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दिल्ली की दिल्लगी

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1047_india-gate-new-delhiकभी दिल्ली को दिल वालो की  कहने वालो का सर फक्र से ऊँचा होता था और वो खुद का दिल्लीवासी होने मे गर्व महसूस करता था पर आज हालत बिलकुल इसके विपरीत है ,दिल्ली वालो को खुद को दिल्ली वासी कहने में शर्म आने लगी है ….इन सबके पीछे क्या कारण है ? आज दिल्ली दिल्लगी हो गई है जैसे कोई शरीफ  और इज्ज़तदार लड़की किसी रेड अलर्ट  क्षेत्र में से गुजरने भर  से खौफ  खाती है !वही हाल आज दिल्ली की सडको का है !लड़की घर से बाहर  निकलने में और अभिभावक बाहर भेजने से डरने लग गए है !कोई लड़की दिल्ली की सडको पर पिता भाई मित्र पति के साथ भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा  रही …तो  क्या लड़की की शिक्षा और नौकरी आदि छुडवाकर घर में  बिठा दिया जाये !

gauraiyaa delhi

क्यों आखिर दिल्ली के पुरुष रेपिस्ट कहलाये जाने लगे है ?
कुछ समय  पहले जब एक इज्ज़तदार लड़की की अस्मत पर गुंडों ने हाथ डाला तो उस लड़की ने सवाल किया क्या दिल्ली में कोठे बंद हो गए है जो आज सरेराह  लडकियों की इज्ज़त पर हाथ डाला जा रहा है !
ससंद में आये दिन अपने वेतन भत्तो के लिए संसद कुत्तो की तरह लड़ते नज़र आ जायेंगे लेकिन देश की, शहर की व्यवस्था पर चर्चा हो तो सब  चुप्प !आज जब इंडिया गेट पर दिल्ली गेंगरेप के विरोध पर प्रदर्शन और रैली निकली गई तो पत्रकार प्रदर्शन कारियों से  बार बार एक ही सवाल करता नज़र आया कि आप क्या चाहते हो ?  कितना बेमानी सवाल है !!

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जब पूरी सत्ता दिल्ली  में है ! दिल्ली में जहा एक महिला  मुख्यमंत्री है ,देश की कमान की डोर एक महिला ने संभाल रखी है वही महिलाएं सुरक्षित नहीं है और फिर उनकी नाक के नीचे शहर का ये हाल …इससे ज्यादा शर्म की क्या बात होगी ? मुंबई जैसे महानगर में भी मध्य रात्रि लोकल ट्रेन तक में  नौकरी से घर लौटी महिलाएं खुद को असुरक्षित  महसूस नहीं  करती है !
आज पूरे देश के हालत पर गौर किया जाये तो दिल्ली सबसे असुरक्षित जगह  है ! हर तरह के जुर्म में आगे दिल्ली !सभी यही पूछ रहे है की आखिर दिल्ली पुलिस को हुआ क्या है !पुलिस बल मंत्रियो और नेताओ के जूते साफ़ करते नज़र आयेंगे !उनके घर की दीवारों की सुरक्षा में तैनात नज़र आयेंगे पर सड़क और शहर व्यवस्था का SWAL  हो तो उसके   लिए पुलिस सुरक्षा दल की कमी का बखान करते नज़र आयेंगे !दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर हो रही रोज़ की  घटनाओं ने लाखों सवाल खड़े कर दिए है !आखिर आम आदमी अपनी परेशानियों की गुहार किससे लगाये ?हर  घटना के बाद आम जनता के आक्रोश शांत करने की जल्दबाजी में गृह मंत्रालय को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे दिए जाते है ….समय के साथ न वो कदम  उठते है न बढते है .और कुछ समय बाद एक और घटना अपने अंजाम को पहुँचती है !
दिल्ली की रोज़ की घटनाओ ने देश को मजाक बना कर रख दिया है

जब पूरी सत्ता दिल्ली  में है ! दिल्ली में जहा एक महिला  मुख्यमंत्री है ,देश की कमान की डोर एक महिला ने संभाल रखी है वही महिलाएं सुरक्षित नहीं है और फिर उनकी नाक के नीचे शहर का ये हाल …इससे ज्यादा शर्म की क्या बात होगी ? मुंबई जैसे महानगर में भी मध्य रात्रि लोकल ट्रेन तक में  नौकरी से घर लौटी महिलाएं खुद को असुरक्षित  महसूस नहीं  करती है !

