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कोई हिसाब नहीं

Posted On: 1 Oct, 2012 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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किसी की मोहब्बत में हमने चाहा था जीना
कोई हमारी चाहत में मर जाना चाहता है
कसमो से दूर हुआ, रस्मो को भूल जाना चाहता है
कैसे कह दू हमें भी तुमसे मोहब्बत है पर
ये जमाना रास्ते में आना चाहता है
बेवफा मै नहीं सनम पर तेरी वफ़ा के लायक नहीं
बहुत प्यार है तुमसे पर मै तेरी चाहत नहीं
जंजीरों के जाल  बहुत  बुने  है
दुनिया से सवाल बहुत सुने है
मौत जिन्दगी का जवाब नहीं
प्यार का ख्वाब ही

किसी की मोहब्बत में हमने चाहा था जीना

कोई हमारी चाहत में मर जाना चाहता है

कसमो से दूर हुआ,

रस्मो को भूल जाना चाहता है

कैसे कह दू हमें भी तुमसे मोहब्बत है

पर ये जमाना रास्ते में आना चाहता है

बेवफा मै नहीं सनम पर तेरी वफ़ा के लायक नहीं

बहुत प्यार है तुमसे पर मै तेरी चाहत नहीं

जंजीरों के जाल  बहुत  बुने  है

दुनिया से सवाल बहुत सुने है

मौत जिन्दगी का जवाब नहीं

प्यार कैसे करे उसका कोई हिसाब नहीं

alone

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sudhajaiswal के द्वारा
October 14, 2012

दीप्ति जी, सुन्दर रचना, सुन्दर भाव, हार्दिक बधाई!

    D33P के द्वारा
    October 14, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
October 13, 2012

jajeeron ke jal bahut bune hain , duniya se sawal bahut sune hain ! maut zindagee ka jawab naheen , pyaar kaise kare uska koi hisab naheen !!…..chhotee par bahut hee gambheer rachna ! deepti jee, badhaai !1

    D33P के द्वारा
    October 14, 2012

    विजय जी आपका स्वागत है .प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार

yamunapathak के द्वारा
October 10, 2012

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

    D33P के द्वारा
    October 13, 2012

    नमस्ते यमुना जी प्रतिक्रिया के लिए आभार

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
October 7, 2012

जंजीरों के जाल बहुत बुने है दुनिया से सवाल बहुत सुने है मौत जिन्दगी का जवाब नहीं प्यार कैसे करे उसका कोई हिसाब नहीं दीप्ति जी, बेहद सुंदर पंक्तियां,…. बधाई

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    रचना पसंद करने और प्रतिक्रिया के आभार …….सहयोग की अपेक्षा बनी रहेगी

Alka के द्वारा
October 7, 2012

दीप्ती जी बहुत खूब |आपने बहुत अच्छे से भावनाओ को शब्दों में ढला है|

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    अलका जी रचना पसंद करने के लिए बहुत बहुत आभार

seemakanwal के द्वारा
October 6, 2012

पर ये जमाना रास्ते में आना चाहता है बेवफा मै नहीं सनम पर तेरी वफ़ा के लायक नहीं बहुत प्यार है तुमसे पर मै तेरी चाहत नहीं जंजीरों के जाल बहुत बुने है बहुत खूब

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    आपके सहयोग और प्रतिक्रिया के लिए आभार ,

vijay के द्वारा
October 6, 2012

आदरणीय दीप्ती जी नमस्कार , कभी ख़ुशीसे ख़ुशी कि तरफ नहीं देखा एक तेरे सिवा फिर किसी कि तरफ नहीं देखा आयने को देखा तो आएने पर झुन्जलाया , किसी ने अपनी कमी कि तरफ नहीं देखा और बीच रहा में ये कैसे बदल मोसम  के फिर किसी ने किसी कि तरफ नहीं देखा संवेदनाओं से भरी खुबसूरत कविता के लिए बधाई

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    अब कहाँ वो खुशिया जिनका उसे इंतज़ार है दिल तो किसी की मोहब्बत में अब तक बेक़रार है विजय जी आपके सहयोग और प्रतिक्रिया के लिए आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
October 5, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, सादर ! प्यार भरे मन की कोमल भावनाएं, जमाने की बंदिशों और शिकायतों के साथ हर पंक्ति में जीवंत हो उठी है ! बहुत खूब !

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी नमस्कार “मोहब्बत का एक कदम ज़माने की सौ बंदिशे महबूब की एक मुस्कान नज़र की हजार शिकायते ,”, प्रतिक्रिया के लिए आभार

jlsingh के द्वारा
October 4, 2012

मौत जिन्दगी का जवाब नहीं प्यार कैसे करे उसका कोई हिसाब नहीं आदरणीय दीप्ति जी, सादर अभिवादन! आपका भी कोई जवाब नहीं!

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    आदरणीय जवाहर जी नमस्कार खूबसूरत और उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आभार

jalaluddinkhan के द्वारा
October 4, 2012

मैं खुद उलझन में था.आपकी कविता ने और उलझा दिया.काश कुछ सुलझा-सुलझा होता. लेकिन है बेहतरीन.कविता के शब्द कुछ न कहने का प्रयत्न भी कर रहे हैं और बहुत कुछ कह भी रहे हैं.अच्छी रचना.बधाई.

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    कुछ कहाँ भी नहीं कुछ सुना भी नहीं वो उलझ गए मोहब्बत की गणित में .. कब सुलझे है हंसी ख्वाब के सवाल जितने बुने उतने उलझते चले गए    Jalaluddinkhan ji स्वागत के साथ प्रतिक्रिया के लिए आभार

manoranjanthakur के द्वारा
October 4, 2012

हम तुम जहा थे जिस मोड़ पर आज भी बही खड़े है ……. फासले को भूल कर बफा करेंगे निभाएँगे बात मानेंगे … कोई हिसाब न रखेंगे ….. दीप्ती जी अगर मुझसे कोई भूल हो गई हो …. कोई हिसाब न रखेंगे …. बहुत बहुत बधाई

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    मनोरजन जी नमस्ते , हम तो वैसे ही गणित में कमजोर है ,हमें हिसाब रखना नहीं आता …लाचारी है …… खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए आभार

akraktale के द्वारा
October 4, 2012

कैसे कह दू हमें भी तुमसे मोहब्बत है पर ये जमाना रास्ते में आना चाहता है सुन्दर रचना बधाई स्वीकारें.

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    अशोक जी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 3, 2012

आदरणीया दीप्ती जी सादर अभी वादन कोई हमारी चाहत में मर जाना चाहता है बहुत प्यार है तुमसे पर मै तेरी चाहत नहीं एक तरफ कोई चाहत में मर जाना चाहता है दूसरी तरफ वो उसकी पसंद नहीं. बहुत सुन्दर. काफी दिनों बाद. बधाई.

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    प्रणाम जी हौसला अफजाई के लिए आभार

Malik Parveen के द्वारा
October 3, 2012

दीप्ति जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ … बधाई …

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    परवीन जी नमस्ते , प्रतिक्रिया के लिए आभार

nishamittal के द्वारा
October 3, 2012

सुन्दर पंक्तियाँ दीप्ति जी जंजीरों के जाल बहुत बुने है दुनिया से सवाल बहुत सुने है मौत जिन्दगी का जवाब नहीं प्यार कैसे करे उसका कोई हिसाब नहीं

    D33P के द्वारा
    October 7, 2012

    निशा जी नमस्ते , प्रतिक्रिया के लिए आभार


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