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इन्टरनेट की दुनिया

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इन्टरनेट की दुनिया ……….

इन्टरनेट की दुनिया कितनी आकर्षक है ये वही समझ सकता है जो इसका उपयोग करता है .खेल से लेकर अपराध करने तक की सब तरकीबे यहाँ हाजिर है  ! समय के साथ साथ इन्टरनेट का उपयोग करने वाले भी बड़ते जा रहे है यहाँ तक की अब तो शिक्षा का माध्यम भी इन्टरनेट हो गया है नौकरी के लिए आवेदन करना हो तो ऑनलाइन  आवेदन की सुविधा रिजल्ट देखना हो तो ऑनलाइन! कहने का मतलब है हमारी दिनचर्या भी ऑनलाइन हो गई है !

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कुछ दिन पहले मुझे फेसबुक के  मेरे पब्लिक पेज पर मेरी एक पोस्ट पर एक कमेन्ट मिला..बात धन्यवाद पर  ख़तम नहीं हुई .एक दो हंसी मजाक …फिर  मित्र सूचि में शामिल करने का दबाव  जिसका जवाब मैंने  कुछ इस तरह दिया  thanx . par mujhe ak baat samjh me nahi aati k add karne ki kaha jarurat hai this is  my  पब्लिक पेज ,aap msg kar sakte hai aap meri deevar par jo chahe likh dete ho fir add karne aur n karne me kya fark hai?इसके जवाब में  मुझे जो जवाब मिला मुझे हतप्रभ  रह जाना पड़ा मै शादी शुदा हु ये जानते हुए भी मुझे इन महाशय से इस जवाब की उम्मीद कदापि नहीं थी …..जवाब आया _me sirf fb tak hi simit nhi rahna chahta hu, me aapki psnl life me entry karna chahta hu isake liye mujhe aapke cont. No. Chahiye or me aapse milana b chahta हु”  चूँकि महाशय की प्रोफाइल  praivate  होने से कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी इसलिए उसे जैसे ही मित्र सूची में शामिल किया और व्यक्तिगत जानकारी देखी तो दिल को सच में ठेस सी लगी  जनाब की जनम तिथि  July 23, 1997 थी . महज 15  की उम्र .अब आप सोच रहे होंगे मैंने उसे क्या जवाब दिया होगा .जी मैंने उसे जवाब दिया (मैंने आपको आपको अपनी friendlist  में शामिल कर लिया है पर अगर आपकी जनम दिनांक सही है तो आपको अभी किसी की जिन्दगी में शामिल होने की नहीं अपनी जिदंगी को किसी सफलता के रस्ते पर ले जाने की सोचना चाहिए आप मेरे बच्चे की उम्र के है ये  एक शुभचिंतक की तरह मेरी आपको राय है .बाकि हर काम के लिए पूरी जिन्दगी पड़ी है पर अगर आपने ये वक्त बेकार कर दिया तो हो सकता है आपको बाद में पछताना पड़े इसलिए आप अपना दिमाग और दिल दोनों  को अपनी जिन्दगी सवारने में लगा दीजिये )

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एक बार सोचा उसे अपनी friendlist  में से हटा दू फिर सोचा नहीं बचपन  बुद्धि   फिर किसी नयी तलाश में भटकेगी, क्या पता किसी राह पर निकल जाये ,कम से कम मै उसे कुछ समझा कर उसके दिमाग को मोड़ने की कोशिश तो कर ही सकती हु!

