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जहर का कहर

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July_18_2012_18101

देश में बिहार,केरल महाराष्ट्र .मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश ,राजस्थान ,झारखण्ड ,हरियाणा और छत्तीसगढ़ में तंबाकूयुक्त गुटखा एवं पान मसाला पर प्रतिबंध लगा दिया गया है इसके साथ ही जिला और पुलिस प्रशासन को गुटखा बेचने वालों पर सख्ती करने का कानूनी अधिकार मिल गया है!! शेष राज्यों में भी बहुत जल्दी ये पाबन्दी लागू हो जाएगी ! प्रतिबन्ध लगाने के साथ साथ राज्य सरकारों ने कोर्ट में कैविएट भी दायर की है जिसके तहत गुटखा लाबी की किसी भी याचिका को सुनने और फैसला देने से पहले राज्य सरकारों का पक्ष भी सुना जाये ! इससे एक तरफ़ा फैसले और स्टे की आशंका समाप्त हो गई है अब एक नज़र इन आंकड़ो पर भी डालिए-

१)50 हजार करोड़ का कारोबार पूरे देश में

2)12हजार करोड़ की राजस्व प्राप्ति सरकारों को
3)40 हजार करोड़ का खर्च तंबाकू और गुटखा खाने से होने वाली बीमारियों के बचाव पर
4)27 करोड़ से अधिक लोग तंबाकू और गुटखे का सेवन करते है
5) बाजार में 500से भी अधिक तरह की तंबाकू और गुटखे की ब्रांड बिकती है

इस पाबन्दी के तहत गुटखे का वितरण और भंडारण करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।गुटखे पर प्रतिबंध के फैसले को भी व्यापारियों ने अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। एक तरफ प्रतिबंध को हटाने की मांग की जा रही है,  गुटखे पर प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारी राज्य सरकार पर समय देने के लिए लगातार दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। !दूसरी तरफ व्यापारी इसी गुटखे को दो से तीन गुना ज्यादा कीमत पर बेचकर मुनाफा काटने में जुटे हैं। कई व्यापारियों ने आने वाले दिनों में ब्लैक मार्केटिंग करने के लिए इसका अवैध रूप से स्टाक करना शुरू कर दिया है। गुटखे की कालाबाजारी में मोटे फायदे को देखते हुए दूसरे धंधों के कारोबारियों ने भी इसमें मोटी रकम निवेश कर दी है। बाजार से नामी कंपनियों के गुटखे गायब हो रहे हैं और छुपकर निर्धारित कीमत से कई गुना ज्यादा कीमत में बिक रहे है ! प्रतिबंध लगाने के बाद दुकानदारों ने तंबाकू पाउच की लंबी माला को सामने से हटा कर उसके स्थान पर रसभरी सुपारी की माला लटका दी है।

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मगर गुटखा के शौकीनों का कहना है कि इसी की आड़ में उन्हें मंहगे दाम देने के बाद पाउच का पैकेट मिल जाता है। प्रतिबंध के बाद भी स्कूल के आस पास के पान ठेले और अन्य दुकानों में गुटखा सहजता के साथ उपलब्ध है। इन दुकानों में स्कूली बच्चे भी इसकी खरीदी करते हुए देखे जा सकते हैं। आजकल ऑफिस बसों और ट्रेनों सब जगह लोग मुह में तम्बाकू पर गुटखा खाते हुए बड़े से बच्चे तक ,महिलाए तक दिख जाएँगी यह जानते हुए कि तम्बाकू चबाने से मुह,गला ,अमाशय ,फेफड़े का कैंसर हो सकता है ,लोग इसके आदी है !भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान कि रिपोर्ट पुरुषो में 50 प्रतिशत 25 प्रतिशत स्त्रियों में केंसर का कारण तम्बाकू है .इसका सेवन करने वालो में 90 प्रतिशत को मुह का केंसर है ! धुएं रहित तम्बाकू में 3000 से अधिक रासायनिक यौगिक है ! इनमे से २० यौगिक केंसर का कारण है !

