ,ये हमारा सौभाग्य है कि उनका सानिंध्य हमे यहाँ प्राप्त है ” वाकई बड़े लोगों (गुरुजनों) का अनुभव काम के योग्य होता है!बात अगर निराशावाद की करे तो कोई भी दूरी इंसान में निराशा ही भरती है .आपने सच कहा कि साझा करने से गम हल्का हो जाता है !

akraktale के द्वारा
April 15, 2012

दीप्ति जी सादर नमस्कार, अरमानों को अर्थी में जिन्दगी को मौत में बदलते देखा सुन्दर शब्द संयोजन और भावाभिव्यक्ति. बधाई.

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

malkeet singh "jeet" के द्वारा
April 15, 2012

हमारी उम्मीदे और जिन्दगी की सच्चाई दो अलग अलग चीजे है पर जिन्दगी का आधार टिका भी तो उम्मीदों पर ही है दिल को छू लेने वाली रचना के लिए आभार उन के पास कभी हों शायद ,इतनी भी फुर्सत के दिन उनको याद मेरी आये और, दिल की धड़कन हो मधिम उन के पास कभी हों शायद…………….. फिर वो ढूंढे शायद कोई,खोए सपनो का साथी शायद उनको साथ गुजरे ,फिर से याद आयें सावन उन के पास कभी हों शायद……………… कसक उठे फिर उनका भी दिल ,भूली बिसरी यादों से हाँथ पकड़ लें फिर वो मेरा ,फिर से हो वो मधुर मिलन उन के पास कभी हों शायद……………… उन के पास कभी हों शायद ,इतनी भी फुर्सत के दिन उनको याद मेरी आये और, दिल की धड़कन हो मधिम उन के पास कभी हों शायद………………

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    जीत जी आपका स्वागत है …आपकी चाँद पंक्तियों ने मन को आल्हादित कर दिया कुछ पंक्तिया आपकी इन पंक्तियों के जवाब में …. हमको तो है फुर्सत ही फुर्सत तुमको आज फुर्सत नहीं जिस दिन तुमको होगी फुर्सत उस दिन हमको न होगी फुर्सत

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 15, 2012

इन ज़ज्बातों को सलाम……………और आप को सादर प्रणाम……… ये दर्द बड़ा ज़ालिम है, चैन से जीने नहीं देता……………..

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    अजय जी अभिनन्दन स्वीकार करे …… दर्द तो दर्द है दवा बन नहीं सकता ..! दर्द दवा बन जाये तो चैन आ जाये !!

vikramjitsingh के द्वारा
April 15, 2012

”कहकशां बिछ गयी है, तेरी राह में… चाँद तारे भी हैं तेरे मुन्तजिर… तुमको आने में तकलीफ तो होगी मगर. मरने वाले को आराम आ जाएगा…”

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    आपकी खूबसूरत पंक्तिया और आपके खूबसूरत अंदाज़ के साथ आपका स्वागत है .आभार

dineshaastik के द्वारा
April 15, 2012

तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा कमाल की उत्कृष्ट पंक्ति…लजबाव…. पीड़ा की पराकाष्ठा…..

    D33P के द्वारा
    April 15, 2012

    thanx a lot with regard

April 14, 2012

भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति……..तुम नहीं आये हमने तुम्हे आते देखा…….!

    D33P के द्वारा
    April 14, 2012

    प्यार का एक स्वरूप ये भी है …..जो होता नहीं फिर भी हम उसे महसूस करते है .. धन्यवाद अनिल जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 14, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर अभिवादन. सच ही कहा है जिंदगी के रंग हजार. न जाने कितने उतार , चढाव जीवन में आते हैं वही आगे बढ़ता है जो कुशल नाविक होता है. बहुत सुन्दर भावों के साथ गठित रचना. हमेशा की तरह. गम दिए मुश्तकिल कितना नाजुक है दिल ये न जाना है हाय हाय ये जालिम जमाना.

    D33P के द्वारा
    April 14, 2012

    हमेशा की तरह सादर प्रणाम स्वीकार करे…..आज तो सच में मुझे मेरा लिखा ही पढने में नहीं आ रहा .सर्वर मुझे अक्षर बड़े करने ही नहीं दे रहा था जैसे अक्षर बड़े होते ही मेरा दर्द भी बड़ा हो जायेगा ….समझता ही नहीं …..जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है हम भी कुशल नाविक है और आपके आश्रीवाद की दरकार तो है ही ….बहुत बहुत शुक्रिया

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    April 14, 2012

    मैं आपकी पिछली पोस्ट पर भोजन करने गया था, बगैर खाए चला आया. कोई बात नहीं. फिर कभी. बात आपने बढ़िया कही .सर्वर मुझे अक्षर बड़े करने ही नहीं दे रहा था जैसे अक्षर बड़े होते ही मेरा दर्द भी बड़ा हो जायेगा ….समझता ही नहीं ….. अगर आपके इस वाक्य को समझा जाये बहुत महत्वपूर्ण सन्देश के रूप में लिया जाना चाहिए. जीवन दर्शन की बहुत महतवपूर्ण सिद्धांत दिया है आपने. सर्वर ऐसा ही होना चाहिए, नियंत्रण अपने हाथ में होना चाहिए . किसी भी तकलीफ को वो बड़ा होने ही न दे. दर्द होगा ही नहीं. उम्र के तकाजे के हिसाब से स्नेह और शुभ कामनाएं. ईश्वर से प्रार्थना है की वो अपना वरद हस्त आपके ऊपर बनाये रहें. कामना है.

    D33P के द्वारा
    April 14, 2012

    आभार

चन्दन राय के द्वारा
April 14, 2012

दीप्ती जी , मन की विरह को शब्दों में पिरोकर पेश करने का सुन्दर प्रयास , बड़े दिवस बाद लोटी हैं , लगता है जैसे जीवन में सायद अभी दुखों के बादल हैं

    D33P के द्वारा
    April 14, 2012

    चन्दन जी नमस्कार……………मै तो यही थी बस.” तुम करती क्या हो सारा दिन” का कुछ जवाब खोज रही थी ….आपकी सलाह” आप 5 दिन बिना किसी लाग लपट के जी के देखिये ” पर विचार कर रही थी ..और बात रही जीवन की …तो जीवन के रंग हजार

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 14, 2012

अजीब छटपटाहट है, बिल्कुल मेरी तरह

    D33P के द्वारा
    April 14, 2012

    वो जो मुस्करा कर एक नज़र देख लेते है ,, लोग समझते है बीमार का हाल अच्छा है!! …..प्रतिक्रिया के लिए आभार

    vikramjitsingh के द्वारा
    May 21, 2012

    मेरी हर बात को उल्टा वो समझ लेते हैं.. अब जो पूछा तो कहेंगे…….’हाल अच्छा है……’


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