आज युवा   fake  नामो से id  बनाकर मौज मस्ती के नाम पर दोस्तों और अजनबी से दोस्ती करते है और कुछ समय की लगातार चैटिंग में  प्यार के सूत्र भी पनप जाते है

अभी कुछ दिन पहले मैंने daink  भास्कर पर एक विडिओ देखा ,,मेरी राय में ये विडियो हर अभिभावक को जरुर देखना चाहिए कम से कम उनको तो जरुर देखना चाहिए जिनके बच्चे नाजुक उम्र से गुजर रहे है और घर में या बाहर  पूरी आजादी से इन्टरनेट का उपयोग करते है ….(किसी अजनबी से इन्टरनेट पर दोस्ती और प्यार और मिलने की चाहत का शर्मनाक अंत )दिल दहलाने वाला विडियो http://www.bhaskar.com/article/NAT-be-careful-when-chatting-with-unknown-3077869.html

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ये दुनिया जितनी आकर्षक है उतनी खतरनाक भी

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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 12, 2012

आदरणीय दीप्ती जी. सादर आपने एक अच्छे नागरिक के कर्तव्य का पालन किया है. महज आप स्त्री हैं और कोई sandesh de आप isse डरी नहीं. आपके साहस अनुकरणीय है. बधाई भी स्वीकार कीजिये.

    D33P के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी .प्रणाम …. बहुत दिन से आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार था ….. बहुत बहुत आभार

R K KHURANA के द्वारा
May 7, 2012

प्रिय D33P जी, क्षमा चाहता हूँ ! ब्लॉग पर आपका नाम स्पष्ट नहीं था ! इसलिए जैसा समझा लिख दिया ! सुंदर…..बहुत सुंदर लेख ! आँख खोलने वाला ज्ञानवर्धक लेख ! इसे सभी को अवश्य ही पढना चाहिए ! धन्यवाद ! राम कृष्ण खुराना

    D33P के द्वारा
    May 7, 2012

    आदरणीय खुराना जी आपका स्वागत है प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद दीप्ति अरोड़ा

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 6, 2012

शायद फेसबुक पर कम उम्र वालो का खाता ही नहीं बनता है ….. अपना खाता बनाने के लिए नाबालिगो को अपनी उम्र गलत रूप से बढा कर भरनी पड़ती है ….. आप यह मत समझिएगा की उसको कोई दोस्त नहीं मिलेगी क्योंकि दूसरी तरफ सभी आप जैसे samjhdaar नहीं hote …. जिसने बहकने + भटकने की ठान ही ली हो उसको कोई नहीं बचा + समझा सकता

    D33P के द्वारा
    May 6, 2012

    राजकमल जी प्रणाम स्वीकार करे ..अपने सही कहा फेसबुक पर नाबालिगो को खाता ही नहीं बनता है!जिनको दरिया में डूबना ही हो उसके लिए दरिया अपना बहाव नहीं रोक सकता

vikramjitsingh के द्वारा
May 6, 2012

दीप्ति जी…..सादर प्रणाम…. आपके आलेख को पढ़ कर एक लोकोक्ति याद आ रही है…..कि ”हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती” लेकिन बच्चों का क्या…..उन्हें तो इसकी चमक प्रभावित करेगी ही….. क्योंकि उनके हाथों से हमने…..गिल्ली-डंडा….कंचे….लूडो…..कॉमिक्स…..कैरम…सब कुछ तो छीन लिया….बड़ी खेलों के लिए उनके पास मैदान उपलब्ध नहीं हैं…..अब वो बेचारे…जाएँ तो जाएँ कहाँ…??? बचा सिर्फ यही….तो क्या चाहती हैं आप….ये भी छीन लिया जाये इनसे……????? सारे बच्चे यूनियन बना के आपके घर के आगे ‘आमरण अनशन’ शुरू कर देंगे…….हा….हा…..हा…. (हमारे ब्लॉग पर स्वागत है आपका)

    D33P के द्वारा
    May 6, 2012

    विक्रमजीत जी नमस्कार पर इन सबके लिए जिम्मेदार कौन है ?

akraktale के द्वारा
May 5, 2012

दीप्ति जी सादर नमस्कार, इन्टरनेट की चंद बुराइयां इसकी सारी अच्छाइयों पर पानी फेर रही हैं. उसमे से एक आपने इस आलेख में उठायी है.शुरुआत में इन्टरनेट का अर्थ ही चैटिंग था और इसी कारण लोगों का इसके प्रति आकर्षण बढ़ा.जहां पड़ोस की लड़की से भी बात करने में संकोच रहा हो वहां निर्भीक होकर देश विदेश की लड़कियों से बातें. चाहे फिर वो सारे छद्म नाम ही क्यों न हो. आज उसी का विस्तार हम फेसबुक पर भी देख रहे है. आज यह स्वाइन फ्लू या अन्य किसी भी संक्रामक बिमारी से ज्यादा संक्रामक तरीके से फ़ैल रही है. प्रेरणादायक आलेख के लिए बधाई.

