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बंद कलियाँ

Posted On: 14 May, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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Rose

सिमटी शरमाई सी  बंद ये कोमल कलियाँ

बंद की है भंवरो के लिए अपनी गलियां

धुप के टुकड़े आते है हर पल इन्हें मनाने

ओस की बंदे आती सुबह इन्हें लुभाने

मदमस्त होकर आकर लेने लगी फूल का

red-rose-copy6

अब तो भंवरो को भी नहीं डर शूल का

लहरा कर आ जाते चूमने कलियों का मुख!!

हवाओं ने भी लहरा लहरा कर गीत सुनाया

घटाओ ने झूम कर हवा का आँचल भिगोया!!

खुशबु से महक  उठा है धरा का दामन

भँवरे के गीत में कलियाँ खोई ,ली अंगड़ाई!!

देख रंगीले  फूल की मनमानी

भँवरे  भी हो गए अब तो अभिमानी!!

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44 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vikaskumar के द्वारा
August 11, 2012

सुंदर चित्रों के साथ एक सुंदर कविता ।

    D33P के द्वारा
    August 11, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आभार

sinsera के द्वारा
May 23, 2012

मेरी सदा सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक आवाज अनिल कुमार ‘अलीन’ कुत्ता, मैं या तू ?http://merisada.jagranjunction.com/2012/05/20/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%82/ sinsera के द्वारा May 22, 2012 48 घंटे से सोच रही हूँ कि इस पोस्ट को कोई “report abuse ” क्यूँ नहीं कर रहा है.? सभी प्रबुद्धजन पढ़ रहे हैं और कमेन्ट भी कर रहे हैं… मुझे कटु व कठोर भाषा कतई पसंद नहीं है लेकिन मजबूरीवश कह रही हूँ कि इस महावाहियत, घटिया, निकृष्ट कोटि के लेख को खुद जे जे ने क्यूँ नहीं हटाया….आश्चर्य है….? समाज की विकृतियों को विकृति के रूप में दिखाया जाये तो पढना बुरा नहीं है, लेकिन 2%मानसिक रोगियों के आधार पर पूरी स्त्री जाति को लेखक महाशय generalize करने की धृष्टता कैसे कर सकते हैं..? यह “x-rated” लेख पूरी स्त्री जाति का अपमान है. मैं लेखक महाशय से इस लेख को तुरंत हटाने की अपील करती हूँ …अन्यथा उनके इस घृणास्पद कृत्य के लिए उनके ऊपर मानहानि का दावा किया जा सकता है…. इस पोस्ट और मेरे कमेन्ट की कॉपी मेरे पास है….कृपया कमेन्ट डिलीट करने का निकृष्ट कृत्य न करें….

    follyofawiseman के द्वारा
    May 23, 2012

    अदरणीय एवं पूजनीय सरिता जी, ‘अपनी डफली अपना राग’ ………..मुझे तो ये देख कर यक़ीन नहीं आ रहा है की आप इस तरह की बातें कर रही है………. अरे जिसका कोई मान ही नहीं है उसक मानहानि क्या होगा……अगर ऐसा है तो आपको उसी वक्त respond करना चाहिए था जब आपने लेख को पढ़ा…….आत्मवान व्यक्ति respond करता है…..तीन दिन बाद react नहीं……..और ऐसा भी क्या मान जो किसी के देने से मिलता हो और न देने से घट जाता हो….मुझे पूरा उम्मीद है कि किसी पुरुष ने उकसाया होगा आपको……चाहे वो बाहर का पुरुष हो या फिर आपके ख़ुद के भीतर का….. इस कमेंट को पढ़ने के बाद एक बात तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की आपका चित स्त्रेण बिल्कुल नहीं है…..आपकी मानसिकता पुरुषो वाली है….. इस सब के आलवे……न तो कोई स्त्री सिर्फ स्त्री होती है और न ही कोई पुरुष सिर्फ पुरुष होता है……..स्त्री पुरुष के बीच जो भेद है वो quality का नहीं है quantity का है……हरेक पुरुष के भीतर स्त्री होती और हरेक स्त्री के भीतर पुरुष होता है…….और इसी वजह से, हो सकता है की किसी का शरीर स्त्री का हो लेकिन उसका चित पुरुष का हो…… “इस महावाहियत, घटिया, निकृष्ट कोटि के लेख को खुद जे जे ने क्यूँ नहीं हटाया…” जेजे ने इसलिए नहीं हटाया क्योंकि यह महावाहियात और घटिया लेख हमारे समाज का ही हिस्सा है……ये किसी और लोक की बात नहीं है……….. आपकी जानकारी के लिए एक बात बता दें….की बिना रावण के राम का होना असंभव है…….आप तब तक ही मर्यादित हैं तब की अमर्यादित लोग समाज मैं मौजूद हैं……ये जीवन का गहरा गणित है इसे अच्छे से समझ लीजिए…….जिस दिन दुनियाँ से प्रकाश का अंत हो जाएगा उसी दिन अन्ध कार भी चला जाएगा………. ” इस लेख को तुरंत हटाने की अपील करती हूँ” क्या हटा देने से मान-सम्मन वापिस आ जाएगा…..अगर यदि आजाएगा तो इस तरह की थोथी मान सम्मान का क्या मोल……….और किसी के माने देने से आपका मान बढ़ता है………..तो समझ लीजिए देने वाला आपसे कहीं जियादा सम्मानित है………..क्योंकि देने वाला लेने वाले से हमेशा ऊपर रहेगा……..मान-सम्मान भीख माँगने की चीज़ नहीं है………ये भिखमंगापन त्यागिए………! और अंत मे यही कहूँगा….कि , ’जो सच मे ही सम्मानित व्यक्ति है उनके मान सम्मान को वो लेख पढ़ कर तनिक भी ठेस नहीं पहुँचेगा….. और जिनको पहुँचेगा वैसे table कुर्सी की कौन परवाह करता है…………मेरे भीतर के स्त्री को तो कोई ठेस नहीं पहुँचा………” (और कोई भी व्यक्ति अगर अस्तित्व के इस स्त्री और पुरुष के रहस्य को और गहरे से समझना चाहता हो…….मुझे पर्सनल मेल कर के जान सकता है………) एक और बात ज़रा मुझे बताइए….जब आब मरेंगी तो क्या आप के साथ दुनियाँ की सभी तथाकथित स्त्रियाँ मर जाएँगी……? व्यक्ति का अस्तित्व होता है…समाज का नहीं…..मैं अचंभित हूँ कि जो लोग खुद अंधविश्वास मे जी रहें है वो लोगों को क्या अंधविश्वास से बाहर निकलेंगे……????