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यह पाबंदी पूरे देश में लगे तभी इस पर प्रतिबंध कारगर साबित होगा। वरना आसानी से दूसरी जगह और राज्यों से छिपाकर इसे प्राप्त किया जा सकेगा !आदेशो के तहत जर्दा युक्त गुटखा ही प्रतिबंधित है। बिना जर्दे वाले पान मसाले पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। !जबकि पान मसाले में मौजूद निकोटीन कैंसर का कारक है ! गुटखे का ज्यादातर व्यापार ब्लैक में चल रहा है। ग्रे मार्केट में ही गुटखे की खरीदी-बिक्री हो रही है। प्रतिबंध लगने के बाद व्यापारी करोडो का स्टाक जाम होने की बात कह रहे हैं। स्टॉक के खुलासे के बाद अब टैक्स एजेंसियां कर चोरी के एंगल से भी जांच कर रही हैं। सरकारी एजेंसियों को भी शक है कि बिना बिल के माल को प्रतिबंध के बाद खातों में दिखाया जा रहा है। कारोबारी सूत्रों की माने तो इस धंधे में 40 फीसदी से ज्यादा का माल बिना बिल का होता है। आज व्यापारी खुद बोल रहे हैं कि उनके पास करोडो का माल जाम है। अब ये सोचने की बात है कि जो माल व्यापारियों के पास जाम है उसका क्या होगा ? वो चोरी छिपे जनता के हाथो में नहीं पहुंचेगा ? देखा जाये तो गुटखे पर सरकारी प्रतिबंध का कोई असर नजर नहीं आ रहा है।

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शहर के गली-मोहल्लों, कॉलोनी के ज्यादातर जनरल स्टोर्स और ठेलों में चोरी-छिपे गुटखे बिक रहे हैं। बैन के चलते लोग इन कंपनियों के गुटखों को ज्यादा खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं। लेकिन अब भी एक सवाल बाक़ी है: सवाल है कि सरकार किस हद तक इस प्रतिबंध को लागू करवा पाएगी.पान मसाला और गुटखा के कारण सरकार काफ़ी राजस्व कमाती है. आशंकाएँ बरक़रार हैं क्योंकि दिल्ली सरकार ने भी कुछ साल पहले सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने वालों पर जुर्माना लगाने का फ़ैसला किया था लेकिन लोग अब भी बसों में और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीते है !कई राज्यों में शराब पर भी प्रतिबन्ध है मगर आसानी से प्राप्त की जा सकती है ! जगह जगह राज्यों में जो तम्बाकू के उत्पाद हो रहे है उनका क्या होगा ,उनकी मौजूदगी में क्या ये प्रतिबन्ध प्रभावी होगा ?गुटखा फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों पर भी असर पड़ेगा.उनका रोजगार छिनने पर सरकारे क्या रुख अपनाएगी क्या प्रतिबन्ध लगाने से पहले उनके लिए भी कोई व्यवस्था का विचार किया है ?

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तंबाकूयुक्त गुटखे पर प्रतिबंध को अच्छा प्रयास है पर प्रतिबन्ध के साथ साथ जन साधारण में इससे होने वाले  नुकसान  से भी जागरूक करना जरुरी है  तभी ये प्रतिबन्ध कारगर होगा !!किन्तु सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि इस पाबन्दी के  तहत न तो तम्बाकू पर पाबन्दी लगाई गई है न गुटखे पर ,यह पाबन्दी तंबाकूयुक्त गुटखे पर  लगाई गई है !क्या  ये प्रतिबन्ध केवल सरकार और गुटखे के बड़े खिलाडियों की छोटे विक्रेताओ को मार्केट से गायब करने की मिली भगत है ?

