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एफ.डी.आई.

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आजादी देश को मिली है या कांग्रेस को ?
किसी भी देश पर शासन करना हो तो इसको पहले आर्थिक तरीके गुलाम बनाया जाता हे.पहले की तरह ये देश पर शासन नहीं कर सकते तो अब इन्होने ये रास्ता अपनाया हे देश को आर्थिक गुलाम बनाने का.आखिर आज़ादी के ६० साल के बाद भी देश का इतना विकास नहीं कर पाए की हमे आज भी विदेशी रुपयों की जरुरत पड़ रही हे .सरकार देश के हितों को दरकिनार कर भारत को आर्थिक गुलामी की ओर धकेल रही है! देश में महंगाई चरम पर है। उघोग विकास दर ठहरी हुई है। विनिवेश रुका हुआ है ।राजस्व का जुगाड़ जितना होना चाहिये वह हो नहीं पा रहा है देश की सबसे बड़ी समस्या गरीबी या धन की कमी नहीं भ्रष्टाचार है ! 75 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। और इसी बीपीएल के नाम पर जारी होने वाले 30 हजार करोड़ के अन्न को भी बीच में लूट लिया जाता है। और यह लूट अपने ही देश के नेता,नौकरशाह और राशन दुकानदार करते हैं। फिर विदेशी कंपनिया आयेगी तो क्या करेंगी। यह अगर सरकार नहीं जानती तो वाकई आजादी देश को नहीं सत्ताधारियो को मिली है।

हर छोटा व्यवसायी अपने व्यवसाय को बड़ा करने का सपना देखता है जिससे ज्यादा मुनाफा कमाकर अपना जीवन स्तर सुधार सके चाहे छोटा व्यवसाय हो पर वो उसका मालिक होता है लेकिन सरकार के विदेशी निवेश को अनुमति के निर्णय से ये सभी मालिक नौकर हो जायेंगे जो छोटा मुनाफा भी इनकी जेब में आता था वो विदेशी कम्पनियां  अपनी जेब में डालेंगी और सबसे बड़ी बात ये पैसा देश में भी नहीं रहेगा देश से बाहर जाने का लाइसेंस देकर सरकार देश को दुबारा गुलामी की दलदल में धकेल रही है

किसी भी देश पर शासन करना हो तो इसको पहले आर्थिक तरीके गुलाम बनाया जाता हे.पहले की तरह ये विदेशी देश पर शासन नहीं कर सकते तो अब इन्होने ये रास्ता अपनाया हे देश को आर्थिक गुलाम बनाने का.आखिर आज़ादी के ६० साल के बाद भी देश का इतना विकास नहीं कर पाए की हमे आज भी विदेशी रुपयों की जरुरत पड़ रही हे .सरकार देश के हितों को दरकिनार कर भारत को आर्थिक गुलामी की ओर धकेल रही है! देश में महंगाई चरम पर है। उघोग विकास दर ठहरी हुई है। विनिवेश रुका हुआ है ।राजस्व का जुगाड़ जितना होना चाहिये वह हो नहीं पा रहा है देश की सबसे बड़ी समस्या गरीबी या धन की कमी नहीं भ्रष्टाचार है ! 75 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। और इसी बीपीएल के नाम पर जारी होने वाले 30 हजार करोड़ के अन्न को भी बीच में लूट लिया जाता है। और यह लूट अपने ही देश के नेता,नौकरशाह और राशन दुकानदार करते हैं। फिर विदेशी कंपनिया आयेगी तो क्या करेंगी। यह अगर सरकार नहीं जानती तो वाकई आजादी देश को नहीं सत्ताधारियो को मिली है।

Texan-accidentally-fires-shot-at-Walmartकुछ भी चाहे कैसे भी हालत रहे हो कम से कम  देश का पैसा देश में ही रह जाता था लेकिन यहाँ तो देश का पैसा भर भर कर बाहर ले जाने का लाइसेंस जारी हो रहा  है यदि इन विदेशी कम्पनियों को लूट का लाइसैंस मिलेगा तभी देश के बिचौलिए नेताओं को अधिकतम दलाली भी मिलेगी। यही कारण है कि वालमार्ट जैसी विश्व की ख्यातिप्राप्त रिटेल कम्पनी ने भारत में खुदरा बाजार में निवेश के निर्णय को लागू करवाने के लिए करोडो रुपए खर्च किए!तो ये करोडो रुपये किसको दिए गए ?भारत में पिछले दो सालों से जब लगातार खाद्य पदार्थों के दाम बढाये जा रहे थे क्या ये भी एक साजिश  थी?अब हर विरोध को दरकिनार कर सरकार ने खुदरा बाजार में विदेशी निवेश का निर्णय लागू कर दिया।अमरीका की यह कम्पनी भारत में किसानों और कर्मचारियों के शोषण के साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आड में देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को चौपट करने का काम करेगी। इस कम्पनी का मुख्य ध्येय ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना है। क्या वालमार्ट कम्पनी ने अपने स्टोर खोलने और मल्टी ब्रांड खुदरा निवेश में 51 फीसदी और एकल ब्रांड में 100 फीसदी प्रत्यक्ष की अनुमति के लिए भारत में स्थानीय अधिकारियों को रिश्वत दी ?जिससे उनके लिए कार्य आसान हो सके  ,थोड़े खर्चे में जयादा कमाई की राह खुल सके !

