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मै तेरा आइना हूँ!!

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आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ

मैंने हर चेहरे को सुबह के उजाले में चमकते देखा है  !
मैंने .मासूम बचपन को मुस्कराते हुए देखा है !!
.बचपन की अठखेलियों में नन्हे पैरो को थिरकते देखा है !
आ मेरे करीब आ कि मै तेरा आइना हूँ !!

मैंने हर चेहरे को सुबह के उजाले में चमकते देखा है  !

मैंने .मासूम बचपन को मुस्कराते हुए देखा है !!

.बचपन की अठखेलियों में नन्हे पैरो को थिरकते देखा है !

आ मेरे करीब आ कि मै तेरा आइना हूँ !!

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मैंने जिन्दगी के हर पल को करीब से देखा है !

हर शख्स को मुस्कराते और आंसू बहते देखा है !!

बचपन को जवानी की दहलीज़ चढते देखा है!

आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

यौवन के चेहरे पर मोहब्बत की लकीरों को सरकते देखा है !

छुपकर मुस्कराते और नज़रे चुराते देखा है !!

आँखों में जुदाई के आंसुओ को लरजते देखा है !!

दुल्हन को सजते और संवरते देखा है !!

पिया के आने की आहट से शरमाते और सिमटते देखा है !!

आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

M340/0307

उम्र के निशानों को चेहरे पर चमकते देखा है!

उम्रदराज़ हाथों को निशानों पर उंगलिया फिराते देखा है !!

आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ!!

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मैंने हर चेहरे पर सोच का समन्दर लहराते देखा है !

समंदर की गहराई में कदम डगमगाते देखा है !!

मैंने तुम्हे जीत पर मुस्कराते और हार  पर रोते देखा है !

झूठ पर कसमसाते और सच पर खिलखिलाते देखा है !

मैंने सबको सपनों  की उडान भरते ,गम में नीचे गिरते देखा है !

सब खुशियों और दर्द भरी बातो को बतियाते देखा है !

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आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

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44 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aadi के द्वारा
August 10, 2012

Aaj Phir Aaina Puchta Hai, Ki Teri Aankhon Me Nami Kyon Hai… Jiski Chahat Me Khud Ko Bhula Diya, Uski Chahat Me Kami Kyon है  bahut achha likhti hain d33pti g aap ek ek lafz tareef ke kabil hai

vikramjitsingh के द्वारा
August 9, 2012

”अंदाज़ अपना देखते हैं आईने में ‘वो’ और ये भी देखते हैं…..कोई देखता न हो..”

nish के द्वारा
July 28, 2012

मैंने हर चेहरे पर सोच का समन्दर लहराते देखा है ! समंदर की गहराई में कदम डगमगाते देखा है !! मैंने तुम्हे जीत पर मुस्कराते और हार पर रोते देखा है ! झूठ पर कसमसाते और सच पर खिलखिलाते देखा है ! मैंने सबको सपनों की उडान भरते ,गम में नीचे गिरते देखा है ! सब खुशियों और दर्द भरी बातो को बतियाते देखा है ! वाह क्या खूब कहा आपने एक सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें

    D33P के द्वारा
    July 28, 2012

    nish जी आपका स्वागत है ….आपके कीमती समय और पसंद करने के साथ साथ प्रतिक्रिया के लिए आभार

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 11, 2012

हर शख्स को मुस्कराते और आंसू (बहाते) देखा है !! इसी मंच पर आईने (दर्पण ) पर एक यादगारी रचना पढ़ी थी किसी की ….. आज आपकी कलम की जादूगरी से फिर से एक काबिलेतारीफ रचना इसी विषय पर पढ़ने को मिली ….. हार्दिक आभार सहित मुबारकबाद

    D33P के द्वारा
    July 11, 2012

    हमारे पेज पर आपका सहर्ष स्वागत है ,तारीफ का तो क्या कहू आज बहुत लम्बे अन्तराल के बाद हमारी किसी रचना पर आपकी तारीफ के चंद शब्द मिले है, उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!वैसे हमारे पेज पर आने में कोई पाबन्दी भी नहीं है …जब चाहे बिन बुलाये मेहमान की तरह (जैसे हम आते है ) आपका भी आगमन सुखद ही लगेगा हमें !पुन: धन्यवाद