    D33P के द्वारा
    May 6, 2012

    प्रणाम जी आपने सही कहा किसी चीज़ का उपयोग किस तरह किया जा रहा है उसकी गुणवत्ता उसी बात पर निर्भर करती है ,आपने देखा होगा आजकल कभी कोई साईट खोलते ही popups और जिसमे अवांछित साईट भी खुल जाती है और वो अधिकांशतः खेलो की साईट पर ही खुलते है और इसके लिए setting करनी पड़ती है जिससे पोर्न साईट ना खुले और ये जिम्मेदारी अभिभावकों की है कि वो ध्यान रखे ! बाल मन भटकने में समय नहीं लगता

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय दिव्या जी, सादर ! “”ये दुनिया जितनी आकर्षक है उतनी खतरनाक भी”" आपकी यह पंक्ति बिलकुल सत्य है ! पर वहीँ है कि किसी भी चीज के दो पहलु हैं सकारात्मक और नकारात्मक ! यह तो सर्पविष है ! मात्रा सही है तो औषधि वरना मृत्यु ! वैसे बच्चों के प्रति सावधानी तो उनके माता-पिता ही रख सकते हैं ! रखना आवश्यक है ! मेरी हार्दिक बधाई !

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    शशिभूषण जी प्रणाम … अति तो हमेशा ही बुरी होती है .किसी भी माध्यम को हम किस तरह उपयोग में लेते है, उस पर उसकी गुणवत्ता निर्भर करती है ! कई अभिभावक अपनी व्यस्तता में बच्चो से सवांद नहीं रखते जो कि घातक परिणाम भी दे सकते है

sadhna के द्वारा
May 5, 2012

ऐसा ही kuchh मेरे साथ भी हो चुका है……

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    आभार

follyofawiseman के द्वारा
May 5, 2012

आयं …ई का था…..! सूचना प्रदान करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद……..! अच्छा किया आपने बता दिया…..अब मैं भी ऐसा ही करूँगा……! 

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    wise man ………शब्द कहा खो गए आपके …चंद लफ्ज़ आपकी नजर में तूने देखा है कभी एक नज़र शाम के बाद कितने चुपचाप से लगते हैं शज़र शाम के बाद तू है सूरज तुझे मालूम कहाँ रात का दुख तू किसी रोज़ मेरे घर में उतर शाम के बाद

yogeshkumar के द्वारा
May 5, 2012

महोदया नमस्कार, आपको जिस तरह से किसी ने फेसबुक में मित्रता का प्रस्ताव भेजा.. वो एक आम बात है आजकल … मगर आपने जिस तरीके से उस प्रस्ताव को समझा ..या कहें handle किया वो अपने आप में काबिले तारीफ है… ये आप के सुलझे विचारों को दर्शाता है… ये एक साधारण सी बात है कि लड़कियां मित्रता के बहुत से प्रस्ताव पाती हैं… इन प्रस्तावों में कुछ का उद्देश्य गलत और कुछ का सिर्फ फेसबुक मित्रता तक ही होता है… बहुत से लोग किसी को समझने के लिए भी मित्रता प्रस्ताव भेजते हैं… खैर तकनीक तो इसी तरह से विकसित होती रहेगी.. लोगों को उसके अनुसार जिंदगी जीने का आदत डालनी पड़ती है और पडती रहेगी… अभी जागरण जंक्शन में भी सोशल मीडिया के नियंत्रण पर बहस चल रही है.. इस तरह जब भी कोई नयी तकनिकी आती है उसके गलत इस्तेमाल के डर पर बहुत चर्चा होती है… मगर बाद में लोग इन सब बातों के आदी हो जाते हैं….. एक जमाना था जब लोग अपने लोगो के साथ बहुत समय बिताते थे …फिर टीवी ने लोगों में दूरियां बढ़ानी शुरू कर दी… मगर अब ये सोशल मीडिया लोगों को करीब लाने कि कोशिश कर रहा है… खैर बहुत बातें कहने को ….

