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ये जीवन अनमोल है !

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Breakup_in_the_cold_nov__rain__by_VreauSaAjungLaStele

दिल में कुछ .लब पर कुछ और है
हम कहते कुछ, सोचते कुछ और है !!
असली चेहरे के पीछे चेहरा इक और है
मीठी बातो में दिखती मनुहार है !!
पर बातो  के पीछे घात कुछ और है
दिखने  की कोशिश सरल है !!
पर असलियत कुछ और है !
हम ज्ञानी नहीं दिल और दिमाग से !
पर दिखने की कोशिश पर पूरा जोर है !!
रिश्तो  पर दिखती मधुरता है !
पर पीछे कितना शोर है …!!…..
सच्चाई नहीं .हमारे अंतरतम  में !
गहरे तक झूठ की विष बेल है ..!!
जागो इन्सान जागो ,,,,,,,
छोटा सा जीवन ,छोटे से रिश्ते है !
इंसानियत से जियो, ये जीवन अनमोल है !

दिल में कुछ .लब पर कुछ और है

हम कहते कुछ, सोचते कुछ और है !!

असली चेहरे के पीछे चेहरा इक और है

मीठी बातो में दिखती मनुहार है !!

पर बातो  के पीछे घात कुछ और है

दिखने  की कोशिश सरल है !!

पर असलियत कुछ और है !

हम ज्ञानी नहीं दिल और दिमाग से !

पर दिखने की कोशिश पर पूरा जोर है !!

रिश्तो  पर दिखती मधुरता है !

पर पीछे कितना शोर है !!

सच्चाई नहीं .हमारे अंतरतम  में !

गहरे तक झूठ की विष बेल है ..!!

जागो इन्सान जागो ……

छोटा सा जीवन ,छोटे से रिश्ते है !

इंसानियत से जियो, ये जीवन अनमोल है !

D33P

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Malik Parveen के द्वारा
February 13, 2013

दीप्ति जी नमस्कार, सही कहा ये जीवन अनमोल है और इंसानियत ही इसका तोल है …

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2013

छोटा सा जीवन , छोटे से रिश्ते हैं ! इंसानियत से जिओ , ये जीवन अनमोल है ! सच में जीवन अनमोल ही है भरपूर सच्चाई और इंसानियत के साथ जीना चाहिए.. अति सुन्दर सन्देश

    D33P के द्वारा
    February 13, 2013

    अलका जी नमस्कार सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
February 9, 2013

आदरणीया दीप्ति जी, सादर ! जीवन अनमोल भी है, और क्षणभंगुर भी ! इसलिए आपने बिलकुल ठीक कहा कि…. “”इंसानियत से जियो, ये जीवन अनमोल है !”" सुन्दर रचना !

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    आदरणीय शशि भूषन जी नमस्कार सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Shwetamisra के द्वारा
February 8, 2013

सार्थक पंक्तियाँ …….. रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    श्वेता जी प्रथम स्वागत है ,सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार ,आगे भी आपसे सहयोग की अपेक्षा रहेगी

rekhafbd के द्वारा
February 6, 2013

दीप्ती जी रिश्तो पर दिखती मधुरता है ! पर पीछे कितना शोर है !! सच्चाई नहीं .हमारे अंतरतम में ! गहरे तक झूठ की विष बेल है ..!!,सार्थक पंक्तियाँ ,हर इंसान दिखावा करता है ,सामने कुछ और पीछे कुछ ,सुंदर संदेश देती हुई रचना पर बधाई

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    रेखा जी नमस्कार ….यही सच है लोगो के शब्द कुछ बोलते है भावनाएं कुछ बोलती है ,सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

jlsingh के द्वारा
February 5, 2013

आदरणीया दीप्ति जी, सादर अभिवादन! काफी मंथन और मनन के बाद मुझे दीखता ‘कुछ’ है पर समझ में ‘कुछ’ और है! रिश्तो पर दिखती मधुरता है ! पर पीछे कितना शोर है !! यह अंतर्ज्ञान!…. काफी अनुभवों के बाद ही समझ में आता है! अंत में सन्देश भी …. छोटा सा जीवन ,छोटे से रिश्ते है ! इंसानियत से जियो, ये जीवन अनमोल है !

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    जवाहर जी नमस्कार .सही कहा लोगो के शब्द कुछ कहते है और उनकी भावनाएं कुछ और होती है .दीखता कुछ है होता कुछ है .और ये बात भोले भाले लोगो को समझ में नहीं आती हर तरफ छल … सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

akraktale के द्वारा
February 5, 2013

दीप्ति जी सादर, जीवन मोल पर लिखी सुन्दर रचना. छोटे से मानव जीवन को हम सिर्फ झूठ पर ही ख़त्म कर दें यह ठीक नही. सुन्दर संदेश देती इस रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    अशोक जी नमस्कार ….अपने सही कहा छोटे से मानव जीवन को हम सिर्फ झूठ पर ही ख़त्म कर दें यह ठीक नही. .पर आज हालत यही है हर सच के चेहरे के पीछे झूठ का पहरा है .एक आवरण लिए हुए

yogi sarswat के द्वारा
February 5, 2013

हम ज्ञानी नहीं दिल और दिमाग से ! पर दिखने की कोशिश पर पूरा जोर है !! रिश्तो पर दिखती मधुरता है ! पर पीछे कितना शोर है !! एकदम सार्थक पंक्तियाँ , हम अपने आप में कितने भी मुर्ख हों किन्तु सर्व्श्रेअश्थ दिखाने की कोशिश करते हैं ! बहुत सरल शब्दों में बहुत कड़वी सच्चाई आदरणीय दीप्ति जी ! बहुत सुन्दर

    jlsingh के द्वारा
    February 5, 2013

    योगी जी के साथ सहमति!