आज पूरे देश के हालत पर गौर किया जाये तो दिल्ली सबसे असुरक्षित जगह  है ! हर तरह के जुर्म में आगे दिल्ली !सभी यही पूछ रहे है की आखिर दिल्ली पुलिस को हुआ क्या है !पुलिस बल मंत्रियो और नेताओ के जूते साफ़ करते नज़र आयेंगे !उनके घर की दीवारों की सुरक्षा में तैनात नज़र आयेंगे पर सड़क और शहर व्यवस्था का SWAL  हो तो उसके   लिए पुलिस सुरक्षा दल की कमी का बखान करते नज़र आयेंगे !दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर हो रही रोज़ की  घटनाओं ने लाखों सवाल खड़े कर दिए है !आखिर आम आदमी अपनी परेशानियों की गुहार किससे लगाये ?हर  घटना के बाद आम जनता के आक्रोश शांत करने की जल्दबाजी में गृह मंत्रालय को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दे दिए जाते है ….समय के साथ न वो कदम  उठते है न बढते है .और कुछ समय बाद एक और घटना अपने अंजाम को पहुँचती है !

दिल्ली की रोज़ की घटनाओ ने देश को मजाक बना कर रख दिया है!

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
January 15, 2013

बहुत सुंदर ! ………आज आपको पहेली बार पड़ा है हमने ! दिल्ली बालो की क्या गलती है जब देश की जनता ही अपनी जिन्दगी से खेलने के ल;इये इन्हे चुनती है | सारे मुद्दे पर राजनीती हो रही है विपक्ष ख़तम है सत्ता लोलुपता मे सारे दल डूबे है | …………..

    D33P के द्वारा
    January 26, 2013

    सादर नमस्कार अमन जी …आपका स्वागत है साथ ही आपकी सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार ..आगे भी आपके सहयोग की अपेक्षा रहेगी ..धन्यवाद

aman kumar के द्वारा
January 15, 2013

बहुत सुंदर ! ………आज आपको पहेली बार पड़ा है हमने ! दिल्ली बालो की क्या गलती है जब देश की जनता ही अपनी जिन्दगी से खेलने के ल;इये इन्हे चुनती है | सारे मुद्दे पर राजनीती हो रही है विपक्ष ख़तम है सत्ता लोलुपता मे सारे दल डूबे है |

vijay के द्वारा
January 1, 2013

नमस्कार दीप्ती जी समझ में नहीं आता ये लोग कौन सी दुनिया में जी रहे है अगर मीडिया का दबाब न हो तो इन लोगो का आम जनता से कोई लेनेदेना नहीं है बस ये और इनकी कुर्सी सलामत रहनी चाहिए सुंदर प्रस्तुति बधाई

    D33P के द्वारा
    January 1, 2013

    सादर नमस्कार विजय जी …………..ये सब सत्ता के दंभ में है इनको जनता के दर्द से कोई लेना देना नहीं है ….मिडिया भी तो बिकी हुई है सत्ता की नकेल जिसके हाथ में है उसमे विदेशी खून है ,जो भारत की बेटी के खून पर नहीं रोयेगा . कल टीवी पर उनको आंसू बहाते देखा गया .उनके आंसू भी वोटो की राजनीती खेलते है !कितना शर्मनाक है सब !इतने बड़े हादसे के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ ,किस्से की तरह इसे भूलकर नया साल मनाएंगे अगले चुनावो की रणनीति बनायेंगे ! सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी घटना के बाद, जिसके लिए पूरा देश हिल गया पूरे देश की जनता रोई …….क्या उन हादसों में कमी आई? सब कुछ तो वैसा ही है अपराधी को पुलिस का डर नहीं ,.पुलिस को जनता की चिंता नहीं …..सारी पुलिस व्यवस्था जनता की नहीं,नेताओ की हिफाज़त में लगी है जनता के प्रति पूरी तरह से संवेदनहीन ……. …… प्रतिक्रिया के लिए आभार

sinsera के द्वारा
December 30, 2012

सार्थक पोस्ट दीप्ती जी, ..दामिनी की मौत से परिदृश्य ज़रूर बदल गया है लेकिन स्त्री की सुरक्षा को लेकर उठाये गए सवाल अभी भी बेमानी हैं, ये हम सब जानते हैं..

