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चल दिए!!

Posted On: 23 May, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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Stairway

हमने आसमान से  जमीन का सफ़र तय किया उनके लिए!
उन्हें खबर भी न हुई एक नज़र देखा और मुस्करा कर चल दिए!!

हमने आसमान से  जमीन का सफ़र तय किया उनके लिए!

उन्हें खबर भी न हुई एक नज़र देखा और मुस्करा कर चल दिए!!

रफ्ता रफ्ता उनकी चाहत के रंग दिल में गहराने लगे !

हवाओ ने भी रुख बदला वो बारिश के डर से उठे और चल दिए!!

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आँखे बरस रही थी अनवरत ,दरिया बना था आँखों में !

उनके कदम बड़े और कागज़ की किश्ती तैरा कर चल दिए!!

क्या गिला करू  मैं इन झूमती हवाओं का !

उन्होंने संगीत समझा और गुनगुना कर चल दिए!!

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खनक उठे हम कांच के टूटे टुकडो की तरह !!

वो अपना अक्स निहार कर चल दिए !

ऐ खुदा किसी को ऐसा मंजर न दिखाए मोहब्बत में !!

हम उनके आगे बिखरते गए   किताब के पन्नो की तरह!

वो आये अहिस्ता से चिंगारी दिखा कर चल दिए!!

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34 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ajaykr के द्वारा
July 8, 2012

बहुत खूबसूरत रचना ……..वोह माफ किजियेंगा…… थोड़ी देर से देखा आप भी बहुत खूबसूरत हैं , आपके ब्लॉग की हर रचना बहुत खूबसूरत और बहुत अच्छी हैं , पलट पलट कर देखता हूँ ,आपसे ज्यादा आपकी इन रचनाओं को ….. …………. http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/02/आधुनिक-शिक्षा-का-यह-रूप-भी/

    D33P के द्वारा
    July 8, 2012

    ब्लॉग पर आने का शुक्रिया और तारीफ का भी …. आभार

akraktale के द्वारा
May 27, 2012

दीप्ति जी सादर, अच्छी शायरी, किसी एक को क्या कहूँ सभी शेर बहुत बढ़िया हैं.बस ऐसे हालात पर यही कहा जा सकता है ” वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन………….”

    D33P के द्वारा
    May 27, 2012

    मैने तोड़ी है रस्मे मुझपे इलज़ाम है ये निगाहे शौक उठी थी केवल और अंजाम है ये .. बहुत बहुत शुक्रिया रक्ताले जी……..हमेशा की तरह यही कहूँगी मुझे आपकी प्रतिक्रिया का हमेशा इंतज़ार रहता है .आभार

May 26, 2012

मुझे मत मरो मेरा क्या कसूर है………. http://satyaprakash.jagranjunction.com/2012/05/25/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B8/#comment-१२ किसी भी धर्म के लोग हो उन्‍हे आगे आकर इसका विरोध करना चाहिए और सरकार से भी निवेदन करना चाहिए कि इस तरह के कार्यक्रमो पर रोक लगायी जाय, मै आप सभी का आग्रह करना चाहता हुँ कि आप निम्‍न माबाईल न0 फोन कर इसे राकने का आग्रह करे जिलाधिकारी गोरखपुर 9454417544 आयुक्‍त गोरखपुर 9454417500 एस एस पी गोरखपुर 945440273 आई जी गोरखपुर 9454400209 एस पी आरए 9454401015 योगी आदित्‍यनाथ सांसद गोरखपुर 0551-2255454, 53

May 26, 2012

निःशब्द हूँ आज …..बिलकुल निःशब्द………! हमने आसमान से जमीन का सफ़र तय किया उनके लिए! उन्हें खबर भी न हुई एक नज़र देखा और मुस्करा कर चल दिए!! रफ्ता रफ्ता उनकी चाहत के रंग दिल में गहराने लगे ! हवाओ ने भी रुख बदला वो बारिश के डर से उठे और चल दिए!! आँखे बरस रही थी अनवरत ,दरिया बना था आँखों में ! उनके कदम बड़े और कागज़ की किश्ती तैरा कर चल दिए!! क्या गिला करू मैं इन झूमती हवाओं का ! उन्होंने संगीत समझा और गुनगुना कर चल दिए!! खनक उठे हम कांच के टूटे टुकडो की तरह !! वो अपना अक्स निहार कर चल दिए ! ऐ खुदा किसी को ऐसा मंजर न दिखाए मोहब्बत में !! हम उनके आगे बिखरते गए किताब के पन्नो की तरह! वो आये अहिस्ता से चिंगारी दिखा कर चल दिए!!….बहुत खूब……… दर्द की सीमा को पार कर गयी आपकी यह रचना……………किसी शायर ने कहा है दर्द का हद से गुजर जाना है दावा हो जाना…..इसका मतलब मेरे अनुसार, मर जाने से है……मतलब न रहेगा बांस न बजेगी बासुरी……..!एक आप से विनती करना चाहता हूँ यदि आप इसे मजाक या कुछ और न समझे तो……..आज के बाद फिर ऐसी कोई रचना पोस्ट मत करियेगा क्योंकि ऐसी रचना मुझको आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करती हैं….और यदि मैं मर गया तो फिर सोच लीजियेगा…..सारा इलज़ाम आपके ऊपर जाएगा…..!