1120_walmart_630x420पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा कि देश में वालमार्ट की जरूरत नहीं है और एफडीआई रिटेल के मामले में देश को गुमराह करने की कोशिश हो रही है वालमार्ट स्टोर के बारे में जानकारी के मुताबिक जहा जहा ये स्टोर होता हे वो पहले  अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को ख़तम करता हे.

वालमार्ट ज़्यादातर चीज़े चाइना से इम्पोर्ट करता हे और सभी को मालूम हे चाइना की चीज़े केसी होती हे.घटिया किस्म की चीज़े बेच के मुनाफा अपने देश में ले जाना चाहते हे.और भारत के करोडो लोगो को बेरोजगार और दरिद्र बनाना चाहते हे इसमें केंद्र सरकार पूरी तरह अमेरिका को सहयोग कर रही हे.!!

क्या देसी बाजार पर कब्जा करने के बाद बहुराष्ट्रीय़ कंपनिया उन्हीं माल का उत्पादन किसान से नहीं चाहेगी जिससे उसे मुनाफा हो। ये कम्पनियाँ करोडो खर्च कर भारत में अपना विस्तार करेंगी तो क्या वो भारत में दान खाता खोलने आ  रही है या मुनाफा कमाने ? या फिर सरकार यह भी समझ पाती कि जब मुनाफा ही पूरी दुनिया में बाजार व्यवस्था का मंत्र है तो दुनिया के जिस देश या बाजार से माल सस्ता मिलेगा वहीं से माल खरीद कर भारत में भी बेचा जायेगा।

छोटे और मझोले व्यापारियों से लेकर किसान और परचून की दुकान चलाने वालो को अगर विदेशी कंपनियों के हवाले करने की सोच को सरकार सही कह रही है तो क्या सरकार वाकई मुनाफा बनाती कंपनियों के उस चक्र को नहीं समझती है जिसमें पहले खुद पर निर्भर करना और बाद में निर्भरता के आसरे गुलाम बनाना होता है सरकार ने अमेरिका की चमचागिरी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की स्वामीभक्ति की अनूठी मिसाल पेश करने में कोई परहेज़ नहीं की है

युवक कांग्रेस के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि रिटेल सेक्टर में एफडीआई का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया है. उन्होंने एफडीआई के फैसले को देशहित में बताते हुए कहा कि इससे किसानों को उचित दाम मिलेंगे.इससे छोटे-बड़े कारोबारियों को भी फायदा होगा और रोजगार भी बढ़ेगा.!खुदरा में एफडीआई के पक्ष में कांग्रेस नेताओं का यह तर्क भी निराधार साबित हो रहा है कि वालमार्ट जैसी कम्पनियों के आने से रोजगार बढेगा और उपभोक्ताओं को सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि खुद अमरीका में सौ से ज्यादा स्टोरों के बाहर वालमार्ट के कर्मचारी सामान्य सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

खुदरा बाजार में एफडीआई की मंजूदी देकर सरकार ने छोटे-मझोले व्यापारियों, किसानों, दुकानदारों, फेरीवालों और खुदरा व्यापार से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े और रोजी-रोटी कमाने वाले करोड़ों लोगों के पेट पर सीधे लात मारने का मसौदा तैयार  किया है. गौरतलब है कि देश का रिटेल सेक्टर में 90 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी छोटे दुकानदारों की है.ऐसा ही खेल नासिक में करीब 60 हजार अंगूर उगाने वाले किसानों को वाइन के लिये अंगूर उगाने के बदले तिगुना मुनाफा देने का खेल संयोग से 2004 में ही शुरु हुआ। और 2007-08 में वाइन कंपनियों को खुद को घाटे में बताकर किसानों से अंगूर लेना ही बंद कर दिया।

किसानों के सामने संकट आया क्योंकि जमीन दुबारा बाजार में बेचे जाने वाले अंगूर को उगा नहीं सकती थीं और वाइन वाले अंगूर का कोई खरीददार नहीं था। तो जमीन ही वाइन मालिकों को बेचनी पड़ी। अब वहां अपनी ही जमीन पर किसान मजदूर बन कर वाइन के लिये अंगूर की खेती करता है और वाइन इंडस्ट्री मुनाफे में चल रही है। क्या हमारे देश की सरकार ऐसे  हालत देखकर भी सबक नहीं लेती  या इन्हें किसी दर्द से कोई मतलब नहीं है !

वाणिज्य मंत्री द्वारा यह कहना कि वालमार्ट को 30 प्रतिशत खरीद स्थानीय बाजार से करनी होगी, वालमार्ट तथा अन्यों द्वारा अपनाई जा रही वास्तविक नीतियों को देखते हुए असम्भव है। यह वैश्विक स्तर पर सर्वविदित है कि वालमार्ट में 90 प्रतिशत उत्पाद चीन से मंगवाए जाते हैं।चीन के सामान से देश के बाजार पट जाने का खतरा इसलिए मंडरा रहा है क्योंकि वालमार्ट जैसी रिटेल कंपनियां वहीं माल बनवाती हैं। वहां कड़े श्रम कानून नहीं हैं और बेहद सस्ते में माल बन जाता है। और उसकी सस्ते मॉल को महंगे दामों में बेच कर लाभ कमाया जायेगा ! सस्ती आयातित चीनी वस्तुएं भारत के स्थानीय उद्योग को तबाह कर देंगी

पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर तथा गांधीवादी अर्थशास्त्री प्रो.जय नारायण शर्मा तथा अर्थशास्त्री एवं गांधीवादी डा. अनिल अरोडा ने कहा कि अमेरिका, यूरोप और चीन की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है और वे जानते हैं कि इस हालात में भारत उनके लिए बडा बाजार है।

खुदरा बाजार में विदेशी निवेश और वालमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों की बडी दुकानें खुलने से निश्चित तौर पर कुछ समय के लिए किसानों और आम आदमी को लाभ होगा लेकिन दीर्घकाल में ये बड़ी कंपनियां शहरों तक सीमित नहीं रहेंगी तब छोटे दुकानदारों को सडक पर आना पडेगा।खुदरा बाजार में संगठित वर्ग और विदेशी कंपनियों के निवेश की अनुमति से छोटे स्तर के व्यवसायी बुरी तरह प्रभावित होंगे और उनके लिए बाजार में अपना अस्तित्व कायम रख पाना कठिन होगा.

सरकार के इस फैसले के साथ एक सवाल उभरता है कि उन करोड़ों खुदरा व्यापारियों का क्या होगा जो अपनी छोटी-छोटी पूंजी के साथ किराना का व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहें है.प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी एफडीआई के फायदे गिनाते हुए कहा कि मैं इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हूं कि एफडीआई से हमारे देश किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा होगा। शायद वो भूल गए  जब करीब डेढ़ दशक पहले की पंजाब की उस घटना की चर्चा जरूरी है जब पंजाब सरकार ने एक विदेशी कंपनी से समझौते के बाद राज्य के किसानों को टमाटर बोने के लिए प्रोत्साहित किया था. उस समय कंपनी ने वादा किया था कि वह किसानों से उचित मूल्य पर टमाटर खऱीदेगी और अपनी प्रोसेसिंग यूनिट में उससे केचप और दूसरी चीजें तैयार करेगी, लेकिन जब टमाटर का रिकार्ड उत्पादन होने लगा तो कंपनी तीस पैसे प्रति किलो की दर से टमाटर मांगने लगी. जिससे क्रुद्ध होकर किसानों ने कंपनी को टमाटर बेचने की बजाय सड़कों पर ही फैला दिए थे

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किसानों और उपभोक्ताओं को फायदा होने का तर्क देने वाले भूल जाते हैं कि देश में जिन करोड़ों लोगों की जीविका गली-मुहल्ले में रेहड़ी-पटरी लगाकर सब्जी-भाजी बेचकर चलती है या गली के मुहाने की दुकान के सहारे रोजी-रोटी चल रही है, रिटेल चेन बढ़ने के बाद उन ४.५ से ५ करोड लोगों का क्या होगा.सरकार के इस फैसले के साथ एक सवाल उभरता है कि उन करोड़ों खुदरा व्यापारियों का क्या होगा जो अपनी छोटी-छोटी पूंजी के साथ किराना का व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहें है

देश में वर्तमान में थोक व्यापार में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत है वहीं सिंगल ब्रांड रिटेलिंग में 51 फीसदी एफडीआई की अनुमति है

सरकार ने खुदरा बाजार में एफडीआई को मंजूदी दे दी है आने वाले दिनों में वालमार्ट, टेस्को, केयर फोर, मेट्रो एजी और शक्चार्ज अंतर्नेमेंस जैसी तमाम बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने मेगा स्टोर खोल सकेंगी.!

फिर रिटेल क्षेत्र कृषि के बाद अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है. जीडीपी में भले ही खुदरा व्यापार का योगदान लगभग आठ फीसदी के आसपास है लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि इसमें कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है.एक उदहारण -कारपोरेट जगत के पेप्सी तथा कोकाकोला जैसी बडी दुकानों ने देश के स्थानीय बाजार से स्थानीय ब्रांड के शीतल पेय गायब कर दिए। कोला तथा पेप्सी आज दूरदराज इलाकों में भी उपलब्ध हैं जहां पानी भले ही नहीं मिले लेकिन यह पेय पदार्थ जररी मिलेंगे। इन्होंने छोटे पेय निर्माताओं को बाजार से उड़़ा दिया।

वालमार्ट आज बाहर आउटलेट खोलने की बात करती है और भविष्य में ये कंपनियां देश के हर कोने में छा जायेंगी।आज अगर बाहर आउटलेट खोले जाते है तो क्या लोगो को लम्बी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी सरकार उन्हें आउटलेट खोलने की जगह भी उपलब्ध कराएगी वो कहा कराएगी ?