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    July 12, 2012

    आदरणीय दीप्ती जी …. सादर अभिवादन ! आज सुबह ही याद आया की आपके प्रश्न का अपने ब्लॉग पर उत्तर दिया ही नहीं …. जैसा की आदरणीय भ्रमर जी ने प्रश्न उठाया की आज तक मैं कांग्रेस के विरोध को होते हुए देख कर भी चुप क्यों रहा ….. अगर कांग्रेस का कोई नेता घौटाले को अंजाम देता है तो मैं पार्टी को समर्थन के नाम पर उस को हलक के नीचे नहीं उतार सकता ….. अगर इस मंच पर सही को सही कहा है तो इस बात का यह मतलब नहीं हूँ की मैं कांग्रेस विरोधी हूँ …. इसी बात को बताने तथा यह भी समझाने , की कमेन्ट के लालच में किसी का भी अकारण ही समर्थन नहीं बल्कि उसकी बजाय उत्साहवर्धन करने की नियत से ही थोड़ा बहुत सहा है ….. वैसे भी राजनितिक पार्टी के नाम पर और के नाम पर लड़ना कम से कम इस मंच पर बिलकुल भी उचित नहीं है ….. ********************************************************************* सच में ही आपकी रचना अति उत्तम है ….. मैं मीनमेख निकालने वाला ऐसे ही जल्दी जल्दी किसी की तारीफ नहीं करता हूँ ….. इसमें कहा गया तो सामने दीखता ही है लेकिन बहुत से अनकहे की कल्पना करके, उसको समझ करके पाठक खुद ही इसको अपने लिए विस्तार दे लेता है ….. यह एक अलग खासियत है इस कविता की ….. बस आज इतना ही

    D33P के द्वारा
    July 26, 2012

    आपकी तारीफ मेरे लिए पुरस्कार से कम नहीं ,आपका आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
July 11, 2012

दीप्ति जी, खूबसूरत लफ़्ज, खूबसूरत तस्वीरें और अन्दाजे बंया. एक शेर अभी अभी लिखा आप की रचना पढ कर.. “हैरान हूं ऐ मेरे आईने कि कैसे तू टूट कर बिखर न गया तूने किस तरह संभाले हैं इतने समन्दर अपने दिल में” लिखते रहिये

    D33P के द्वारा
    July 11, 2012

    “हैरान हूं ऐ मेरे आईने कि कैसे तू टूट कर बिखर न गया तूने किस तरह संभाले हैं इतने समन्दर अपने दिल में मोहिन्द्र जी आपको मेरी पोस्ट पसंद आई उसके लिए शुक्रिया और डबल शुक्रिया आपके खूबसूरत शेर और प्रतिक्रिया के लिए आभार

rekhafbd के द्वारा
July 10, 2012

दीप्ति जी उम्र के निशानों को चेहरे पर चमकते देखा है! उम्रदराज़ हाथों को निशानों पर उंगलिया फिराते देखा है !! आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ!,अतिसुन्दर रचना और अति सुंदर तस्वीरें ,बधाई

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    रेखा जी ,आपने समय दिया ,साथ ही खूबसूरत शब्दों में प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार

R K KHURANA के द्वारा
July 10, 2012

प्रिय दीप्ती जी, वाकई आपने सबको आईना दिखा दिया ! खूबसूरत तस्वीरों के साथ आईना दिखाती खूबसूरत कविता ! राम कृष्ण खुराना

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    नमस्कार खुराना जी ,,,,,,,आप तो शब्दों के धनी है ,आपके चंद लफ्ज़ अनमोल है हमारे लिए प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार

akashsen के द्वारा
July 10, 2012

ब्लॉग फीचर्ड होने की बधाई स्वीकार करे……..