    D33P के द्वारा
    May 26, 2012

    uffffff

follyofawiseman के द्वारा
May 25, 2012

दिल के टुकरे-टुकरे कर के मुस्कुरा के चल दिए….जाते जाते ये तो बता जा हम जिएंगे किसके लिए…. एक और,  हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ? रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ? जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ? is it enough for today….?

    D33P के द्वारा
    May 26, 2012

    आपका स्वागत है .. प्रतिक्रिया के धन्यवाद ……..

yogi sarswat के द्वारा
May 25, 2012

खनक उठे हम कांच के टूटे टुकडो की तरह !! वो अपना अक्स निहार कर चल दिए ! ऐ खुदा किसी को ऐसा मंजर न दिखाए मोहब्बत में !! हम उनके आगे बिखरते गए किताब के पन्नो की तरह! वो आये अहिस्ता से चिंगारी दिखा कर चल दिए!! दीप्ति जी , नमस्कार ! जितनी तारीफ आपकी रचनाओं की होनी चाहिए उतनी ही आपकी रचनात्मकता की और उससे भी ज्यादा आपकी सोच की ! बहुत ही सटीक चित्र लगाती हैं आप अपनी रचनाओं के साथ !

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    योगी जी आपने कुछ ज्यादा तारीफ कर दी …….पर आपका तहे दिल से शुक्रिया

dineshaastik के द्वारा
May 25, 2012

आँखे बरस रही थी अनवरत ,दरिया बना था आँखों में ! उनके कदम बड़े और कागज़ की किश्ती तैरा कर चल दिए!! क्या गिला करू मैं इन झूमती हवाओं का ! उन्होंने संगीत समझा और गुनगुना कर चल दिए!! क्या यही प्यार है इतना दर्द, खुदा बचाये ऐसे सच्चे  प्यार से। मेरा मानना है कि सच्चा प्यार एक  पागलपन है। प्यार से कब  किसने क्या पाया, हाँ कवि जरूर बना देता है ये प्यार। प्यार पीड़ा को जन्म देता है और पीड़ा कविता को, और कविता आनन्द को। सॉरी मैं कहाँ भटक  गया था। आया था प्रतिक्रिया देने  और  लिखने लगा प्रेम  रामायण। दीप्ति जी सादर नमस्कार, कविता की उपरोक्त पक्तियाँ बहुत  ही सुन्दर बन पड़ी हैं।

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    प्यार का सच किसने देखा जिसने देखा गया काम से मेरा ये मानना है प्यार एक भूकंप की तरह आता है ………., उसकी तबाही की जद में जो आएगा वो यकीनन रोयेगा पाना क्या है मोहब्बत में .जो आज तक पाया वो भी खोएगा रुसवा होने का गम पिएगा ,ठोकर भी खायेगा , दिनेश जी अभिवादन स्वीकार करे .. प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया …….

    dineshaastik के द्वारा
    May 27, 2012

    सच कहा आपने जो आज  तक  पाया वो भी खोएगा।  सच्चा प्यार बेकाम  सी, बेनाम  सी चीज  है। मुझे तो लगता है कि बदनाम  सी चीज  है। सच्चा प्यार कब  किसे मिला है, यह तो ईश्वर की तरह गुमनाम  सी चीज  है।। मुझे समझ  में नहीं आता सब जानते है प्रेम  रामायण , फिर भी प्यार के पीछे पागल  रहते हैं। जहाँ तक  मेरी समझ  है सच्चा प्रेम  केवल  पागल पन है।

vikramjitsingh के द्वारा
May 24, 2012

दीप्ति जी…….सादर प्रणाम…. हम जा तो कहीं और रहे थे…रास्ते में आपको देखकर रुकना पड़ा….तो सुनिए… ”तुम्हारी दुनिया से ‘चले जाने’ के बाद…… हम तुम्हें…..हर इक तारे में नज़र आया करेंगे….. तुम हर पल कोई दुआ मांग लेना…… और हम……हर बार टूट जाया करेंगे…….” सदा सलामत रहो….कई और भावपूर्ण रचनाओं के लिए…..