प्रधानमंत्री ने फौरी राहत देने तक ही सोचा है लेकिन कल ये कारपोरेट कंपनियां सरकार से पैसे के दम पर एफडीआई के नियमों में बदलाव करा सकती हैं।

वर्तमान परिस्थितियों में विदेशी निवेश आवश्यक है परन्तु राष्ट्रीय हित का विचार करके यह निर्णय करना होगा कि किस क्षेत्र में कितना और किस तरह विदेशी निवेश किया जाए!भारत में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेश लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। सेवा क्षेत्र (व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, वित्त, बीमा, रियल एस्टेट आदि), कम्प्यूटर क्षेत्र, निर्माण, दूरसंचार, आटो मोबाइल, ऊर्जा क्षेत्र और खनन ऐसे क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेश देश के लिए फायदेमंद साबित होगा। भारत का हवाई क्षेत्र सिसक रहा है। हवाई क्षेत्र में अधिक निवेश चाहिए। हवाई क्षेत्र में अधिक निवेश का निर्णय सरकार क्यों नहीं ले रही। भारत इस वर्ष 2,00,000 मैगावाट ऊर्जा उत्पादित करना चाहता है। यह भी विदेशी निवेश से ही संभव होगा। लौह-अयस्क विदेशों में जाता है और स्टील बनकर भारत में वापस आता है।

हमारे पास उच्च टैक्नोलॉजी नहीं है, इस क्षेत्र में भी निवेश की अति आवश्यकता है। सुरक्षा के क्षेत्र में हम प्रति वर्ष अरबों रुपए के शस्त्र विदेशों से खरीदते हैं। बहुत-सी भारतीय कम्पनियां भारत में ही शस्त्र बनाती हैं। देश के विकास के लिए ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेश लाभदायक सिद्ध हो सकता है और नि:संदेह विदेशी कम्पनियां उचित कमाई कर सकेंगी।

खुदरा व्यापार में भीमकाय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश से हमारे देश के आतंरिक व्यापार, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था के ताने-बाने को गंभीर खतरा पैदा हो जायेगा.

आप ही सोचिये  अनर्थशास्त्री मनमोहन सिंह जी  के रूप में देश का अर्थशास्त्र कितना सुधरा या कितना और बिगड़ेगा ?

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
January 15, 2013

अब सरकार का मतलब है कुछ लोगो का पैसा कमाने और विदेश मे जमा करने के लिए सत्ता का उपयोग | जिसमे भारत का असफल लोकतंत्र सहायक है ! अगर अगला चुनाव न आ रहा होता तो FDI लागु करने मे कोई नाटक भी नही करना होता | सब पैसे की माया है |देश बिक गया है ………………..लोग देखते रहे |एस विषय पर मेरा लेख पर भी कभी समय और सुझाब दे | विषय को साम्रग रूप से उठाने के लिए बधाई !

    D33P के द्वारा
    January 26, 2013

    सादर नमस्कार अमन जी …आपका स्वागत है !आपने सही कहा आज कोई सत्ता में देश की सेवा के लिए नहीं अपितु अपनी जेबे भरने और अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ही आना चाहता है ..नेता बिक रहे है और देश को बेच रहे है ….और हम बेबस है क्यूंकि हमारे हाथ में अधिकार है भी और नहीं भी ….देरी से जवाब के लिए क्षमा चाहूंगी . आपकी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार ..

Santlal Karun के द्वारा
December 18, 2012

आदरणीया दीप्ति जी, वर्तमान में एफ.डी.आई. को लेकर सटीक चित्रों के साथ अत्यंत प्रासंगिक, मौलिक, विचारणीय और सुदृढ़ चेतना के साथ लिखा गया आलेख; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “हमारे पास उच्च टैक्नोलॉजी नहीं है, इस क्षेत्र में भी निवेश की अति आवश्यकता है। सुरक्षा के क्षेत्र में हम प्रति वर्ष अरबों रुपए के शस्त्र विदेशों से खरीदते हैं। बहुत-सी भारतीय कम्पनियां भारत में ही शस्त्र बनाती हैं। देश के विकास के लिए ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेश लाभदायक सिद्ध हो सकता है और नि:संदेह विदेशी कम्पनियां उचित कमाई कर सकेंगी। खुदरा व्यापार में भीमकाय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश से हमारे देश के आतंरिक व्यापार, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था के ताने-बाने को गंभीर खतरा पैदा हो जायेगा.”

    D33P के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय संतलाल जी आपका स्वागत है … बहुत क्षेत्र है जहा विदेशी निवेश से देश को लाभ हो सकता है पर सरकार ने खुदरा व्यापार के क्षेत्र में निवेश की अनुमति देकर छोटे तबके , छोटे व्यापारियों के पेट पर लात मारी है !सबसे बड़ी दिखती बात है ये पैसा देश में भी नहीं रहेगा देश से बाहर जायेगा !पर सरकार को ये बात समझ नहीं आती या उनके लिए अपना हित सर्वोपरि है सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार …आगे भी सहयोग बना रहे इसी आशा के साथ .

sudhajaiswal के द्वारा
December 18, 2012

दीप्ती जी, बहुत ही सार्थक लेख लिखा है, मुझे तो पूर्व में ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार करने का अधिकार देकर जो गलती की उसी गलती की पुनरावृति लग रही है ऍफ़.डी.आई. | अच्छे लेख के लिए बधाई |

    D33P के द्वारा
    December 18, 2012

    आदरणीय सुधा जी आपका स्वागत है …आपने सही कहा ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार का खामियाजा हमने बहुत वर्षो तक भुगता अब उसी की पुनरावृति की जा रही है और देश को दुबारा गुलामी की रह पर धकेलने के प्रयास किये जा रहे है ! प्रतिक्रिया के लिए आपका आभार …आगे भी सहयोग की अपेक्षा के साथ ..

akraktale के द्वारा
December 13, 2012

आदरेया दीप्ती जी                      सादर, खुदरा बाजार में विदेशियों के प्रवेश पर आपकी चिंताएं जायज हैं. यह देश को गुलामी की तरफ ले जाने के लिए बढ़ाया गया कदम प्रतीत होता है. 

