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गरीबों के लिए कर्ज का पर्व

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सरकार योजनाएं तो गरीबो के लिए लाती है पर सच तो यही है कि  उन योजनाओं से कमाते अमीर है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में  जन धन योजना का शुभारंभ किया ! योजना के तहत 7.5 करोड़ लोगों के बैक अकाउंट खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है।इस योजना में पहले ही दिन देश भर में रेकॉर्ड 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।
इस योजना में बिना रूपए जमा किए बैंक खाते खोले जाएंगे यानी जीरो बैलेंस पर खाते खुलेंगे।
इस योजना में खास बात यह है कि 26 जनवरी से पहले खाता खुलवाने वालों को एक लाख रुपये के दुर्घटना बीमा के साथ 30 हजार रुपये का जीवन बीमा भी मिलेगा। पर क्या ये सुविधा आरम्भ से लेकर अंत तक शून्य  राशि वाले खाते पर भी पर भी मिलेगी ? क्या जरुरी है खाताधारक बाद में भी खाते में धन जमा करवाये ! मोदी जी जन धन योजना बेशक मन से लए हो पर वो गरीब जिनके पास खाने के लिए पैसे नहीं ,तन ढकने  के लिए पैसे नहीं ,बच्चो को स्कूल भेजकर फीस भरने के पैसे नहीं वो खाते में पैसे कैसे जमा करेगा ?और जन धन योजना शुरू करने से किसे रोजगार मिलेगा निजी क्षेत्र  को ,?जीवन बीमा एजेंटो को ?यह योजना देश के गरीबों के लिए कर्ज मुक्ति का पर्व  नहीं भविष्य  में गरीबो को कर्ज में डालने की शुरुआत है ! -
.डेबिटPradhan-Mantri-Jan-Dhan-Yojana-300x221Pradhan-Mantri-Jan-Dhan-Yojana-300x221कार्ड की सुविधा के साथ ..खाता खुलने के छह महीने के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा..’एक बैंक खाता खुल जाने के बाद हर परिवार को बैंकिंग और कर्ज की सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी……यानि कर्ज लेने का लाइसेंस …
अब  ये बात समझ में नहीं आई कि मोदी जी का लक्ष्य गरीबो को बचत की और अग्रसर करना है या जनता को बैंको में बचत को बढ़ावा देना है !   बैंक की सात हजार से अधिक शाखाएं खोलेंगे और 20 हजार से अधिक एटीएम लगाएंगे।
क्या मोदी जी को ये पता नहीं है  आज देश के कई ग्रामीण क्षेत्र जहाँ बैंक नहीं है (नवीन बैंक खुलेंगे तब खुलेंगे ,)ग्रामीण क्षेत्र जहाँ केवल  पोस्ट ऑफिस ही कार्य करते है और अब डाकघरों को भी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में आये दिन सर्वर ठप्प रहता है और निवेशक दिन भर लम्बी लाइनो में सर्वर चालू होने का इंतज़ार करते रहते है ,आंठ्वी पास पोस्टमैन से पदोन्नत हुए पोस्टमॉस्टर जिन्हे कम्प्यूटर चलाना  भी नहीं आता उन डाकघरों को ऑनलाइन करने से पहले  आ रही परेशानियों को भी दूर करना जरुरी है !नवीन   बैंक योजना शुरू करने से पहले मोदी जी को पहले से काम में आ रही परेशानियों का हल निकालना चाहिए !
स्विस बैंक से काला धन आये न आये पर उससे पहले देश में ही बड़े वर्ग  के पास बहुत काला धन दबा हुआ है जिसे बाहर निकलने के लिए प्रयास बहुत जरुरी है !