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    योगेश जी आपने सही कहा विशेष कर महिलाओ के पास मित्रता के बहुत प्रस्ताव आते है …….मेरे पास जिस का प्रस्ताव आया उसने अब्प्नी पूरी जीवनी लिख भेजी उसको पढकर वो मुझे एक बाल अपराधी ही लगा जो अब अपने मन में IPS बनाने का सपना पाल चूका है लेकिन शायद उसके आचरण के कारण अब अकेला हो चुका है …देखिये उसके पत्र का एक अंश ____” papa ka sapana tha ips banu or ab mera b yahi sapana h ab me jab gar jaunga to ips bankar jaunga “और मुझे उसका हौसला बना रहे इसलिए जवाब भी देना पड़ा “मुझे लगता है अब आप इतने समझदार हो गए है कि आपनी जिन्दगी के लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है दोनों में फर्क कर सकते हो …सबसे बड़ी बात आपकी जिन्दगी में आपके साथ क्या हुआ उसका अहसास है आपको .बस अपने आप को मजबूत रखिये और बुरी दोस्ती को छोड़ कर अच्छी जिन्दगी कि शुरुआत कीजिये अच्छे विचार रखिये ,जिदंगी बहुत खूबसूरत है इसे बेकार में मत जाया कीजिये,bas yahi ak sapna lekar chalo ishvar tumahri madad karenge IPS bankar dikha dijiye सबको” उसकी तन्हाई का सबब देखिये “pagal life bohot boring ho gai h koi to ho jo pyar se bat kare itana b bada nhi hua ki sahi galat ka pata chale ips ban jau bt koi to mera sath de jab khud ko boring mahsus karu to use bat kar लू” लेकिन उसके बाल मन में अभी भी अच्छे संस्कार मौजूद है इसका अंदाज़ा इन शब्दों में झलकता है – ” i knw aap bade ho to kya bade log chhote logo se dosti nhi kar sakte me aapke bache ki age ka hu to aap mujhe apna beta samjh kar hi frndsip kar लो”

    yogeshkumar के द्वारा
    May 5, 2012

    महोदय, आप ने कहा वो आपको बाल अपराधी जैसा लगा.. मगर मुझे लगता है की उसने अपराध जैसा कोई कृत्य नहीं किया.. उसके दिल में जिस तरह से विचार पैदा हुए उसने उस तरह से किया.. और आपको सच्च ही बोला कि आपसे दोस्ती करना और मिलना चाहता है… इसमें अपराध जैसी कोई भावना नहीं है…

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    योगेश जी मैंने बाल अपराधी इसलिए कहा क्यूंकि उसने अपनी जो जीवनी लिखी उसमे अपराधी कृत्य शामिल रहे है मै इसे यहाँ सार्वजानिक नहीं करना चाहती .पर ये सच है उसके लिखे अनुसार वो अब वो सब कृत्य छोड़कर अच्छी जिन्दगी बिताना और कुछ बनना चाहता है ……….लेकिन मुझे दुःख है वो ऐसे समय अपने परिवार से दूर है(अपने कृत्यों के कारण) जब उसको उनकी सबसे जयादा जरुरत है !और उसका बल मन किसी अपने के साथ के लिए भटक रहा है

dineshaastik के द्वारा
May 5, 2012

जो शाम  होते ही बच्चों के सामने अपने बेडरुम  में पैक  हो जाते हैं बच्चों को यह  हिदादत  देते हुये कि हमें डिस्टर्व  नहीं करना। जब  बच्चों को परिवार में प्यार नहीं मिलेगा तो वह प्यार की तलाश  में नेट पर भटकेंगे ही। दीप्ति जी बहुत अच्छा विषय उठाया आपने….आभार