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार अशोक जी खुदरा बाजार में विदेशियों के प्रवेश पर एक आम आदमी उसके हश्र पर चिंतित है पर सरकार नहीं .ये समझ नहीं आता आजादी किसको मिली है देश की जनता को या देश के सत्ताधारियो को देश की जनता के साथ खिलवाड़ करने की .. ? उच्च संसदीय परम्पराओं के ज्ञाता ,अर्थशास्त्री ने देश का अर्थशास्त्र बिगाड़ने का निर्णय लेने से पहले एक बार भी नहीं सोचा .और देश को पुन्ह गुलामी की जंजीरे बांधने की सोच ली !देश की आजादी के इतने सालो बाद भी हम अपने देश के विकास करने में सक्षम नहीं हो पाए जो वालमार्ट को देश में पैर पसारने की अनुमति दे दी ? हमारा देश कब वास्तविक गुलामी (इन धूसखोर और भ्रष्ट नेताओ)से मुक्त हो पायेगा समझ नहीं आता आपके कीमती समय और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

vikramjitsingh के द्वारा
December 13, 2012

आदरणीया दीप्ति जी…..सादर….. हम तो कब से कह रहे हैं कि……ये ‘चांडालों’ की मण्डली है…..और इनकी अध्यक्ष ‘सोनिया चुडैल’ है….. लेकिन आप तो मान ही नहीं रहे थे……./// ख़ैर…..कोई बात नहीं…..वक़्त आ रहा है…..इन सभी ‘दलालों’ को ‘बसंती’ के तांगे में बिठा कर……पूरे देश के चार चक्कर लगा कर…….हिन्द महासागर में डुबकियाँ दे-दे कर ‘इटली’ तक छोड़ कर आना है…../// और इस ‘शुभ-कार्य’ में कुछ भी ‘अशुभ’ नहीं होना चाहिए…….आप भी वादा कीजिये………हमारा ‘साथ’ देने का….. सादर….

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    विक्रम जी नमस्कार सही कहा आपने जहा सबकी नकेल एक विदेशी के हाथ में हो वहां हम कैसे देश के हित की बात सोच सकते है ?वालमार्ट ने कहा कि हम भारत सरकार के ‘शुक्रगुजार’ हैं जिसने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के मामले में हमारे जैसे विदेशी खुदरा दुकान चलाने वालों की अहमियत को समझा। शायद वो गलती से “सोनिया” की जगह “भारत सरकार” कह गए !अब आपको भी मैडम के अमेरिका जाने का राज़ समझ आ गया होगा की उनको क्या बीमारी थी प्रतिक्रिया के लिए आभार

yogeshkumar के द्वारा
December 13, 2012

एक साधारण सी सोच है कि वालमार्ट एक कंपनी है जिसका सामाजिक कार्य से कोई लेना देना नहीं है… और अगर कोई कंपनी १ करोड़ रुपये भारत में निवेश करती है तो उससे वो दस करोड़ रुपये बनाती है और अपने सैलरी वगैरह पर खर्चे करने के बाद भी वो कम्पनी पांच करोड़ लाभ कमाती है और उसे अमेरिका ले जाती है तो मुझे ये समझ नहीं आता कि इससे देश को क्या लाभ होता है.. मुझे ये समझ नहीं आता है इससे देश को क्या तरक्की होगी… कांग्रेसी देश को समझाने में लगे हैं कि इससे देश को फायदा होगा …मुझे अभी तक एक भी फायदा समझ नहीं आया … ऊपर ये देश जो कि एक विदेशी कम्पनी का २०० साल राज झेल चूका है.. फिर वही कहानी …इतिहास अपने को दोहरा रहा है… और घरों में बैठे उसे देख रहे हैं आलसियों कि तरह ….. कभी कभी इतिहास को पढने में हम सोचते है ये देश कथित तौर पर विश्वगुरु होकर भी किता बेवकूफ रहा होगा जहाँ पहले ८०० साल मुस्लिम शासकों का और फिर २०० साल मुट्ठी भर अंग्रेजो का शासन रहा है… मगर आज कि स्थिति देखे तो तो इतना सब होने के बावजूद हम अपने आपको अकलमंद कह सकते है .. जहाँ फिर वालमार्ट ने १२५ करोड़ डालर लाबिंग( घूसबाजी ..रिश्वतबजी) में खर्च करके अपनी पैठ भारतीय बाज़ार में बना ली.. संभव है इससे देश का कुछ लाभ होने वाला हो मेरी नादान और मोटी बुद्धि को ये बात समझ न आती हो… ये बात तो केवल महामुनि अर्थशाष्त्री और महा मौनी सरदार जी जाने …..