जब कांग्रेस सरकार ने  लघु  बचत योजनाओ के माध्यम से लोगो की जेब से काला धन निकलने के लिए इंदिरा विकास पत्र योजना शुरू की थी .योजना अनुसार पांच वर्ष में धन दुगना वो भी बिना किसी पूछताछ के ,निवेश कर्ता से कोई सवाल किये बिना उसे धनराशि का भुगतान कर दिया जायेगा ! उस समय सच में लोगो को मजा आ गया था और इस योजना में बहुत भारी मात्रा में निवेश प्राप्त हुआ था ! लोगो की जेब से बहुत सारा काला धन निकाल कर सरकारी कोष भरा गया ,लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया और साथ ही छोटे और गरीब लोगो के  लिए सुविधा वाली लघु बचत योजनाओ में भी ब्याज दरें कम होती चली गई ,जिसका फायदा निजी क्षेत्रो ने उठाया ! सरकारी ब्याज दरों  से दुगनी  ब्याज दरों पर लोगो को निवेश का झांसा देकर कम्पनिया भाग गई !हमने बहुत लोगो को अपनी जिंदगी की सारी जमा पूँजी लुटा कर रोते देखा है किसी ने अपनी बेटी की शादी के लिए जुटाई गई राशि लुटा दी किसी ने अपने बच्चो की शिक्षा के लिए जमा पूँजी गवाई!
सरकारी अंकुश के आभाव में आज भी संजीवनी और आदर्श जैसी बहुत सारी निजी निवेश कंपनियां सरकारी ब्याज दरों से दुगनी से भी ज्यादा  ब्याज राशि पर लोगो के पैसे जमा कर रही है  ! किस दिन ये सब कंपनियां सब समेत कर भाग जाएगी कुछ नहीं कह सकते  ! इन पर भी सरकार को लगाम कसनी होगी
अभी हाल ही में बजट में लघु बचत योजनाओ में किसान विकास पत्र  फिर से शुरू करने की घोषणा हुई है लेकिन परिपक्वता अवधि ज्यादा होने से लोगो में इसका आकर्षण कम  है ! पांच वर्षीय आवर्ती जमा योजना में भी कम से कम तीन साल की बाध्यता ,ऊपर से ब्याज दर की कमी भी लोगो को बैंक की आवर्ती योजनाओ की तरफ खींच रही है  जहा ज्यादा ब्याज दर के साथ ही एक वर्ष में   राशि प्राप्त की जा सकती है !
विगत वित्त मंत्रियो के अनुसार लघु बचत योजनाओ में ब्याज दरें बढ़ाने की क्या जरुरत है लोगो के पास निवेश करने के लिए बहुत विकल्प उपलब्ध है -जैसे म्यूचल फंड ,जीवन बीमा ,शेयर बाजार  आदि आदि …वो शायद ये भूल गए  कि ये सब विकल्प ज्यादा पैसे वालो के लिए है गरीब और छोटे तबके के लिए छोटी बचत ही एक मात्र विकल्प है जो उनकी जेब पर भारी नहीं होता है !
यदि सरकार अब भी इंदिरा विकास पत्र जैसी कोई योजना शुरू करती है तो बहुत सारा जमा धन लोगो की तिजोरियों से बाहर  आ सकता है !
छोटे वर्ग को बचत की और आकर्षित करने का काम लघु बचत योजनाएं है जिनको दिन प्रतिदिन ब्याज दर काम करके हतोत्साहित किया जा रहा है उसमे भी सुधार करने की जरुरत है क्यूंकि आज भी लोगो का विश्वास इन योजनाओ में है
.यह जन धन योजना गरीब और अमीर के बीच बढ़ रहे अंतर को तोड़ने के लिए नहीं और ज्यादा अंतर पैदा करने की प्रभावी योजना है !यह योजना केवल बैंको के माध्यम से क्यों ? डाकघरों में भी ये योजना क्यों नहीं लागू की गई
धनवान वर्ग से तो पैसा निकाल नहीं पाये अब गरीब की जेब में डाका  डालने की योजना