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    धन्यवाद आकाश जी

yogi sarswat के द्वारा
July 10, 2012

मैंने हर चेहरे पर सोच का समन्दर लहराते देखा है ! समंदर की गहराई में कदम डगमगाते देखा है !! मैंने तुम्हे जीत पर मुस्कराते और हार पर रोते देखा है ! झूठ पर कसमसाते और सच पर खिलखिलाते देखा है ! मैंने सबको सपनों की उडान भरते ,गम में नीचे गिरते देखा है ! सब खुशियों और दर्द भरी बातो को बतियाते देखा है ! क्या लिखूं ? जब इतनी बेहतरीन प्रस्तुति नज़रों के सामने हो तो कुछ कहना मुहाल हो जाता है ! आदरणीय दीप्ति जी मैं आपकी रचनाओं में लगाईं जाने वाली तस्वीरों की तारीफ हमेशा करता रहा हूँ , आज मुझे आपके लिखने के हुनर को सलाम करने दीजिये ! बहुत खूब , मेरे पास अलफ़ाज़ नहीं हैं !

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    योगी जी,नमस्कार आपने समय दिया और तारीफ भी कुछ ज्यादा ही कर दी ,,,,आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए आभार

sonam के द्वारा
July 10, 2012

बहुत खुबसूरत …………..जितनी तारीफ की जाये कम है !

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    सोनम जी जी,नमस्कार ,ब्लॉग पर स्वागत है आपका ,,, प्रतिक्रिया के लिए आभार

roshni के द्वारा
July 10, 2012

दीप्ती जी आइना तो जो देखेगा वही दिखायेगा , प्यार हो नफरत हो या उम्र हो , जितना भी होगा उतना ही सामने लायेगा… सुंदर कविता और चित्र तो बहुत बढ़िया आभार

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    रोशनी जी नमस्कार ,ब्लॉग पर स्वागत है आपका ,,, प्रतिक्रिया के लिए आभार ,आगे भी आपकी प्रतिक्रिया की अपेक्षा के साथ …दीप्ति

allrounder के द्वारा
July 10, 2012

नमस्कार दीप्ती जी, शब्दों और भावों के बेहतरीन सामंजस्य और संयोजन से बेमिसाल रचना का सृजन किया आपने, आपकी इस कृति पर हार्दिक बधाई आपको !

    D33P के द्वारा
    July 10, 2012

    allrounder जी,नमस्कार ,,,,आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए आभार

akraktale के द्वारा
July 9, 2012

दीप्ति जी सादर, जो सामने आया समझो गया.कुछ नहीं छुपता जब सामने हो आइना. आपकी सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई.

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    .आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
July 9, 2012

आदरणीया दीप्ति जी, आदाब, नमस्कार और प्रणाम! मैंने कई बार आपकी पंक्तियों को और छवियों को देखा कभी सामने से तो कभी छिपकर … कलुषित मन में बहुत सारे ख़याल आए और गए ….. याद आई वो पंक्तियाँ … मैंने दिया जिनको आइना, आइना लेकर भी वो आई ना! फिर मैंने अपने आप को आईने में देखा तो राजा दसरथ की याद आ गयी … थोड़ी प्रेरणा बुजुर्ग सज्जन को अपने आपको आईने में निहारते हुए देख कर भी सोचा …. अब थोडा सा रसा स्वादन आप भी कर लीजिये गोस्वामी जी की उन पंक्तियों को जब राजा दशरथा ने अपने आपको आईने में उस समय देखा था जब उनके भी बाल पकने लगे थे. एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा।। सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।। नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।। तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।। मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।। रायँ सुभायँ ‘मुकुरु कर’ (आईने को हाथ में लिया) लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।। श्रवन समीप भए सित केसा( कान के पास कुछ केश सफ़ेद होने लगे थे)। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।। नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।। दो0-यह बिचारु उर आनि नृप सुदिनु सुअवसरु पाइ। प्रेम पुलकि तन मुदित मन गुरहि सुनायउ जाइ।। अंत में कुपित या ईर्ष्याअग्नि में जल कर आपकी ही पंक्ति को दुहराता हूँ — “करती क्या हो सारा दिन” ! बस आईने को निहारना … यही काम रह गया है … कृपया अन्यथा न लीजियेगा … पर आपकी बेहद ‘खूबसूरत प्रस्तुति’ को देख अपने आप को रोक नहीं सका! बधाई!