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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
August 11, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, सादर अभिवादन!ऐसे जागरूक ,जानकारी से भरे लेख लिखने के लिए बधाई पर खाली कानून ,सरकारे ,गुटके को नहीं रोक सकते गुजरात का ही उदाहरण लीजिए वहाँ शराब पर प्रतिबंध होने के बाबजूद गुजरात शराब का सबसे ज्यादा उपभोग करने वाला राज्य है लेकिन अगर जनता जागरूक हो जाये तो अवश्य ही इस पर रोक संभव है,अगर सरकारे वाकई गुटके पर रोक लगाने को लेकर गंभीर हैं तो इसके उत्पादन पर रोक लगानी पड़ेगी ! सरकार किस हद तक इस प्रतिबंध को लागू करवा पाएगी.पान मसाला और गुटखा के कारण सरकार काफ़ी राजस्व कमाती है. ,यही कारण है पूर्ण रूप से पाबंदी लग ही नही सकती

    D33P के द्वारा
    August 18, 2012

    नमस्कार .योगी जी ….. ,प्रतिक्रिया के लिए आभार

aadi के द्वारा
August 10, 2012

BAHUT ACHHA LIKHA HAI AAP NE D33PTI G SAMAJ SUDHARAK LEKH

    D33P के द्वारा
    August 13, 2012

    आदिल बहुत बहुत धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
August 9, 2012

दीप्ति जी….सादर….. आपने ये तो लिखा ही नहीं…….”हर पाउच पर 8 पैसे केंद्र सरकार के खजाने में जाते हैं….और इन इकठ्ठा हुए पैसों को सरकार के कर्ता-धर्ता + मंत्री + चमचे अपने-अपने स्विस बैंक खाते में डालते हैं…..(कई माननीय तो गुटखा भी खाते हैं (वो भी मुफ्त) तो इस पर प्रतिबन्ध कैसे लग सकता है….???

    D33P के द्वारा
    August 18, 2012

    नमस्कार ……आपकी बात से सहमत हु ,प्रतिक्रिया के लिए आभार

minujha के द्वारा
August 8, 2012

दीप्ति जी जन जादरण के उद्देश्य से लिखा गया एक बेहतरीन आलेख

    minujha के द्वारा
    August 8, 2012

    कृपया जागरण पढें.

    D33P के द्वारा
    August 8, 2012

    मीनू जी प्रतिक्रिया के लिए आभार …..आपने लिखा कि जागरण पढें..इस बाबत अगर कुछ विस्तार से लिखते तो …

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 9, 2012

    दीप्ति जी…मीनू जी से ‘जागरण’ पहले गलत लिखा गया था….इसलिए उन्होंने लिखा ”कृपया जागरण पढें”

seemakanwal के द्वारा
August 6, 2012

जाग्रति पूर्ण लेख के लिए बधाई .

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    सीमा जी  प्रतिक्रिया के लिए आभार

vijay के द्वारा
August 6, 2012

दीप्ती जी नमस्कार ,ऐसे जागरूक ,जानकारी से भरे लेख लिखने के लिए बधाई पर खाली कानून ,सरकारे ,गुटके को नहीं रोक सकते गुजरात का ही उदाहरण लीजिए वहाँ शराब पर प्रतिबंध होने के बाबजूद गुजरात शराब का सबसे ज्यादा उपभोग करने वाला राज्य है लेकिन अगर जनता जागरूक हो जाये तो अवश्य ही इस पर रोक संभव है,अगर सरकारे वाकई गुटके पर रोक लगाने को लेकर गंभीर हैं तो इसके उत्पादन पर रोक लगानी पड़ेगी

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    विजय जी सरकार किसी भी प्रतिबंधित चीज़ पर “स्वास्थ्य के हानिकारक है ” चेतावनी लिखकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लेती है ,उत्पादन करने वाले भी कहते है हमने चेतावनी लिखी है ना! फिर भी लोग अपनी आँखे बंद कर लेते है तो हम क्या करे ! पर सरकार अपने राजस्व की लालच में इसका उत्पादन बंद करने के लिए तैयार नहीं ..प्रतिक्रिया के लिए आभार

yamunapathak के द्वारा
August 4, 2012

जब तक व्यक्ति स्वयं सचेत नहीं होगा प्रतिबन्ध महज़ एक भुलावा ही रहेगा.