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    दिनेश जी सादर नमस्कार सही कहा आपने जहा अभिभावक और बच्चो के बीच स्वस्थ संवाद की कमी होती है वहा इसी तरह की स्थिति पैदा होती है ,आपने विडियो देखा ,होगा नहीं देखा हो तो जरुर देखे !

    dineshaastik के द्वारा
    May 6, 2012

    ओह …….आज  वीडियो देखा, स्थिति इतनी भयावह, कल  का भारत कैसा होगा? व्यथित  हूँ यह सोच  कर…….

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 5, 2012

आवश्यक विषय की सुन्दर प्रस्तुति ….इन्टरनेट जितना आम हो गया है उसके खतरे उतने ही अबूझ , अजीब और कल्पना से परे … मानसिक, शारीरिक, आर्थिक सभी तरह का आघात पहुंचा सकती है…. अनियंत्रित और लापरवाह ऑनलाइन लाइफ….!

    D33P के द्वारा
    May 5, 2012

    अभिनव जी आपका स्वागत है ……. हम ऑनलाइन हो गए है . पर सच में देखा जाये तो हम सबकी लाइफ ऑफलाइन हो गई है ,क्रांति अच्छी है पर अति हर बात की बुरी है !इन्टरनेट और कम्पुटर का जमाना तो आ गया पर सामाजिक जीवन लगभग ख़तम हो सा हो गया है! बच्चे समय से पहले परिपक्व हो गए है । बच्चो का बचपन ,परियो की कहानिया सब बीती बाते हो गई है !गली नुक्कड़ के खेल सब कम्प्यूटर के स्क्रीन में चले गए है !

    Abhinav Srivastava के द्वारा
    May 9, 2012

    सही कहा आपने ….कुछ ऐसे ही विचारों के साथ “जाने कैसे दिन हैं ये…जाने कैसा जीवन है” शीर्षक से कुछ लिखा है …देखिएगा …

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीया दीप्ती जी , नमस्कार. यह दुनिया कहाँ जा रही है ? कुछ समझ नहीं आता. अब यही होना ही है . रिश्ते भी शर्मशार होंगे. इन्टरनेट का सदुपयोग कम, दुरूपयोग ज्यादे हो रहा है. खासकर किशोर उम्र के बच्चों के बीच. हैरानी तो तब होती है जब समझदार और उम्रदराज़ लोग भी वही करते नज़र आते हैं. मुझे वह दिन नहीं भूलता जब इन्टरनेट अभी हमारे देश में नया-नया आया था . उस समय मैं इलाहबाद में कंप्यूटर हार्डवेयर का काम करता था और एक बुजुर्ग जज साहब के यहाँ इन्टरनेट का कनेक्शन इंस्टाल किया था . उनकी ख्वाहिशें जानकर मुझे ही शर्म आने लगी. लेकिन कस्टमर थे , उनको संतुष्ट करना था . उनको इन्टरनेट पर वह सब जानकारी देनी पड़ी जो उनकी उम्र के लोगों के लिए शर्म की बात होनी चाहिए. कहाँ मैं उनके बेटे की उम्र का और कहाँ वो . खैर यह दुनिया है. यहाँ अच्छे और बुरे सब हैं . जो जिसके साथ हो ले. माँ-बाप भी अपने बच्चों को क्या संस्कार देंगे जब वह स्वयं ही संस्कारहीन होते जा रहे है. जब उनको खुद का ही होश नहीं है कि वह क्या कर रहे हैं तो अपनी संतानों पर क्या ध्यान देंगे. सार्थक सन्देश……इन्ही छोटे-छोटे प्रयासों से संभवतः कुछ परिवर्तन हो. आभार……..