May 19, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, बहुत ही खुबसूरत और रोमांटिक रचना प्रस्तुत की है आपने।बहुत बहुत बधाई !!

    D33P के द्वारा
    May 19, 2012

    अभिवादन सहित स्वागत है सूरज जी …..बहुत दिनों बाद आपका आगमन हुआ ……प्रतिक्रिया के लिए आभार

sinsera के द्वारा
May 17, 2012

दीप्ती जी नमस्कार, खुबसूरत रोमांटिक नज़ाकत लेकिन…. भंवरों का क्या भरोसा है… उस की रफ़्तार से लिपटी रही आंखें मेरी उस ने मुड़ कर भी न देखा कि वफ़ा किस की थी…..

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आभार sinsera जी

yogi sarswat के द्वारा
May 16, 2012

अब तो भंवरो को भी नहीं डर शूल का लहरा कर आ जाते चूमने कलियों का मुख!! हवाओं ने भी लहरा लहरा कर गीत सुनाया घटाओ ने झूम कर हवा का आँचल भिगोया!! खुशबु से महक उठा है धरा का दामन भँवरे के गीत में कलियाँ खोई ,ली अंगड़ाई!! देख रंगीले फूल की मनमानी भँवरे भी हो गए अब तो अभिमानी!! बहुत खूब दीप्ति जी , बहुत सुन्दर रचना !

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    पसंद आने और प्रतिक्रिया के लिए आभार

dineshaastik के द्वारा
May 16, 2012

दीप्ति जी चित्र बहुत ही सुन्दर है जो रचना की सुन्दरता को और भी प्रभावशाली  बनाते हैं। बधाई…..

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    दिनेश जी सादर नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए आभार ,बस आप अपना आश्रीवाद बनाये रखे !

nishamittal के द्वारा
May 16, 2012

सुन्दर चित्रों सहित प्रस्तुत रचना अच्छी लगी दीप्ति जी.

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    निशा जी नमस्कार और आभार

akraktale के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ति जी नमस्कार, सुन्दर भाव लिए कलियों पर भंवरों की गुनगुन.बधाई. बागों में अक्सर झूमकर भंवरे ही गीत गाते हैं, सुना है ये चमन में कलियाँ खिलाने ही आते हैं. धुप ही है जो फूलों पे रंगोंरोगन कर जाती हैं और शबनम हर दिन इन्हें मोतीयों से सजाती है,

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    भंवरों की गुनगुन पर आपके शब्दों की रुनझुन ……..मजा आ गया आप की खूबसूरत प्रतिक्रिया पर ….बहुत बहुत शुक्रिया

vikramjitsingh के द्वारा
May 15, 2012

”अपनी हद से न गुजरे…..कोई इश्क में. जिसको जो भी मिला है….मिला है नसीब से..”