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    यमुना जी सही कहा लोग इसके दुष्प्रभाव जानते हुए भी इससे परहेज़ नहीं करते …….

rekhafbd के द्वारा
August 3, 2012

दीप्ति जी आपने बहुत अच्छा लिखा है , सरकार किस हद तक इस प्रतिबंध को लागू करवा पाएगी.पान मसाला और गुटखा के कारण सरकार काफ़ी राजस्व कमाती है. ,यही कारण है पूर्ण रूप से पाबंदी लग ही नही सकती ,आभार

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    नमस्कार रेखा जी सरकार अपने राजस्व को बंद नहीं करना चाहती ……अगर ऐसा होता तो इनका उत्पादन ही ना होता ! शराब के प्रतिबन्ध को भी पूर्णरूप से लागु नहीं कर पाई सरकार और अब एक तम्बाकू युक्त पान मसाला का शगल .

akashsen के द्वारा
August 3, 2012

नमस्कार दीप्ति जी सच में यह एक राष्ट्रव्यापी समस्या हैं, इसके लिए दोनों ही गुनहगार है ! खाने वाला और बनाने वाला …….खाने वाले अपना ध्यान नहीं रख सकते तो बनाने वाले के लिए तो कमाई का जरिया है ………… उत्कृष्ट लेख है! लेख फीचर्ड होने की भी बधाई .

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आभार…धन्यवाद

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
August 3, 2012

दीप्ती जी सादर अभिवादन, आपका लेख गुटखा प्रतिबन्ध के प्रत्येक पहलु पर प्रकाश डालता हुआ एक उत्कृष्ट कोटि का लेख है जिसे पड़ने के बाद इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं की पूरी जानकारी मिली आपको बहुत बहुत साधुवाद….काश ऐसी चीज़ों को सरकार ही नहीं आम जनता भी प्रतिबंधित कर दे मेरी इस कविता पर आप अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दीजियेगा http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/08/01/my-name-is-sunny-leone/

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    अनिल जी सही कहा जब तक जनता जागरूक नहीं होगी ,सरकार की मनमानी चलती रहेगी ……मुझे आश्चर्य हुआ जब मेरे एक दो परिचित जिनको मैंने जब भी देखा मुह में गुटखा देखा ,, मैंने उनसे अपना ये ब्लॉग पढने का आग्रह किया तो उन्होंने इंकार किया ….कि हमें पता है हमे इससे बहुत नुकसान होगा पर क्या करे हम तो ये सब खाना पसंद है .अब ऐसे लोगो का क्या किया जाये ?

Mohinder Kumar के द्वारा
August 3, 2012

दीप्ति जी, सारपूर्ण लेख… परेशानी यह है कि जानते बूझते हुये भी लोग यह जहर खुद अपने आप खरीदते हैं…यह कहना मुशकिल है कि असली अपराधी कौन हैं… सरकार, गुटका बनाने वाले या गुटका खरीदने वाले. लिखते रहिये.

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    जानते बूझते हुये भी लोग यह जहर खुद अपने आप खरीदते हैं,……तो किस तरह ये प्रतिबन्ध पूर्णरूप से लागू होने की उम्मीद की जा सकती है ?प्रतिक्रिया के लिए आभार

akraktale के द्वारा
August 2, 2012

दीप्ति जी सादर नमस्कार, तम्बाकू युक्त गुटखा बंद किये जाने के बाद भी कई प्रश्न मुंह बाएं खड़े हैं. गुटखा स्टोर करना बेचना तो चंद दिनों तक ही चलेगा. किन्तु नकली गुटखा बनाकर इसे फिर लम्बे समय तक ज़िंदा रखा जा सकता है. आपका कहना सच है की प्रतिबन्ध पुरे देश में लागू किया जाना चाहिए किन्तु आज केंद्र और राज्यों की सम्बन्ध इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं. बाजार में पहले एक गुटखा जर्दा युक्त खरीदना पड़ता था अब दो खरीदना पड़ता है एक जर्दे का दूसरा पानमसाले का. हो गया जर्देवाला गुटखा फिर एक नंबर में.