    D33P के द्वारा
    May 4, 2012

    अजय जी नमस्कार सही कहा आपने और तो और रही सही कसर इन मोबाइल कम्पनीज ने पूरी कर दी है मोबाइल पर सस्ते में इन्टरनेट सुलभ है खुले में नहीं तो मोबाइल पर ही चैट और चाहे जैसे इन्टरनेट का उपयोग करो

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    May 4, 2012

    आज जितना ही विकास हो रहा है , व्यक्ति उतना ही गर्त में गिरता चला जा रहा है. पता नहीं कैसी मानसिकता होती जा रही है . मुझे तो कभी-कभी ऐसा लगता है , यह सारी प्रगति विध्वंस की ओर ले जा रही है.

    yogeshkumar के द्वारा
    May 5, 2012

    महाशय, मुझे लगता है आप तकनिकी और इंटरनेट का सकारात्मक पक्ष देखने के बजाय नकारात्मक पक्ष अधिक देख रहे हैं… जितने केस आपको नकारात्मक के मिलते हैं उससे कहीं अधिक इसके सकारात्मक पक्ष हैं..

yogi sarswat के द्वारा
May 4, 2012

दीप्ति जी नमस्कार ! शुरू में थोड़ी सी हंसी आई ……फिर लेख धीरे धीरे गंभीर होता चला गया और अंत ऐसा ………..उपदेश के साथ ख़त्म हुआ ! स्वाभाविक है , ऐसी उम्र में बच्चे चाहते हैं कुछ नया करना ! आपका जवाब बहुत सही लगा ! और अंत बहुत ही लाजवाब , dont waste your precious life online ! बहुत सही ! नया और अनूठा विषय !

    D33P के द्वारा
    May 4, 2012

    धन्यवाद योगी जी आपका तहे दिल से स्वागत है .वास्तव में आपका हँसना वाजिब था क्यूंकि इन्टरनेट क्या नया विषय है …….आज सबके लिए इन्टरनेट आम शब्द हो गया है और इसका उपयोग उससे भी आम .जब हम SOCIAL SITES का उपयोग करते है तो हमारी कई तरह के लोगो से मुलाकात होती है और बात भी होती है !मै यह नहीं कह रही कि इसका उपयोग बुरा है बात तो केवल उपयोग करने वाले के ऊपर निर्भर करता है ! इसके साथ मैंने एक विडियो का लिंक भी दिया है ! वास्तव में मैंने जब वो विडियो देखा और एक बिगड़ा बचपन शायद बिगड़ा शब्द गलत होगा गुमराह बचपन कहना उचित होगा ,मेरे संपर्क में आया तो दिल में कई सवाल आये !शायद अभिभावकों को ही अपने बच्चो के साथ इतना सामंजस्य और COMMUNICATION बनाये रखना होगा जिससे बच्चो की गतिविधियों पर नज़र रखनी आसान हो सके !

चन्दन राय के द्वारा
May 4, 2012

दीप्ती जी , आपके आलेख के प्रस्तुतीकरण से बेहद प्रभावित , फिर आपने जनचेतना जगाने की जो सफल कोशिश की , उसके लिए मेरा कहा हर शब्द छोटो होगा , आपने उस युवा के साथ दोस्ती ना तोड़ के , उसे जो सन्देश दिया उसके लिए आपको नमन

    D33P के द्वारा
    May 4, 2012

    चन्दन जी सादर नमस्कार …हम छोटी सी कोशिश के अलावा कर भी क्या सकते है ,,,और वो युवा कहाँ चंदन जी अभी तो बचपन भी पूरा नहीं जिया होगा उसने !आज इन्टरनेट ने बच्चो से उनका बचपन ही छीन लिया है !अगर आपने विडियो न देखा हो तो उसे जरुर देखिएगा और फिर अपनी प्रतिक्रिया भी दीजियेगा प्रतिक्रिया के लिया आभार


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