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    योगी जी नमस्कार वालमार्ट जैसी विश्व की ख्यातिप्राप्त रिटेल कम्पनी ने भारत में खुदरा बाजार में निवेश के निर्णय को लागू करवाने के लिए करोडो रुपए खर्च किए..तो भारत के बाजार में कब्ज़ा कर खुद की कमाई के लिए किया है इसमें हमारे देश के लाभ की सोच नहीं है इसी तरह वो आगे भी अपने पक्ष में निर्णय लेने के लिए पैसे खर्च कर सकती है !इस निर्णय को मंजूरी देने वाले देश के लाभ की नहीं अपने लाभ की बात सोच रहे है !हैरानी होती है .जिनकी एक सोच पर ,एक निर्णय पर करोडो लोगो का भविष्य दावं पर लगा हो वो केवल अपने निजी हित की बात सोच रहे है …… प्रतिक्रिया के लिए आभार

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    योगेश जी

yogi sarswat के द्वारा
December 13, 2012

वालमार्ट ज़्यादातर चीज़े चाइना से इम्पोर्ट करता हे और सभी को मालूम हे चाइना की चीज़े केसी होती हे.घटिया किस्म की चीज़े बेच के मुनाफा अपने देश में ले जाना चाहते हे.और भारत के करोडो लोगो को बेरोजगार और दरिद्र बनाना चाहते हे इसमें केंद्र सरकार पूरी तरह अमेरिका को सहयोग कर रही हे.!! क्या देसी बाजार पर कब्जा करने के बाद बहुराष्ट्रीय़ कंपनिया उन्हीं माल का उत्पादन किसान से नहीं चाहेगी जिससे उसे मुनाफा हो। ये कम्पनियाँ करोडो खर्च कर भारत में अपना विस्तार करेंगी तो क्या वो भारत में दान खाता खोलने आ रही है या मुनाफा कमाने ? या फिर सरकार यह भी समझ पाती कि जब मुनाफा ही पूरी दुनिया में बाजार व्यवस्था का मंत्र है तो दुनिया के जिस देश या बाजार से माल सस्ता मिलेगा वहीं से माल खरीद कर भारत में भी बेचा जायेगा। इसी बात को आगे बढाता हूँ ! मान लेते हैं की इससे ४० लाख नौकरियां मिलेंगी लेकिन जब हमारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बंद होती चली जाएँगी तो बेरोजगारी इससे कहीं ज्यदा बढ़ेगी और उसका आंकलन इस सरकार ने नहीं किया है !

    nishamittal के द्वारा
    December 15, 2012

    चीन का माल दो प्रकार का है,वही माल अमेरिका में उत्तम कोटि का और भारत जैसे देशों में घटिया चले तो चाँद तक नहीं तो शाम तक वाली स्थिति होती है.परन्तु हमारे देश के लिए वही घटिया माल आता है,परन्तु देश वासियों या देश की चिंता नेताओं को होती तो आज हम इस स्थिति में नहीं पहुँचते.

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार योगी सारस्वत जी , जब देश में चीनी माल आएगा तो हमारे देश की हमारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बंद होनी ही है ! भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी जी ने कहा कि जहां एक ओर भारत में वालमार्ट का स्वागत किया जा रहा है, उसी वालमार्ट के खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन हो रहे हैं और न्यूयार्क से उसका बोरिया-बिस्तर बांध दिया गया है। जिस दिन संप्रग सरकार ने वालमार्ट को एफडीआई का तोहफा सौंपा और लॉबिस्टों ने भरोसा दिलाया कि छोटे खुदरा व्यापारी सुरक्षित हैं, उसी दिन वेब समाचार पत्र, अटलांटिकसिटीज ने विदेशी मामलों की प्रसिद्ध पत्रिका से एक हेडलाइन दी थी- `रेडिएटिंग डेथ : हाउ वालमार्ट डिस्प्लेसेस नियरबाइ स्माल बिजनेसेस`। देश में जिन करोड़ों लोगों की जीविका गली-मुहल्ले में रेहड़ी-पटरी लगाकर सब्जी-भाजी बेचकर चलती है या गली के मुहाने की दुकान के सहारे रोजी-रोटी चल रही है,उन लोगों का क्या होगा.सरकार के इस फैसले के साथ एक सवाल उभरता है कि उन करोड़ों खुदरा व्यापारियों का क्या होगा जो अपनी छोटी-छोटी पूंजी के साथ अपनी आजीविका चला रहें है एफडीआई के देश में लागू होने से बेरोजगारी बढेगी।आज कृषि के बाद सबसे ज्‍यादा 18 से 20 करोड़ लोग खुदरा व्‍यापार पर ही निर्भर हैं!वालमार्ट के आने से इन लोगों पर सीधे प्रभाव पड़ेगा। पता नहीं देश की सरकार इन सबके बारे में क्यों नहीं सोच पा रही है … प्रतिक्रिया के लिए आभार

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार निशा जी खुद के लिए निर्मित चीज़ और दुसरे को दी जाने वाली चीज़ की गुणत्ता में बहुत अंतर होता है और फिर भारत जैसे देश में पैसे देकर घुसपैठ की जा सकती है तो कुछ भी किया जा सकता है यहाँ सत्ता पर काबिज़ लोगो द्वारा नोटों की संख्या देखी जाती है जो उनकी जेब में जा रही है .उसकी आवाज़ में जनता के साथ क्या खिलवाड़ हो रहा है इस बात से उनको कोई मतलब नहीं !दुखद हालत … प्रतिक्रिया के लिए आभार