Pradhan-Mantri-Jan-Dhan-Yojana-300x221

सरकार योजनाएं तो गरीबो के लिए लाती है पर सच तो यही है कि  उन योजनाओं से कमाते अमीर है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में  जन धन योजना का शुभारंभ किया ! योजना के तहत 7.5 करोड़ लोगों के बैक अकाउंट खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है।इस योजना में पहले ही दिन देश भर में रेकॉर्ड 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।
इस योजना में बिना रूपए जमा किए बैंक खाते खोले जाएंगे यानी जीरो बैलेंस पर खाते खुलेंगे।


इस योजना में खास बात यह है कि 26 जनवरी से पहले खाता खुलवाने वालों को एक लाख रुपये के दुर्घटना बीमा के साथ 30 हजार रुपये का जीवन बीमा भी मिलेगा। पर क्या ये सुविधा आरम्भ से लेकर अंत तक शून्य  राशि वाले खाते पर भी पर भी मिलेगी ? क्या जरुरी है खाताधारक बाद में भी खाते में धन जमा करवाये ! मोदी जी जन धन योजना बेशक मन से लाये  हो पर वो गरीब जिनके पास खाने के लिए पैसे नहीं ,तन ढकने  के लिए पैसे नहीं ,बच्चो को स्कूल भेजकर फीस भरने के पैसे नहीं वो खाते में पैसे कैसे जमा करेगा ?और जन धन योजना शुरू करने से किसे रोजगार मिलेगा निजी क्षेत्र  को ,?जीवन बीमा एजेंटो को ?यह योजना देश के गरीबों के लिए कर्ज मुक्ति का पर्व  नहीं भविष्य  में गरीबो को कर्ज में डालने की शुरुआत है ! -
.डेबिट कार्ड की सुविधा के साथ ..खाता खुलने के छह महीने के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा..’एक बैंक खाता खुल जाने के बाद हर परिवार को बैंकिंग और कर्ज की सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी……यानि कर्ज लेने का लाइसेंस …

अब  ये बात समझ में नहीं आई कि मोदी जी का लक्ष्य गरीबो को बचत की और अग्रसर करना है या जनता को बैंको में बचत को बढ़ावा देना है !   बैंक की सात हजार से अधिक शाखाएं खोलेंगे और 20 हजार से अधिक एटीएम लगाएंगे।
क्या मोदी जी को ये पता नहीं है  आज देश के कई ग्रामीण क्षेत्र जहाँ बैंक नहीं है (नवीन बैंक खुलेंगे तब खुलेंगे ,)ग्रामीण क्षेत्र जहाँ केवल  पोस्ट ऑफिस ही कार्य करते है और अब डाकघरों को भी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया में आये दिन सर्वर ठप्प रहता है और निवेशक दिन भर लम्बी लाइनो में सर्वर चालू होने का इंतज़ार करते रहते है ,आंठ्वी पास पोस्टमैन से पदोन्नत हुए पोस्टमॉस्टर जिन्हे कम्प्यूटर चलाना  भी नहीं आता उन डाकघरों को ऑनलाइन करने से पहले  आ रही परेशानियों को भी दूर करना जरुरी है !नवीन   बैंक योजना शुरू करने से पहले मोदी जी को पहले से काम में आ रही परेशानियों का हल निकालना चाहिए !
स्विस बैंक से काला धन आये न आये पर उससे पहले देश में ही बड़े वर्ग  के पास बहुत काला धन दबा हुआ है जिसे बाहर निकलने के लिए प्रयास बहुत जरुरी है !
जब कांग्रेस सरकार ने  लघु  बचत योजनाओ के माध्यम से लोगो की जेब से काला धन निकलने के लिए इंदिरा विकास पत्र योजना शुरू की थी .योजना अनुसार पांच वर्ष में धन दुगना वो भी बिना किसी पूछताछ के ,निवेश कर्ता से कोई सवाल किये बिना उसे धनराशि का भुगतान कर दिया जायेगा ! उस समय सच में लोगो को मजा आ गया था और इस योजना में बहुत भारी मात्रा में निवेश प्राप्त हुआ था ! लोगो की जेब से बहुत सारा काला धन निकाल कर सरकारी कोष भरा गया ,लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया और साथ ही छोटे और गरीब लोगो के  लिए सुविधा वाली लघु बचत योजनाओ में भी ब्याज दरें कम होती चली गई ,जिसका फायदा निजी क्षेत्रो ने उठाया ! सरकारी ब्याज दरों  से दुगनी  ब्याज दरों पर लोगो को निवेश का झांसा देकर कम्पनिया भाग गई !हमने बहुत लोगो को अपनी जिंदगी की सारी जमा पूँजी लुटा कर रोते देखा है किसी ने अपनी बेटी की शादी के लिए जुटाई गई राशि लुटा दी किसी ने अपने बच्चो की शिक्षा के लिए जमा पूँजी गवाई!
सरकारी अंकुश के आभाव में आज भी संजीवनी और आदर्श जैसी बहुत सारी निजी निवेश कंपनियां सरकारी ब्याज दरों से दुगनी से भी ज्यादा  ब्याज राशि पर लोगो के पैसे जमा कर रही है  ! किस दिन ये सब कंपनियां सब समेत कर भाग जाएगी कुछ नहीं कह सकते  ! इन पर भी सरकार को लगाम कसनी होगी