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    सिंह सा. नमस्कार …आनंद आ गया आपकी प्रतिक्रिया के खूबसूरत अंदाज़ पर . करती क्या हो सारा दिन” ! बस आईने को निहारना … यही काम रह गया है ? आपके इस सवाल के जवाब में चंद शब्द ……. “आइना मुझे देखकर मगरूर नहीं होता मेरा अक्स भी मुझसे दूर नहीं होता !! कितने ही पल बिताऊ आईने के सामने मेरा कोई सपना चूर चूर नहीं होता !! वो सुनता है मेरे तस्सवूर के गीत आइना मुझसे कभी बोर नहीं होता !!” .आपकी प्रतिक्रिया और हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद …….

dineshaastik के द्वारा
July 9, 2012

दीप्ति जी कमाल की शब्द शक्ति, लगता है कि जैसे आइना स्वयं बोल रहा हो। चित्रों के संकलन तो ऐसे जैसे दुल्हन के माथे पर बिन्दी….इतना खूबसूरत आइना कहीं और नहीं देखा। तारीफ किये बिना रहना बहुत ही मुश्किल है।

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    दिनेश जी नमस्कार ……..आप सबके स्नेह और आश्रीवाद से कुछ लिखने की कोशिश करते है !आप सबकी प्रतिक्रिया हौसला देती है .बहुत बहुत आभार ……स्नेह बनाये रखे

Chandan rai के द्वारा
July 8, 2012

दीप्ती जी , कुछ रचनाये अपना रास्ता खुद ढूंढ़ लेती है , वो अपनी उपस्थिति से जगह पर चाँद जड़ देती है , आपकी यह रचना भी मंच का नगीना है !

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    नमस्कार चन्दन जी ……..प्रतिक्रिया के लिए .बहुत बहुत आभार ……स्नेह बनाये रखे

chaatak के द्वारा
July 8, 2012

Nice composition! speaking photographs! good combination! congratulations !!!

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    chaatak ji thanx for nice words n to be here

nishamittal के द्वारा
July 8, 2012

वाह दीप्ति जी इतनी सुन्दर सचित्र प्रस्तुति बधाई.

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    आदरणीय निशा जी …नमस्कार ब्लॉग पर आने और प्रतिक्रिया के लिए आभार

ajaykr के द्वारा
July 8, 2012

बहुत खूबसूरत ब्लॉग ………अबतक जितने ब्लॉग मैंने इस मंच पर पढ़े सबसे खुबसुरत ………… http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/02/आधुनिक-शिक्षा-का-यह-रूप-भी/

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    अजय जी प्रथम आगमन पर आपका स्वागत है ,,,आपने मेरी रचनाओ को पड़ने के लिए समय दिया उसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया !आपने जिस अंदाज़ में तारीफ की …..उसका धन्यवाद किस तरह दू…शब्द नहीं है ….. प्रतिक्रिया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 8, 2012

jivan ke ssare padaon kaa sajiv chitran. aayina bhi aayine men dekhta hae har lafj aapkii kalam ko tarasta hae bahai. swagat hae bhaarat main.

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम …….आपको मेरे ब्लॉग पर देखकर अच्छा लगा (कि आप स्वस्थ है …सबकी शुभकामनाये आपके साथ है )dubai में जागरण जंक्शन को बहुत miss किया !वापिस अपने देश में ,अपने घर में कितना सुकून है ,उसका जवाब नहीं ! .अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखे ! इसी आशा के साथ प्रतिक्रिया के लिए आभार

akashsen के द्वारा
July 8, 2012

लिखने का अंदाज़ तो क्या कहू , प्रस्तुतीकरण उससे भी उम्दा है… दीप्ति जी

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    आपका बहुत बहुत शुक्रिया

akashsen के द्वारा
July 8, 2012

दीप्ति जी बहुत ही खूबसूरत लिखा है आपने ,, मैंने हर चेहरे पर सोच का समन्दर लहराते देखा है ! समंदर की गहराई में कदम डगमगाते देखा है !! मैंने तुम्हे जीत पर मुस्कराते और हार पर रोते देखा है ! झूठ पर कसमसाते और सच पर खिलखिलाते देखा है ! आ मेरे करीब आ कि , मै तेरा आइना हूँ !!

    D33P के द्वारा
    July 9, 2012

    नमस्कार आकाश जी ,आपका आना बहुत ही सुखद लगा .,प्रतिक्रिया के लिए आभार


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