Mohinder Kumar के द्वारा
December 13, 2012

दिप्ती जी, सार्थक समसमायिक लेख के लिये बधाई. आपका सरोकार और चिन्ता जायज है. मुझे सिर्फ़ इतना कहना है कि अपने देश के पूंजीपति भी शोषण ही कर रहे हैं. किसान जो मेहनत करता है उसको लाभ न मिल कर बिचोलियों और पूंजीपतियों की चांदी कटती है. ये लोग जमाखोरी कर के आम जनता (उपभोग्ताओं) को लूटते हैं. शुरु शुरु में जब सिर्फ़ इंडियन एयर लाईनस उडान के क्षेत्र में थी मनमाने ढंग से किराया बसूलती थी. आज देखिये प्राईवेट निवेश ने आम आदमी की हद में हवाई यात्रा ला दी है. कहने का मतलब यह है कि FDI भी उपभोग्ताओं के लिये लाभकारी है… उपभोग्ता आम जनता है…हां पूंजी पति जरूर इस से प्रभावित होंगे क्योंकि अब उन्हें कम्पीटिशन में आ कर अपना मुनाफ़ा कम करना पडेगा. ये मेरे व्यक्तिगत विचार और आंकलन है….मेरा मन्तव्य किसी की भावनाओं को आहत करने की नहीं है. यदि किसी को ऐसा लगे तो क्षमा करें.

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार मोहिन्दर जी आपने सही कहा अपने देश के पूंजीपति नेता सभी अपने से कमजोर का शोषण ही कर रहे हैं. किसान जो मेहनत करता है उसको लाभ न मिल कर बिचोलियों और पूंजीपतियों की चांदी कटती है. ये लोग जमाखोरी कर के आम जनता (उपभोग्ताओं) को लूटते हैं.!जो गलत है .फिर भी देश का धन देश में ही रहता है लेकिन इसका मतलब ये भी तो नहीं है एक विदेशी को देश की अर्थव्यवस्था सौप दी जाये और देश का पैसा देश से बहार ले जाने का परमिट दे दिया जाये ! देश के विकास के कई क्षेत्र है जहा विदेशी सहायता ली जा सकती है लेकिन खुदरा क्षेत्र में विदेशियों को अनुमति देना देश के रोजगार और अर्थव्यवस्था के साथ खिलवाड़ करना ही है ! कम्प्यूटर क्षेत्र, निर्माण, दूरसंचार, आटो मोबाइल, ऊर्जा क्षेत्र और खनन ऐसे क्षेत्र हैं जहां विदेशी निवेश देश के लिए फायदेमंद साबित होगा। भारत के हवाई क्षेत्र में अधिक निवेश चाहिए। विदेशो के मुकाबले हमारे पास उच्च टैक्नोलॉजी नहीं है, इस क्षेत्र में भी निवेश की अति आवश्यकता है.सरकार इसमें विदेशी निवेश आमंत्रित कर सकती है ! लेकिन यहाँ तो स्पष्ट दिख रहा है सरकार सिर्फ अपना लाभ सोच रही है इन धूसखोर और भ्रष्ट नेताओ को केवल अपना हित समझ आता है बाकि कुछ नहीं आता ! आम उपभोक्ता इसमें किस तरह लाभन्वित होंगे? वालमार्ट अपने क्रय मूल्य में जगह का किराया .अपने श्रम का मूल्य ,वस्तु का मूल्य ….और सबसे बड़ी बात भारत में घुसने के लिए किये गए व्यय को भी वसूलेगा .कुछ समय के लिए वो सब कुछ सस्ता लगेगा पर अपने पूरी तरह से पैर पसरते ही अपनी मनमानी करने से परहेज नहीं करेगा और उस समय बहुत देर हो चुकी होगी और हम बेबस हो चुके होंगे ! विगत दो तीन वर्षो से सरकार द्वारा कीमतों में इस कदर वृधि की है जिसके मुकाबले पहले पहल वालमार्ट की दरे कम लग सकती है पर दूरगामी परिणाम क्या होगा ये चिंतनीय विषय है आपके कीमती समय और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

vasudev tripathi के द्वारा
December 12, 2012

FDI पर सरकार के तर्क फिजूल की लफ्फाजी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है,! इस निर्णय के दूरगामी दुश्पोअरिनाम होंगें.! सार्थक लेख!

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कारजी सही कहा आपने सरकार के सारे तर्क फिजूल है . छोटे व्यवसायी .रेहड़ी .फुटपाथ पर अपनी जीविका चलने वाले .सभी अपने मालिक है ….वालमार्ट आने से ये सभी बेरोजगारी की कगार पर आ जायेंगे .और अपनी आजीविका के लिए विदेशी मालिको के आगे हाथ पसारेंगे उनकी दया पर इनकी रोटी चलेगी और गुलामी की मानसिकता में जियेंगे !व्यवसाय करना हो तो सबसे पहले अपने नजदीकी प्रतिद्वंदी को ख़तम करो .और विदेशी इतने बेवकूफ नहीं .वेवकूफ तो हम है जो आओ हमें लूट लो का लाइसेंसे जारी कर बैठे है .. सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Sushma Gupta के द्वारा
December 12, 2012

प्रिय दीप्ति जी, आपका ऍफ़ डी आई से सम्बंधित आलेख एकदम सटीक व् तर्क संगत है जिसमें दी गयीं जानकारियाँ भी अति महत्वपूर्ण हैं ..काश .. हमारी सरकार इसे समझकर कुछ जागरूक हो पाती …