अभी हाल ही में बजट में लघु बचत योजनाओ में किसान विकास पत्र  फिर से शुरू करने की घोषणा हुई है लेकिन परिपक्वता अवधि ज्यादा होने से लोगो में इसका आकर्षण कम  है ! पांच वर्षीय आवर्ती जमा योजना में भी कम से कम तीन साल की बाध्यता ,ऊपर से ब्याज दर की कमी भी लोगो को बैंक की आवर्ती योजनाओ की तरफ खींच रही है  जहा ज्यादा ब्याज दर के साथ ही एक वर्ष में   राशि प्राप्त की जा सकती है !
विगत वित्त मंत्रियो के अनुसार लघु बचत योजनाओ में ब्याज दरें बढ़ाने की क्या जरुरत है लोगो के पास निवेश करने के लिए बहुत विकल्प उपलब्ध है -जैसे म्यूचल फंड ,जीवन बीमा ,शेयर बाजार  आदि आदि …वो शायद ये भूल गए  कि ये सब विकल्प ज्यादा पैसे वालो के लिए है गरीब और छोटे तबके के लिए छोटी बचत ही एक मात्र विकल्प है जो उनकी जेब पर भारी नहीं होता है !
यदि सरकार अब भी इंदिरा विकास पत्र जैसी कोई योजना शुरू करती है तो बहुत सारा जमा धन लोगो की तिजोरियों से बाहर  आ सकता है !
छोटे वर्ग को बचत की और आकर्षित करने का काम लघु बचत योजनाएं है जिनको दिन प्रतिदिन ब्याज दर काम करके हतोत्साहित किया जा रहा है उसमे भी सुधार करने की जरुरत है क्यूंकि आज भी लोगो का विश्वास इन योजनाओ में है

यह जन धन योजना गरीब और अमीर के बीच बढ़ रहे अंतर को तोड़ने के लिए नहीं और ज्यादा अंतर पैदा करने की प्रभावी योजना है !यह योजना केवल बैंको के माध्यम से क्यों ? डाकघरों में भी ये योजना क्यों नहीं लागू की गई

धनवान वर्ग से तो पैसा निकाल नहीं पाये अब गरीब की जेब में डाका  डालने की योजना

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
January 26, 2015

कस्टमर : जन धन में खाता खुलवाना है बैंक मैनेजर : खुलवा लो कस्टमर : क्या ये जीरो बैलेंस में खुलता है बैंक मैनेजर : (मन ही मन में ……. साला पता है फिर भी पूछ रहा है) हाँ जी फ्री में खुलवा लो कस्टमर : इसमें सरकार कितना पैसा डालेगी? बैंक मैनेजर : जी अभी तो कुछ पता नहीं कस्टमर : तो मैं ये खाता क्यों खुलवाऊँ ? बैंक मैनेजर : जी मत खुलवाओ कस्टमर : फिर भी सरकार कुछ तो देगी बैंक मैनेजर : आपको फ्री में एटीएम दे देंगे कस्टमर : जब उसमे पैसा ही नहीं होगा तो एटीएम का क्या करूँगा?

D33P के द्वारा
January 26, 2015

कस्टमर : जन धन में खाता खुलवाना है बैंक मैनेजर : खुलवा लो कस्टमर : क्या ये जीरो बैलेंस में खुलता है बैंक मैनेजर : (मन ही मन में ……. साला पता है फिर भी पूछ रहा है) हाँ जी फ्री में खुलवा लो कस्टमर : इसमें सरकार कितना पैसा डालेगी? बैंक मैनेजर : जी अभी तो कुछ पता नहीं कस्टमर : तो मैं ये खाता क्यों खुलवाऊँ ? बैंक मैनेजर : जी मत खुलवाओ कस्टमर : फिर भी सरकार कुछ तो देगी बैंक मैनेजर : आपको फ्री में एटीएम दे देंगे कस्टमर : जब उसमे पैसा ही नहीं होगा तो एटीएम का क्या करूँगा?