    D33P के द्वारा
    May 19, 2012

    बहुत बहुत शुक्रिया

minujha के द्वारा
May 15, 2012

सुंदर  चित्रों ने रचना के भावों को और सुंदर बना दिया है दीप्ति जी..,बधाई

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    मीनू जी बहुत बहुत धन्यवाद

follyofawiseman के द्वारा
May 15, 2012

तन्हा इश्क के ख़्वाब ना बुन कभी हमारी बात भी सुन …………………………. थोड़ा गम भी उठा प्यारे फूल चुने हैं खार भी चुन

    follyofawiseman के द्वारा
    May 17, 2012

    ”अबके सावन में ये गुस्ताखी मेरे साथ हुई, एक मेरे घर को छोड़ कर सारे शहर मे बरशात हुई….” हमारे साथ ये भेद-भाव क्यों……..?

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    किश्ती भी नहीं बदली ,दरिया भी नहीं बदला हम डूबने वालों का जज्बा भी नहीं बदला है शौक -ए-सफ़र ऐसा एक उम्र हुई हमने मंजिल भी नहीं पाई और रास्ता भी नहीं बदला

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ति जी , सुन्दर व भावात्मक रचना बधाई………………………. http://www.hnif.jagranjunction.com

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    हनीफ जी बहुत बहुत शुक्रिया

rekhafbd के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ती जी अति सुंदर रचना ,बधाई

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    रेखा जी धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ती जी , अब तो भंवरो को भी नहीं डर शूल का लहरा कर आ जाते चूमने कलियों का मुख!! हवाओं ने भी लहरा लहरा कर गीत सुनाया घटाओ ने झूम कर हवा का आँचल भिगोया!! सुन्दर भाव !

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    चन्दन जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ती जी आप सुंदर लिखती है … भाव तो अच्छे है पर इस्स्पे थोड़ी और मेहनत कीजिये …… बंद की है भंवरो के लिए अपनी गलियां धुप के टुकड़े आते है हर पल इन्हें मनाने ओस की बंदे आती सुबह इन्हें लुभाने…. सुंदर .. बधाई

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    महिमा जी नमस्कार आपका बहुत बहुत आभार ,,,,,आपका सहयोग बना रहेगा इसी आशा के साथ !

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 15, 2012

साज-सज्जा सुन्दर है.

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    अजय जी धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 15, 2012

बंद हो दरवाजे सनम तेरी महफ़िल के सजेगी महफ़िल दीवाने आयेंगे हवा तेज हो या मध्यम जलेगी शमा परवाने आएंगे डर नहीं मौत का खोफ नहीं काँटों का दीवाने चुप चाप jale jayenge aadarniy dipti ji, ye tukbandi jame to daad dijiyega, rah gayi हो kami to sudhar dijiyega aapki rachna hetu badhai usi ko adhar mankar maine bhi banayi.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    May 15, 2012

    वाह वाह वाह :)

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    May 15, 2012

    प्रिय महिमा जी, तुकबंदी में मास्टर हूँ. आदरणीय शाही जी बहुत तारीफ करते है, कुछ शब्द रह गए हैं, जब दीवान छपेगा डाल दूंगा. धन्यवाद मुस्कान हेतु.

    vikramjitsingh के द्वारा
    May 15, 2012

    आपकी तुकबंदी की तारीफ तो सभी करते हैं… आदरणीय नाना श्री……

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    May 16, 2012

    आदरणीय विक्रम जी , सादर नाती जी मैं आपको ढूढ़ रहा था.

    vikramjitsingh के द्वारा
    May 16, 2012

    आदरणीय नाना जी…..सादर प्रणाम.. हमें ढूँढने की क्या आवश्यकता है….बुजुर्गवार….एक बार आवाज़ तो दे कर देखिये… दोड़े चले आयेंगे….हम सदा ही आपके आसपास होते हैं… नाना जी….सादर..

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    May 16, 2012

    दिल को sakun mila. विक्रम जी. आभार.

    D33P के द्वारा
    May 17, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम ,क्यों मुझे शर्मिंदा करते है ,मै आपकी तुकबंदी में कमी निकालने की हिमाकत कैसे कर सकती हु .आपके शब्दों में सम्मोहन है .आपकी तुकबंदी लाजवाब !पर मुझे आपसे शिकायत है जब मैंने आपसे जवाब माँगा था आपने जवाब नहीं दिया ,हो सकता है आपने मेरा सवाल न देखा हो पर मुझे विश्वास है आपने जरुर देखा होगा पर आपने आँखे बंद कर ली !

mparveen के द्वारा
May 15, 2012

दीप्ती जी सुंदर भावाभिव्यक्ति …..

May 15, 2012

भरी दुनिया में आखिर दिल को लगाने कहाँ जाएँ, मोहब्बत हो गयी जिनको वो दीवाने कहाँ जाएँ……………………भाव अच्छे हैं…..पर अभिव्यक्ति तुकबंदी से बेहतर नहीं……

    D33P के द्वारा
    May 15, 2012

    शुभ प्रभात अनिल जी .प्रतिक्रिया के लिए आभार .पोस्ट करने के बाद मुझे भी लगा था कहीं कुछ कमी सी है ….अब समझ में आ गया ……..बहुत बहुत धन्यवाद


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