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

vaidya surenderpal के द्वारा
February 4, 2013

सुन्दर भावपूर्ण कविता के लिये आभार।

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    सुरेन्द्र जी ..प्रथम स्वागत है आपका !सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 4, 2013

अपने लघुकाय में सार्थक और व्यापक भाव को समेटे इस कविता के लिए हार्दिक बधाई ! पुनश्च !

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    विजय जी नमस्कार ….बहुत अन्तराल से आपका आना हुआ आपके आने और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

ajaykr के द्वारा
February 4, 2013

आदरणीय दीप्ती जी, सादर प्रणाम | बहुत सुंदर कविता ..पर हमे इस संसार में की अच्छी बातो /विचारों पर कंसन्ट्रेट करने से ज्यादा फायदा हों सकता हैं ,लोग अच्छे हैं या बुरे हैं ..इसका निर्धारण हम अपने खुद के चश्मे से देखकर करते हैं,हमारा चश्मा ऐसा होना चाहिए की इससे हर माहौल या परिस्थिति कि सिर्फ अच्छी बाते दिखे तो जीवन संवर सकता हैं संयोग कि बात ये हैं की जिस समय मैं आपका ब्लॉग पढ़ रहा हूँ साथ ही एक सेमीनार कि तैयारी कर रहा हूँ जो कल देना हैं ,उसमे मैं विचार पर कुछ बोलने वाला हूँ जो इस प्रकार हैं – “विचार शक्तिशाली जीवित वस्तुएं हैं ,उर्जा के छोटे छोटे बंडल हैं यदि तुम समझना चाहों तों| अधिकतम लोग अपने विचारों कि प्रकृति पर कोई विचार नही करते लेकिन तुम्हारे विचारों कि मूल्यवत्ता तो तुम्हारे जीवन के स्तर का निर्णय करती हैं |विचार इस भौतिक दुनिया का उसी प्रकार से हिस्सा हैं जैसे वह झील जिसमे तुम तैरते हों या वह सड़क जिस पर तुम चलते हों |एक मजबूत अनुशासित मस्तिष्क ,जिसका निर्माण कोई भी दैनिक अभ्यास से कर सकता हैं ,अलौकिक चीजे प्राप्त कर सकता हैं |यदि तुम जीवन परिपूर्ण ढंग से जीना चाहते हों तो तो अपने विचारों कि ऐसे ही देखभाल करों जैसे अपनी सबसे कीमती वस्तुओ कि करते हों |आंतरिक अशांति को दूर करने के लिए कठोर परिश्रम करों |तुम्हे इसका प्रतिफल बहुतायत में मिलेंगा ” कड़े शब्दों के लिए माफ़ी चाहूँगा |आपका अजय

    D33P के द्वारा
    February 13, 2013

    अजय जी …नमस्कार आपने सही कहा हमारा द्रष्टिकोण हमारी सोच को प्रभावित करता है .और हमारी सकारात्मक सोच सामने वाले को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है !सकारात्मक सोच की तरंगे नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करती है !लेकिन हर जगह ये केवल हमारी सोच काम नहीं करती ……जितना हमारी सोच सामने वाले कि सोच को प्रभवित करती है उतनी ही सामने वाले की सोच हमारी सोच को भी प्रभावित करती है !हो सकता है किसी की नकारात्मक तरंगे हम पर भी नकारात्मक प्रभाव डाले उस समय इंसान का स्वयं पर नियंत्रण समाप्त हो जाता है !अनुशासित मस्तिष्क ही इस पर नियंत्रण रख सकता है जैसा कि आप स्वयं जानते है कि अनुशासित मस्तिष्क का निर्माण हर एक के लिए इतना आसन भी नहीं है !….जवाब देरी से देने के लिए माफ़ी चाहूंगी …..आपका सेमिनार सफल रहा होगा ….आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए आभार

February 3, 2013

सादर प्रणाम……………….छोटा सा जीवन ,छोटे से रिश्ते है ! इंसानियत से जियो, ये जीवन अनमोल है ! ………………………..बहुत खूब…………..सार्थक और सुन्दर सन्देश

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    अनिल जी नमस्कार ….रचना पसंद करने और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार

seemakanwal के द्वारा
February 2, 2013

सुन्दर रचना …….अब लोगों के पास मुखौटे बहुत हो गये हैं जहाँ जो जरूरत हो लगा लेते हैं .. बधाई ..

    D33P के द्वारा
    February 11, 2013

    सीमा जी नमस्कार …. सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आभार


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