pkdubey के द्वारा
September 4, 2014

पहले डाकघरों में भी बचत खाते खोले जाते थे,पर कुछ वर्ष पूर्व बंद किये गए,काम व्याजदर होने की बजह से | आप का आलेख समाज के एक पक्ष की हक़ीक़त है,पर हो सकता है इससे भ्रस्टाचार पर कुछ अंकुश लगे आदरणीया,मनरेगा आदि का पैसा सीधा व्यक्ति के खाते में ही जमा हो,सिस्टम और देश बदलाव चाहता है,जिसमे सभी का ईमानदारी से कार्य करना अति आवश्यक है,मोदी जी ने एक नयी शुरूआत तो की,हम कितने सफल होते हैं,इसमें प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व बनता है |सादर आभार के साथ |

    D33P के द्वारा
    September 4, 2014

    आदरणीय डाकघर में आज भी बचत खाते, ,आवर्ती खाते ,सावधि खाते और मासिक आय योजना के खाते खोले जाते है !लेकिन कम ब्याज दरों के कारण और अभिकर्ताओं के कम कमीशन के कारण .डाकघरों से ज्यादा खाते निजी बैंको यथा संजीवनी और आदर्श में खोले जा रहे है जहाँ सरकारी ब्याज से कहीं ज्यादा ब्याज मिलता है और अभिकर्ताओं को भी ज्यादा कमीशन मिलता है ! बचत का सबसे बड़ा आकर्षण ब्याज है !इन दिनों डाकघरों को भी बैंक की तर्ज पर परिवर्तन की तैयारी चल रही है .लेकिन सर्वर आये दिन काम न करने के कारण सब निवेशक परेशान है ,पहले इन सब में सुधार जरुरी है ! मेरा आलेख एक पक्ष नहीं कह रहा है जो सच है वही कह रहा है ,! जन धन योजना में खता धारक को बीमा की सुविधा दी जा रही है क्या आपको लगता है जीरो बैलेंस खाते पर उन्हें बीमा लाभ मुफ्त में मिलेगा? जी नहीं उन्हें बीमा लाभ लेने के लिए प्रीमियम तो देना ही पड़ेगा !क्या डेबिट कार्ड से मुफ्त में खरीदारी होगी ? उधार की आदत विकसित होगी !शौक आएगा अमीर की तरह बड़े बड़े मॉल से खरीदारी करने का ..कर्जदार होकर लौटेंगे …सिर्फ खाता खोलने से बचत नहीं होती .कोई धनवान नहीं होता .न ही अमीर और गरीब की खाई कम होगी ! आदरणीय मोदी जी ने जिस उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की है …हम तो सिर्फ आशा कर सकते है और योजना की सफलता का इंतज़ार भी कर लेते है .सब कुछ भविष्य की गर्त में है …उत्तरदायित्व निभाने के लिए बहुत कुछ है जिसको सुधारने की जरुरत है आपकी प्रतिक्रिया के लिए हम आपके आभारी है

sadguruji के द्वारा
August 31, 2014

आदरणीया दीप्ति जी ! प्रधानमंत्री जन धन योजना के नकारात्मक पहलुओं पर ही आपने विचार किया है और एक अधूरी जानकारी मंच पर प्रस्तुत की है ! मैं जहाँ रहता हूँ,वो गांव और शहर की सीमा रेखा है ! मैं अक्सर देखता हूँ कि इस गांव के मर्द बगीचे में बैठकर जुआ खेलते हैं और दारू पीते हैं ! अौरतें खून पसीना बहाकर कमाती हैं और मर्द मारपीट कर उनसे रूपये छीन ले जाते हैं ! इसीलिए अधिकतर अौरतें कालोनी में परिचित अौरतों के यहाँ अपने रुपए जमा करती हैं ! जिसदिन प्रधानमंत्री जन धन योजना का शुभारम्भ हुआ उस दिन शिविर में खाता खुलवाने के लिए इस गांव की अौरतों की लम्बी लाईन लगी थी ! वो सब बहुत खुश थीं ! आपने कहा है कि यह योजना गरीब की जेब में डाका डालने की योजना है ! गरीब हमलोगो से ज्यादा चतुर हैं ! वो सरकारी योजनाओं में कभी लुटते नहीं हैं,बल्कि उलटे सरकारी घन लूट लेते हैं ! मेरे विचार से तो ये योजना गरीबों के विकास और हित में बहुत कामयाब और मील का पत्थर साबित होगी ! इस योजना में बचत ,निवेश,सुरक्षा और बीमा सभी कुछ हैं ! आपका के लेख की सुंदरता और भाषा-शैली मुझे बहुत प्रभावित की ! शुभकामनाओं सहित-सद्गुरुजी !

