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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
September 18, 2012

जैसी कि मानव ने ईश्वर की कल्पना की है, वैसी ही आपने इस तरह के दोस्त की कल्पना की है। क्या ऐसा  दोस्त भी मिल सकता है आज के अर्थयुग स्वार्थी संसार में। आदरणीय दीप्ति जी, सुन्दर कल्पना….लेकिन मैंने तो इसे साकार होते  नही देखा। आपके लिये शुभकामनायें कि आपको ऐसे दोस्त मिलें। 

    D33P के द्वारा
    September 18, 2012

    नमस्कार दिनेश जी ,आपकी बात सही है आज के समय को देखते हुए शायद ऐसे दोस्त की कल्पना हर एक के लिए आसान नही पर मेरी खुशकिस्मती है कि मुझे ऐसे दोस्त हासिल है .काश सभी को ऐसे ही दोस्त मिले !!!

vijay के द्वारा
September 7, 2012

दीप्ती जी नमस्कार ,काश ऐसा कोई दोस्त मुझे मिल पाए जैसा आपने वर्णित किया है आपकी कविता के साथ आपकी प्रस्तुति का तरीका देखकर लगता है हम तो अब भी ब्लैक न व्हाइट् में जी रहे है जबकि आपके घर में कलर टीवी आ गया हो , कविता बेहद खूबसूरत है , बधाई

    D33P के द्वारा
    September 8, 2012

    विजय जी नमस्कार पोस्ट पसंद करने और मेरे रंगीन टीवी पर आपकी रंगीन प्रतिक्रिया के लिए आभार

nishamittal के द्वारा
September 5, 2012

दीप्ति जी आपकी इस पोस्ट पर कमेन्ट मैंने दिया था परन्तु न जाने क्यों पोस्ट पर दिख नहीं रहा है,स्पेम में है या कुछ तकनीकी कमी रही है ये मैं नहीं जानती परन्तु आपकी इतनी सुन्दर प्रस्तुति और खूबसूरत रचना के लिए प्रशंसा करना मेरे लिए संभव नहीं है क्योंकि इस विधा में शून्य हूँ. हाँ आज शिक्षक दिवस पर थोडा बहुत मार्ग दर्शन करने के लिए तो कह ही सकती हूँ आपसे कम्प्यूटर से सम्बन्धित कुछ ज्ञान हमें भी प्रदान करने का कष्ट करें धन्यवाद अग्रिम

    D33P के द्वारा
    September 6, 2012

    निशा जी सादर नमस्कार …कभी कभी तकनीकी कारणों से कमेन्ट पोस्ट नहीं हो पाते !आपका मेरी पोस्ट तक आना ही प्रशंसा से कम नहीं है मेरे लिए !आपकी लेखनी की मै कायल हूँ !आपसे तो मुझे बहुत सीखना है ,बस आपके आश्रीवाद की दरकार है !आभार

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 1, 2012

दीप्ति जी, मित्र की सही परिभाषा दी है आपने..सादर धन्यवाद.

    D33P के द्वारा
    September 1, 2012

    हिमांशु जी नमस्कार आपका मेरे पेज पर स्वागत है ,आप यहाँ तक आये और प्रतिक्रिया दी उसके लिए आभार

yogi sarswat के द्वारा
August 31, 2012

दीप्ति जी , अगर मैं गलत नहीं हूँ तो आप शायद computer professional हैं ! आप पोस्ट इतना रंगीन है की पढने वाला पहले कुछ देर आपके पेज को देखता रहेगा ! गज़ब का पेज डिजाईन किया है आपने ! शब्द आपने जो लिखे हैं , एक दूसरे के लिए समर्पण का भाव दिखाते हैं ! बहुत खूब ! लेकिन आज आपके शब्दों से ज्यादा आपके पेज की तारीफ करने दीजिये ( क्षमा करें )

    D33P के द्वारा
    August 31, 2012

    नमस्कार योगी जी ,पहले तो मुझे आपकी प्रतिक्रिया की तारीफ करने दीजिये आपने इतने खूबसूरत अंदाज़ में तारीफ की है ..कि क्या कहू ……….?बस इतना ही कि मै आपकी आभारी हु !शायद आपने मेरी पिछली पोस्ट नहीं देखी मैंने उसमे लिखा था कि यही मेरा कार्यक्षेत्र है !