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    इस पाबन्दी के तहत न तो तम्बाकू पर पाबन्दी लगाई गई है न गुटखे पर ,यह पाबन्दी तंबाकूयुक्त गुटखे पर लगाई गई है बाजार में पहले एक गुटखा जर्दा युक्त खरीदना पड़ता था अब दो खरीदना पड़ता है एक जर्दे का दूसरा पानमसाले का. दोनों की बिक्री जारी है फिर ये कैसा प्रतिबन्ध ? केंद्र और राज्यों के बीच सामजस्य की कमी के चलते भी इस पर पूर्ण प्रतिबन्ध लागू नहीं किया जा सकेगा ! सबसे बड़ी बात इसके शौक़ीन लोगो की भी है ……..जिन्हें अपने स्वास्थ्य की चिंता नहीं है

ajaykr के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय दीप्ती जी ,सादर प्रणाम| गुटखा,धूम्रपान करने वालो की समस्या दिनों दिन बढ़ रही हैं,जों की एक राष्ट्रव्यापी समस्या हैं …मुम्बई के टाटा हास्पिटल में सैकडो लोग प्रतिदिन गुटखे खाने के कारण मर रहे हैं |हृदय द्रवित हों जाता हैं |सामूहिक रूप से नशा मुक्ति अभियान चलाने पर कोई परिणाम नही आने पर बड़ी निराशा हुयीं |भिन्न भिन्न तबके के लोगों से बात की डॉ .इंजी.,समाज सुधारक ….सिगरेट ,गुटखा खुद खातें हैं …पर आत्मबल की कमी से छोड़ नही पातें हैं |बहुत ज्वलंत विषय पर आलेख लिखकर आपने इस दिशा में कार्य करने के लिए उत्साहवर्धन किया हैं ,आपका बहुत बहुत आभार |सादर – “जीने की आरजू में , मरने लगा है आदमी अपने ही साए से , डरने लगा है आदमी बारूद के ढेर पे बिछा के बिसात ; चाहत उम्रे -दराज़ की ,करने लगा है आदमी . पसमांदा दिमाग , थका हारा बदन आट्मी ताकात का दम , भरने लगा है आदमी सीने में हसद , दिल में जलन अपनी ही आग में , जलने लगा है आदमी तर्जुमानी न कर सका , वेद -ओ -हदीस की मज़हबी जूनून में , मचलने लगा है आदमी न खौफे -खुदा ,न याद -ए-खुदा “साहिल ” शैतान की खिदमत सिर्फ , करने लगा है आदमी

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    जगह जगह नशामुक्ति केंद्र भी है लेकिन मैंने देखा है जिन्हें उनके परिवार वाले वहां ले जाते है वो अपनी इच्छाशक्ति के अभाव में इलाज को बीच में छोड़कर ….वहा से भाग जाते है ! बहुत ही कम आयु के बच्चे भी इसका उपयोग करते देखे गए है ,स्कूल के बाहर खड़े ठेले भी ये जहर मासूमो को बेचते नज़र आयेंगे जिन पर प्रशासन की नज़र नहीं है ! शैतान की खिदमत सिर्फ , करने लगा है आदमी………. जब तक आम जनता जागरूक नहीं न है ये प्रतिबन्ध लागू हो पाए इसमें संशय है अजय जी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर अभिवादन यदापि मैं भी इसी श्रेणी में हूँ. पर आदरणीय शशि भूषण जी की बात से सहमत. लेख हेतु बधाई.

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम अब तो आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद

shashibhushan1959 के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय दीप्ती जी, सादर ! प्रतिबन्ध लगाने से कुछ नहीं होनेवाला है ! अगर सरकार को वास्तव में जनता के स्वास्थ्य की चिंता है तो इसके निर्माण पर ही प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए ! जो चीज समाज के लिए या स्वास्थ्य के लिए किसी भी दृष्टि कोण से सही नहीं है, उसका निर्माण ही न हो तो फिर सारी समस्या ही ख़त्म ! ये बिक्री पर प्रतिबन्ध वगैरह तो समस्या को और उलझाने के लिए होता है और अधिकारियों की कमाई का जरिया बनता है ! जनता को इससे कोई लाभ नहीं मिलता ! सादर !