    D33P के द्वारा
    December 30, 2012

    नमस्कार सरिता जी सही कहा आज दामिनी नहीं रही पर देश के लिए कई सवाल दे गई …….और कितनी दामनियों को इन वहशियों के आगे अपनी जान देनी होगी अपनी सबको मातम मानते देखा सुना ….क्या होगा उससे ,लोगो ने आन्दोलन किया आक्रोश दिखाया ,किसके ऊपर फर्क पड़ा ….न सत्ता पर न मंत्रियो ,ना सांसदों पर !! पुलिस आन्दोलन को दबाने में लगी है !इतने जनाक्रोश के बाद भी उसी तरह की घटनाएँ अब भी हो रही है !अपराधियों को पुलिस का खौफ नहीं ,वहीं पीड़ितों को पुलिस पर भरोसा नहीं रहा है ।सारी पुलिस इन नेताओ की सुरक्षा के लिए है आम जनता की सुरक्षा के लिए नहीं ……थोड़े दिन में सब शांत हो जायेगा दिल्ली के इसी हादसे के बाद भी उसी दिल्ली में नया साल और गणतंत्र दिवस भी मनाया जायेगा आप देख लेना..मन त्रस्त है ……कल टीवी पर सोनिया गाँधी को रोते देखा मगरमच्छ के आंसू थे ,जिसमे वैसे ही विदेशी खून की बू है …उसे क्या दर्द है देश का खून बहा या इस देश की बेटी की जान गई .बहुत गुस्सा भी रहा है पर हम और आपकी तरह सब बेबस है

    D33P के द्वारा
    December 29, 2012

    सदैव स्वागत है

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 26, 2012

कुत्ते की तरह नहीं बल्कि ये कुत्ते ही हैं ! अब रही पुलिश की बात तो, वे तो पुलिश हैं ही नहीं वे तो लाइसेंशी गुंडे हैं ! मान्या दीप्ति जी , इस ज़रूरी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई ! पुनश्च !!

    D33P के द्वारा
    December 29, 2012

    गुंजन जी नमस्कार सच में इंसानियत तो रही नहीं ,जनता और पुलिस, नेता और सरकार सभी को गुंडागर्दी का जैसे लाइसेंसे मिला हुआ है सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

yogi sarswat के द्वारा
December 26, 2012

ये जो कुछ चल रहा है कुछ दिन और चलेगा , फिर सब ठंडा हो जायेगा ! मंत्री भी , पुलिस भी और प्रदर्शन करने वाले भी ! फिर कोई और आएगा , जो अपनी जिंदगी को बर्बाद होते देखेगा , शायद मैं होऊं या कोई और होए ! फिर बवाल मचेगा ( लेकिन जरुरी नहीं ) , फिर मंत्री इधर से उधर दोडेंगे , फिर पुलिस कार्यवाही करेगी ! फिर सब ठप्प ! ये जीवन के खेल की तरह या प्लेटफार्म पर ट्रेन के आने जाने का खेल खेल रहे हैं सब ! किसको किसी की इज्ज़त या जिंदगी से क्या लेना देना ? पहले आदमी की जान की कोई कीमत नहीं थी अब इज्ज़त की भी कोई कीमत नहीं रह जाएगी !

    D33P के द्वारा
    December 29, 2012

    सब अपने अपने खेल में मस्त है किसी को किसी से मतलब नहीं ……सभी संवेदन हीन हो गए है !

jlsingh के द्वारा
December 24, 2012

आदरणीय दीप्ति जी, सादर अभिवादन! उपयुक्त समय पर सशक्त आलेख!…. पर अन्धो के आगे रोना, अपना दीदा (दृष्टि) खोना के सामान है! काश कि ये घटना किसी नेता, मंत्री की बेटी के साथ घटित होती तो ये क्या बयान देते! यह तो एफ. डी. आई. जैसा उपयोगी मुद्दा नहीं है जिसे जैसे तैसे पास करा दिया जाय! आज के लाठीचार्ज वाली घटना तो अग्रेज पुलिस की याद दिला रही है!…हाय रे पुलिस वाले तुम्हारी भी माँ बहने होंगी …. कितना कुछ कहूं. बहुत कुछ कहा जा रहा है, लिखा जा रहा है, चर्चाएँ हो रही हैं, नतीजा…..वही ढाक के तीन पात! आज एक अधेड़ महिला के मुख से सुना- “आज दिल्ली पुलिस ने हम सभी महिलाओं का सरेआम रेप कर दिया!” इससे बड़ी भर्त्सना और क्या होगी? … मनमोहना, सुने नाही, सोनिया, बोले नाही… राहुला, देखे नाही! शिंदे, गंदे! शीला दीक्षित, भूली है जवानी, संदीप दीक्षित, नाही शिक्षित! ये मेरे भी आक्रोश हैं!