    D33P के द्वारा
    August 31, 2012

    अजय जी नमस्कार आपकी प्रतिक्रियात्मक चंद पंक्तिया पुरुस्कार से कम नहीं !प्रतिक्रिया देने और फेसबुक पर सकारात्मक पृष्ठ “अवचेतन मन ” पर निमंत्रण के लिए आभार

अन्जानी- अनिल के द्वारा
August 29, 2012

सादर प्रणाम! सबसे पहिले तो मैं इस बात की माफी चाहता हूँ कि मैं आपको हमउम्र समझ रहा था और काफी कुछ नसीहतें भूतपूर्व में आपको दे चूका …………..वो तो फेसबुक पर पता चला कि आप तो मुझसे काफी बड़ी है………….वैसे आप भी कम दोषी नहीं……………..अपनी असली तस्वीर लगानी चाहिए……….वैसे शायद पहली बार किसी उम्र पहचानने में धोखा खाया हूँ………………आसमान के तारों की चाह नहीं मुझको……..बहुत खूब……………………बस और सिर्फ बस उसके बाँहों में ………………आखिरी आह हो////////………!

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    अनिल जी ..नमस्कार माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं है ,नसीहते बुरी नहीं होती उनमे अच्छाई ही होती है और फिर हर एक इंसान दुसरे को नसीहते देने लायक नहीं होता ,मुझे ख़ुशी है किआप नसीहत देने का हौसला और काबिलियत रखते है ! बात जहा तक मेरी फोटो की है ये फोटो भी मेरी है और facebook पर भी मेरी ही फोटो है !facebook वाली फोटो पिछले माह ,जब हम दुबई घूमने गए थे ,वहा ली थी और यहाँ पर जो फोटो है वो एक साल पहले की है (शायद पिछले जनम की लग गई )हां मै आपसे बहुत बड़ी हूँ आपकी उम्र का तो मेरा पोता है जिसकी अभी पिछले साल ही शादी हुई है और आपकी तो अभी शादी भी नहीं हुई !फिर भी कोई बात नहीं आप अपनी नसीहते चालू रखिये और धोखा खाने से बचिए ! आप मेरी पोस्ट पर आये और आपने प्रतिक्रिया दी उसके लिए मै आपकी आभारी हु और आगे भी अपनी हर पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया की अभिलाषी भी !

mparveen के द्वारा
August 29, 2012

deepti ji superb !! :) congrates…

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    परवीन जी ..नमस्कार आपने प्रतिक्रिया दी उसके लिए मै आपकी आभारी हु और आगे भी अपना सहयोग बनाये रखियेगा

R K KHURANA के द्वारा
August 28, 2012

प्रिय दीप्ती जी, बहुत ही सुंदर रचना ! बधाई राम कृष्ण खुराना

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    .नमस्कार खुराना जी रचना को पसंद करने और प्रतिक्रिया के लिए आभार

rekhafbd के द्वारा
August 28, 2012

दीप्ति जी ,बहुत ही किस्मत वालों को सच्चे दोस्त मिलते है ,दोस्त के प्रति अति सुंदर अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    .नमस्कार रेखा जी सही कहा आपने अच्छे दोस्त किस्मत वालो को ही मिलते है वो भी आज के दौर में .. प्रतिक्रिया के लिए आभार

Chandan rai के द्वारा
August 28, 2012

दीप्ती जी , एक बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक अभिनन्दन स्वीकारें आपकी सुन्दर प्रस्तुतीकरण आपकी विशेषता है

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    चन्दन जी सादर नमस्कार आपके शब्दों की खुशबू मेरे ब्लॉग पर छा गई !आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
August 28, 2012

दीप्ति जी, आमीन, अहसासों से सजी रचना के लिये बधाई…. हमारी दुआ है कि आपको ऐसे बहुत से दोस्त मिलें.

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    मोहिंदर जी नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए आभार

phoolsingh के द्वारा
August 28, 2012

दीप्ती जी नमस्कार बहुत ही सुंदर ………….रचना फूल सिंह

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    फूलसिंह जी नमस्कार ,हमारे पेज पर आपका स्वागत है ! रचना पसंद करने और प्रतिक्रिया के लिए आभार

dineshaastik के द्वारा
August 28, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, आपने जिस दोस्त की कल्पना की है उसके सारे गुण तो  खुदा से मिलते हैं। इस आधार पर तो यही कहा जा सकता है कि सच्चा दोस्त ही खुदा होता है।

    अन्जानी- अनिल के द्वारा
    August 28, 2012

    दिनेश भैया………………….आप तो बिलकुल ही कन्फ्यूज व्यक्ति है………कभी कहते हैं कि खुदा नहीं है……………..और अभी कहते हैं कि…………………….हाँ…..हाँ..हाँ………..

    dineshaastik के द्वारा
    August 28, 2012

    प्रिय अनिल जी, मेरा विरोध उस खुदा से है जो वास्तव में नहीं है। उस धर्म से है जिसने संसार में सबसे अधिक अधर्म फैलाया है। मैं भी खुदा को मानता हूँ, लेकिन विचारों के रूप में। मैं भी धर्म  मैं आस्था रखता हूँ लेकिन केवल मानवीय। आप शब्दों को नहीं भावों को पकड़ने का प्रयास करिये। हमारे साथ केवल भाव रहेंगे। शब्द तो स्थिर हैं। हम जहाँ रख देंगे वहीं बने रहेंगे।