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    आदरणीय शशि भूषण सादर प्रणाम सरकार को वास्तव में जनता के स्वास्थ्य की चिंता कम अपने राजस्व की चिंता ज्यादा है !प्रतिबन्ध के मसौदे से तो लगता है ये प्रतिबन्ध केवल सरकार और गुटखे के बड़े खिलाडियों की छोटे विक्रेताओ को मार्केट से गायब करने की मिली भगत है,क्यूंकि ना तो तम्बाकू पर पाबन्दी लगाई गई है न गुटखे पर ,यह पाबन्दी तंबाकूयुक्त गुटखे पर लगाई गई है ,जिसका तरीका लोगो ने भी निकाल लिया है एक जर्दे का दूसरा पानमसाले का.पाउच खरीदा और हो गया जर्देवाला गुटखा! प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, सादर अभिवादन! बजट के समय आपने जो आलेख प्रस्तुत किया था उससे एक बेहतर अर्थशास्त्री लग रही थी. अब हमें लगता है कि आप उससे भी ऊपर हैं! “क्या ये प्रतिबन्ध केवल सरकार और गुटखे के बड़े खिलाडियों की छोटे विक्रेताओ को मार्केट से गायब करने की मिली भगत है ?” हमेशा से यही होता आ रहा है – बड़ी मछलियाँ छोटी मछलियों को खा जाती हैं! मेरे आस पास दोनों तरह के लोग हैं – एक नशा करने वाला (शराब, तम्बाकू, गुठका, सिगरेट आदि का) दुसरे तरह के लोग भी हैं, जो चाय तक नहीं पीते!… मैं चाय का शौक़ीन हूँ, मिठाई का भी, खाने का भी कभी विरोध नहीं करता … अब ब्लोगिंग का नशा भी लग गया है … क्या करूँ? कुछ उपाय हो तो सुझाइए! आपके महत्वपूर्ण आलेख पर अभिनन्दन!

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    आदरणीय जवाहर जी सादर नमस्कार सरकार को वास्तव में जनता के स्वास्थ्य की चिंता कम अपने राजस्व की चिंता ज्यादा है !प्रतिबन्ध के मसौदे से तो लगता है ये प्रतिबन्ध केवल सरकार और गुटखे के बड़े खिलाडियों की छोटे विक्रेताओ को मार्केट से गायब करने की मिली भगत है,क्यूंकि ना तो तम्बाकू पर पाबन्दी लगाई गई है न गुटखे पर ,यह पाबन्दी तंबाकूयुक्त गुटखे पर लगाई गई है ,जैसा अशोक जी ने कहा जिसका तरीका लोगो ने भी निकाल लिया है एक जर्दे का दूसरा पानमसाले का.पाउच खरीदा और हो गया जर्देवाला गुटखा! बस आपका ब्लोगिंग का नशा बरक़रार रहे जिससे लोगो को कुछ कुछ तो नशा हो जो पान मसाले और जर्दे के नशे से बेहतर है प्रतिक्रिया और तारीफ के लिए आपका धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
August 2, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, सादर नमस्कार। बहुत ही सुन्दर संदेश देता हुआ विस्तृत आलेख, बधाई। लेकिन मेरा मानना है  कि केवल प्रतिबंध लगाने से कुछ नहीं होगा। कानून को कड़ाई से लागू करने की इच्छा शक्ति सरकार के पास होनी चाहिये तथा समाज को जागरूप किया जाना अति आवश्यक है। यदि कोई कानून का उलंघन करता हुआ पाया जाये तो उस पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिये। लेकिन साथ ही सरकार को इस व्यवसाय  से जुड़े लोंगो के लिये वैकल्पिक रोजगार की भी व्यवस्था भी करनी चाहिये।

    D33P के द्वारा
    August 7, 2012

    सही कहा किसी भी प्रतिबन्ध को लागू करने के लिए सरकार के पास इच्छा शक्ति होनी चाहिए ,पर अगर सरकार को अपने राजस्व की चिंता न होती तो इनका उत्पादन ही क्यों होता ?प्रतिक्रिया के लिए आभार


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