    D33P के द्वारा
    December 27, 2012

    जवाहर जी नमस्कार सही कहा .इनके लिए अपनी कुर्सी के सामने किसी की न तो जान की कीमत है न इज्ज़त की !कोई चिल्लाये तो पुलिस को दमन के लिए दौड़ा देते है ,देखिये प्रदर्शन कारियों को खदेड़ने के लिए कितना पुलिस बल है लेकिन जनता की सुरक्षा के लिए नहीं है ,यहाँ इनकी अपनी सुरक्षा का सवाल जो था !क्या पता आक्रोश में जनता इन्हें ही इनके घर से निकल कर पीट देती इसलिए इन पर सर्दी में पानी और ,लाठिया बरसाना जरुरी जो था मनमोहन,सोनिया,… राहुल, ! शिंदे, शीला दीक्षित, संदीप दीक्षित, सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे है हैं!और आगे भी जो आयेंगे वो भी इन्ही की बिरादरी में से आयेंगे सहयोग और सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार

ajaykr के द्वारा
December 23, 2012

aadrniya दीप्ती जी,सादर प्रणाम | यथार्थ रचना

    D33P के द्वारा
    December 27, 2012

    अजय जी नमस्कार सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आभार

akraktale के द्वारा
December 23, 2012

दीप्ति जी सादर, सच है आज सारा सुरक्षा तन्त्र नेताओं और अधिकारियों कि सेवा में लग गया है जो नहीं भी हैं वह उनके इशारे पर ही नाच रहे हैं. जिस हेतु के लिए उनको नौकरी मिली है वह गौण हो गया है. देश कि आतंरिक सुरक्षा कमजोर हो रही है और साथ ही हमारे द्वारा दिये जाने वाले कर का दुरुपयोग भी. आपकी चिंता जायज है. 

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    अशोक जी नमस्कार ..सच में आज देश के हालत देश को शर्मसार कर चुके है ……क्या आपको नहीं लगता कि इस आजादी से तो गुलामी ही अच्छी थी ? अपराधी भी इतनी देर आजाद नहीं रहते न उन्हें सजा देने के लिए सोचना पड़ता !युवा भारत के युवा ही संस्कार विहीन हो जाये .उसका किन शब्दों में तिरस्कार किया जाये समझ नहीं आता !जहा से देश संचालित हो रहा है वही उनकी नाक के नीचे दिल्ली का ये हाल है बाकि शहरो में होने वाले हादसों का तो क्या कहें !लगता है दिल्ली वाले लोगो के दिल की संवेदनाएं मर चुकी है !

krishnashri के द्वारा
December 22, 2012

आदरणीय महोदया , सादर , मैं आप से पूर्णतया सहमत हूँ , सशक्त लेखन ,शुभकामना .

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    आदरणीय श्री जी पोस्ट को पसंद करने और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

manoranjanthakur के द्वारा
December 22, 2012

super… duper…hit post…lot of badhai

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    पोस्ट को पसंद करने और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

mayankkumar के द्वारा
December 22, 2012

आपकी विस्‍त्रत रचना वाकई रोचक व पठनीय है, प्रभावी रूपांतरण । पढृकर क़तज्ञ हुआयरू। सधन्‍यवाद ।

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    मयंक जी आपका स्वागत है आपने समय दिया उसके लिए आभार आगे भी सहयोग बना रहेगा यही अपेक्षा है

December 22, 2012

सादर प्रणाम!……………………सशक्त प्रस्तुतीकरण ..हार्दिक आभार……….. किसी ने किसी के साथ बलात्कार क्या किया, सारे शहर को अपनी शराफ़त दिखाने का मौका मिल गया…. (संदीप)………………….

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए आभार ……समझ नहीं आया मेरे पेज पर अनिल जी है या संदीप जी ….जो भी है उनका स्वागत है

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 22, 2012

आदरणीया दीप्ती जी, सादर आपकी व्यथा सही है. प्रशाशन की निष्क्रियता भी अपराध बढ़ने में महत्त्व पूर्ण भूमिका ऐडा करती है. सार्थक लेख.

    D33P के द्वारा
    December 23, 2012

    प्रदीप जी सादर प्रणाम इस समय भी संसद का विशेष सत्र बुलाने से साफ इंकार कर दिया गया है !प्रधानमंत्री का ये बयान की रेप में फांसी का प्रावधान नहीं है ,दुखद प्रतीत हुआ !कानूनी प्रक्रिया बेहद पेचीदा है पर इन हालत में किन सबूतों की जरुरत बाकी है ?विशेष अदालते ,विशेष कानून किसके लिए बने है ?! प्रशासन नाकारा साबित है !सभी समय और परिस्थितियों की धकेलने में लगे है..


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