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार सुषमा जी सरकार सिर्फ अपना लाभ सोच रही है इन धूसखोर और भ्रष्ट नेताओ को केवल अपना हित समझ आता है बाकि कुछ नहीं आता ! वालमार्ट ने भारत में सिर्फ व्यपार की अनुमति के लिए १२५ करोड़ खर्च किये है वो भी सोचने की बात है वो कहा और किस पर खर्च किये है वो राशी किसे दी गई ? आपके कीमती समय और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

vijay के द्वारा
December 12, 2012

आदरणीय दीप्ती जी नमस्ते ,बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है की अभी हमारी आज़ादी को ६६ साल भी नहीं हुआ थे और वो फिर से हमसे दूर जा रही है आंखे खोल देने वाली पोस्ट बधाई

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    विजय जी सच में अफ़सोस होता है हमने जिनको अपना सरपरस्त समझा जिनके हाथो देश का भविष्य सौप आज वो हमारे हाथो रोटी का निवाला छीन लेने लिये आतुर है.. हमें फिर से गुलामी की और धकेल रहे है ! कीमती समय और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Sumit के द्वारा
December 12, 2012
    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    सुमीत जी नमस्कार सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 12, 2012

वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    नमस्कार मदन मोहन जी आपके कीमती समय और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 12, 2012

देश के बिचौलिए नेताओं को अधिकतम दलाली भी मिलेगी। यही कारण है कि वालमार्ट जैसी विश्व की ख्यातिप्राप्त रिटेल कम्पनी ने भारत में खुदरा बाजार में निवेश के निर्णय को लागू करवाने के लिए करोडो रुपए खर्च किए!तो ये करोडो रुपये किसको दिए गए ? गुलाम मानसिकता प्रधान देश और उसके दो मुहे सेवक . बेच रहे हैं देश को. भुगतें. सार्थक लेख. बधाई. आदरणीया दीप्ती जी, सादर

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम …. वालमार्ट जैसी विश्व की ख्यातिप्राप्त रिटेल कम्पनी ने भारत में खुदरा बाजार में निवेश के निर्णय को लागू करवाने के लिए करोडो रुपए खर्च किए..आगे भी अपने पक्ष में निर्णय लेने के लिए पैसे खर्च कर सकती है और भारत के बाजार में कब्ज़ा कर देश के किसानो और व्यवसाइयों और बेरोजगारों के पेट पर लत मार सकती है !छोटे छोटे रोजगार वाले मालिको को नौकर बना कर उनका व्यवसाय ठप्प कर अपनी जेबे भर सकती है ! भारत में खुदरा बाजार में निवेश के निर्णय के दूरगामी परिणाम क्या होंगे सरकार जानते हुए भी अनजान बनी हुई है .. प्रतिक्रिया के लिए आभार

jlsingh के द्वारा
December 12, 2012

आदरणीया दीप्ति जी, सादर अभिवादन! मैंने आपसे आग्रह किया था … और आपने विस्तृत जानकारी से परिपूर्ण आलेख को प्रस्तुत किया! इसके लिए आपका आभार! …..आपकी आशंकाएं बिलकुल सही है. सभी विद्वान और अर्थशास्त्री बखूबी इस खेल को समझ रहे हैं. नेता विपक्ष सुषमा स्वराज ने भी अपने भाषण में इन बातों का जिक्र किया था. …. कांग्रेस कैसे इस प्रस्ताव को पास करा पायी, वह भी सर्वविदित है …. समाधान क्या है? ….मेरे हिशाब से समाधान है, कांग्रेस को उखाड़ फेंकना और वैकल्पिक सरकार के लिए आम जनता को प्रशिक्षित करना! …..पर यह कौन करेगा ? आम आदमी पार्टी? क्या अभी यह इतनी सशक्त हो पायी है? भाजपा क्या अपने अंतर्विरोधों में जकड़ी नजर नहीं आ रही? भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा क्या? जबतक ब्यवस्था परिवर्तन नहीं होगा … देश का विकास या आम आदमी का विकास कैसे हॉग???? प्रश्न अनुत्तरित है … जरूरत है अच्छे, बुद्धिजीवी और इमानदार लोगों के सत्ता में भागीदार होने की… जबतक निजी स्वार्थ में लिप्त रहने वाले सत्ता की कुर्शी पर काबिज रहेंगे … आम आदमी, मजदूर, किसान, ब्यापारी मुश्किल में ही रहेंगे! देश राम भरोसे चल रहा है … राम की माया राम ही जाने! आपके सम्पूर्ण आलेख पठनीय और हृदयग्राही है ! पुन: आभार!

    D33P के द्वारा
    December 15, 2012

    जवाहर जी सादर नमस्कार ….ये आपका बड़प्पन है .मुझे इस लायक समझा. सच तो ये है सभी दल अंतविरोध में जकड़े हुए है ,निजी स्वार्थ में लिप्त है !विपक्ष में रहते हुए जनता के हित की बात करते है और सत्ता में आते ही अपने निजी हित सर्वोपरि हो जाते है ! आम आदमी,की फिकर किसी को नहीं है ! रिटेल सैक्टर में एफ.डी.आई. से पूर्व भारत के किसानों और उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण हेतु कदम उठाना जरूरी है अन्यथा एफ.डी.आई. एक बार फिर आर्थिक गुलामी को जन्म देगी। जो देश वीर जवानों के बलिदानों से ,उनके खून से आजाद हुआ वो फिर गुलामी की गिरफ्त में आजयेगा किसी को इस बात से सरोकार नहीं लगता


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