    D33P के द्वारा
    September 4, 2012

    दिनेश जी नमस्कार सच कहा आपने सच्चा दोस्त अगर आज के समय में किसी को हासिल है तो वो खुदा समान ही है ,आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 27, 2012

बहुत ही अछे दोस्त को पाने की कल्पना. आमीन. बहुत दिनों से ऐसी शानदार रचना की प्रतीक्षा थी. बधाई एवं धन्यवाद. आदरणीया दीप्ती जी, सादर

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम आपके आश्रीवाद की दरकार हमेशा रहेगी ! रचना पसंद करने और प्रतिक्रिया के लिए आभार

manoranjanthakur के द्वारा
August 27, 2012

कितना मुश्किल है आज एक मुक्मल दोस्त की तलाश चकमक दृश्य के साथ खुबसुरत कविता बधाई

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    मनोरंजन जी नमस्कार “दोस्त तो बहुत मिल जायेंगे जिन्दगी की राहों में बस असर ही कुछ कम हो चला है हमारी दुआओं में !!” प्रतिक्रिया के लिए आभार

vikramjitsingh के द्वारा
August 27, 2012

आदरणीया दीप्ति जी…..सादर….. दो शब्द आपकी रचना के नाम……. ”फिराक-ए-प्यार जो गम मिलेंगे……..वो मेरे हौंसलों से कम मिलेंगे…. जहाँ दुनिया निगाहें फेर लेगी……वहां ए दोस्त….तुझको हम मिलेंगे….”

    vikramjitsingh के द्वारा
    August 27, 2012

    ”फिराक-ए-प्यार में जो गम मिलेंगे……..वो मेरे हौंसलों से कम मिलेंगे…. जहाँ दुनिया निगाहें फेर लेगी……वहां ए दोस्त….,,,,तुझको हम मिलेंगे….”

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    विक्रम जी नमस्कार सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Rahul Nigam के द्वारा
August 27, 2012

सिर्फ उम्मीद क्यों? ‘आजमाना नहीं दोस्त…….. तो फिर आप क्यों आजमा रही है? इश्क देने की चीज़ है मांगने की नहीं. उम्मीदों के लिए सुन्दर भाव. कुछ इश्क/प्यार/स्नेह/म्हब्ब्ब्त देने के लिए लिखिए इसी की कमी है दुनिया में. मांग तो सभी रहे है इस दुनिया में. शुभकामनाये.

    D33P के द्वारा
    August 30, 2012

    राहुल जी नमस्कार ,हमारे पेज पर आपका प्रथम स्वागत है यहाँ बात इश्क की नहीं दोस्ती की है ,बहुत अंतर है इन दोनों में ! दोस्ती का वादा माँगा जा सकता है ,दिया जा सकता है पर इश्क ..उफ्फ्फ , इश्क और स्नेह में भी बहुत फर्क है !आपने सही कहा मांग तो सभी रहे है दुनिया में. पर देने को कोई तैयार नहीं प्रतिक्रिया के लिए आभार

    Rahul Nigam के द्वारा
    September 13, 2012

    दीप्ति जी, धन्यवाद प्रतिउत्तर के लिए. आपका स्वागत करना चाहूँगा http://rahulnigam.jagranjunction.com/2012/09/09/फलसफा-महब्बत-का/ पर.

jlsingh के द्वारा
August 27, 2012

सिर्फ तारों की चाहत नहीं है मुझे, मोर पंखों की चाहत नहीं है मुझे. आसमां जिसमे सूरज और चंदा भी हो, थोड़े बादल मगर कोई गन्दा न हो. दीप्त तारें अगर झिलमिलाये कभी. रोशनी पर जमीं पर मंदा न हो! दीप्ति जी, नमस्कार! शनि, रवि मंगलमय दिख गया. प्रसन्नता के सारे छाप छोड़ गया! अब सोम के बाद का दिन भी मंगलमय हो! आपकी प्रस्तुति बहुत ही खूबसूरत लगी, इसीलिये हमने कुछ कसीदे गढ़ दिए! पुन: बधाई!

    D33P के द्वारा
    August 27, 2012

    शुभ प्रभात जवाहर जी …..आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया ने तो हमारा सोम भी मंगल जैसा कर दिया ,कल वैसे ही मंगल है , आपकी पसंदगी के लिए आभार

akraktale के द्वारा
August 26, 2012

सच है दोस्त हमदर्द हो खुदगर्ज नहि. सुन्दर कविता. बधाई दीप्ति जी.

    D33P के द्वारा
    August 26, 2012

    नमस्कार अशोक जी ……..सही कहा सच्चा दोस्त ही जिन्दगी के लिए अनमोल है !आपकी प्रतिक्रिया भी मेरे लिए सदा की तरह अनमोल है ,आभार


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