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया , और दुआओ के लिए बहुत बहुत आभारी है चंद शब्द आपकी नज़र में… हम तारो को आरजू समझ कर थाम लिया करेंगे हवाएं राहों में न रोक ले उन्हें भी पैगाम दिया करेंगे जा न पाओगे और किसी राह पर .हर इक कदम और हर इक राह में हम ही नज़र आया करेंगे

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 24, 2012

क्या गिला करू मैं इन झूमती हवाओं का ! उन्होंने संगीत समझा और गुनगुना कर चल दिए!! खनक उठे हम कांच के टूटे टुकडो की तरह !! वो अपना अक्स निहार कर चल दिए ! ऐ खुदा किसी को ऐसा मंजर न दिखाए मोहब्बत में !! हम उनके आगे बिखरते गए किताब के पन्नो की तरह! वो आये अहिस्ता से चिंगारी दिखा कर चल दिए!! वाह वाह ..दीप्ती जी .. ये हुई ना बात …. बहुत खूब ..

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    महिमा जी नमस्कार आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार …आपको मेरे ये चंद अल्फाज़ पसंद आये उसके लिए .धन्यवाद

Mohinder Kumar के द्वारा
May 24, 2012

दीप्ति जी, दिल को छूते हुये आशार और उतनी ही खूबसूरत तस्वीरें. लिखती रहें.

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

pawansrivastava के द्वारा
May 24, 2012

बहुत खूबसूरत रचना ..हो सके तो ऊपर तस्वीर में महदूद अश्कबारी करती मोहतरमा का पता दीजियेगा ….उससे मिलकर उसको अपने इस शेर के ज़रिये अपना हाले-दिल बयां करता हुआ कहूँगा कि – हमख्याल है तू ,हम दर्द है तू ,तू हमपीर मेरा हमसाया है तू भी मेरी तरह सितमज़द,मेरी तरह हीं इश्क का सताया है

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    पवन जी आपको यहाँ देखकर हर्ष हो रहा है …….. दुआ है आपको कोई गम न हो कभी गम से आँख नम न हो आपका आगाज़ यु ही होता रहे मुस्कराहटो का सिलसिला यु ही चलता रहे ! आभार

sinsera के द्वारा
May 24, 2012

दीप्ती जी,नमस्कार, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूँ कोई बेवफा नहीं होता… जो चल दिए,उनकी तरफ से चंद लाइनें …………… वो रोये तो बहुत पर मुंह मोड़ के रोये, कुछ होगी मजबूरी जो दिल तोड़ के रोये, मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकड़े, सुना है बाद में वो उन्हें जोड़ के रोये…….

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    इस दुनिया ने मोहब्बत की ऐसी तकदीर लिखी है खुदा ने भी आंसू और तन्हाई की लकीर लिखी है ! कोई मोहब्बत करके रोया कोई मोहब्बत खोकर रोया फिर भी उनको मोहब्बत ही सबसे बड़ी जागीर दिखी है !! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद sinsera जी

sadhna srivastava के द्वारा
May 24, 2012

मुहब्बत जगा कर इस दिल में इसे तोड़ कर ही चल दिए… हमने उन्हें पुकारना चाहा वो अनदेखा कर चल दिए… बहुत बढ़िया प्रस्तुति दीप्ति जी…. :)

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    साधना जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 24, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर गीत हो या गजल दिल चीर देते हैं खुदा न जाने क्या क्या तक़दीर देते हैं बेपनाह मुहब्बत का देते हैं वो तोहफा न जाने क्यूँ हर बात में सनम पीर देते हैं बहुत सुन्दर प्रस्तुति , बधाई

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    खुदा ने मोहब्बत दी पर तकदीर न दी कुछ हम थे दीवाने कुछ वो निकले बेगाने कैसे निभा पाते इश्क की रस्में क्या करते हमने भी चुन लिए वीराने धन्यवाद प्रदीप जी …सदैव आभार

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    May 26, 2012

    वीराने में भी एक अमन होता है बेगानों का भी एक चमन होता है मसीहा भी बैठ रात भर रोता है दिवानो का भी एक चलन होता है जमाना क्या जमाना ही जाने खुशनसीब वो जिसे सब हांसिल होता है आपकी सारी प्रतिक्रियाएं पढ़ीं , लाजबाब. बधाई.

    D33P के द्वारा
    May 26, 2012

    आपका आश्रीवाद जो है मेरे साथ ……

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
May 24, 2012

बहुत सुन्दर रचना |

    D33P के द्वारा
    May 25, 2012

    विवेक जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

nishamittal के द्वारा
May 24, 2012

बहुत सुन्दर भाव दीप जी सचित्र प्रस्तुति बहुत अच्छी लगी.बधाई

    D33P के द्वारा
    May 24, 2012

    निशा जी शुभ प्रभात ……… प्रतिक्रिया के लिए के बहुत बहुत धन्यवाद


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