    D33P के द्वारा
    August 31, 2014

    आदरणीय गुरु जी आपने सही फ़रमाया एक ही दिन में रेकार्ड खाते खोले गए .वैसे आप किसी दिन बैंक या डाकघर जाकर देखिये कितने चक्कर में एक खाता खुलता है ! हो सकता है आदरणीय मोदी जी का मन से किया गया प्रयास अच्छे परिणाम दे ,दुआ भी है !पर हमारा कार्यक्षेत्र यही है ,हम रोज़ ऐसे ही किस्सों से दो चार होते है !जब भी किसी नए कार्य की शुरआत होती है तो सभी कर्मचारी कहे या सभी वर्ग उत्साह से कार्य करते है फिर वही डाक के तीन पात !कागज़ी प्रक्रिया से बचने के लिए आज भी लोग इकठे होकर vc चलाते है .हर माह कुछ निश्चित रकम किसी के पास रखते है !अभी हाल ही में हमारे शहर में ऐसे ही कोई महिला सबके पैसे हज़म कर गायब हो गई अब पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही !ऐसे लोगो से बचने के लिए बैंक में खाता खोले जाने की अच्छी शुरआत है ! ग्रामीण लोग शहर वासियों से ज्यादा चतुर होते है सरकारी योजनाओ और लाभ की योजनाओ पर उनकी खूब नज़र रहती है ,पर रोज़ कमाओ और रोज़ उड़ाओ वाली आदत क्या इतनी जल्दी खत्म हो जाएगी ?आखिर खाते में जमा करने के लिए भी तो जेब में कुछ होना चाहिए .रोजमर्रा के खर्चे और महंगी होती जा रही शिक्षा के बाद कुछ बचेगा तो ही बैंक में जमा कराया जायेगा और फिर इन खातों पर ब्याज कितना मिलेगा ?बैंको या डाकघर में राशि जमा करने का सबसे बड़ा आकर्षण ब्याज है जो आदर्श और संजीवनी निजी बैंक सरकारी योजनाओ में मिलने वाले ब्याज से दुगना ब्याज दे रही है ! आज के हालत में जो राशि बैंक या डाकघर में जमा होनी चाहिए वो इन निजी बैंको में जा रही है और इन पर सरकार का कोई अंकुश नहीं है ,सहारा कांड से भी आप अनजान नहीं होंगे बहुत लोगो की बड़ी बचत इनमे फंसी हुई है ! जन धन योजना में गरीब डेबिट कार्ड लेकर उधार में खरीदारी करेंगे ! साहूकारों के स्थान पर बैंको से कर्ज लेंगे ,,कर्जदार तो ये लोग रहेंगे ही ! इन गांव वालो को सरकारी नियम की समझ नहीं है उन्हें केवल प्रत्यक्ष लाभ नज़र आता है ,इन खातों से आगे इन्हे कितना लाभ होगा ,देखेंगे …. आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभारी है हम

jlsingh के द्वारा
August 31, 2014

धनवान वर्ग से तो पैसा निकाल नहीं पाये अब गरीब की जेब में डाका डालने की योजना आदरणीया दीप्ति जी , सादर अभिवादन ! बहुत दिनों बाद आपकी अर्थ ब्यवस्था पर आधारित आलेख पढ़कर बड़ी संतुष्टि हुई…. अभी ताल मैं तो यही समझ रहा था जो मोदी साहब बोल रहे थे – आर्थिक छुआछूत से छुटकारा. देखते देखते भारत के सभी गरीब अचानक अमीर बन गए… डेबिट कार्ड से बड़े बड़े मॉल में खरीदारी करने जा रहे हैं. …सभी न्यूज़ पेपर, टी वी चैनेल, बड़े बड़े आर्थिक विशेषज्ञ तो यही कह रहे हैं. एक दिन में डेढ़ करोड़ खत खोलकर बैंक कर्मी भी अपनी कार्यक्षमता का परिचय दे चुके अब और जड़ा स्टाफ किसलिए चाहिए …बताइये न! बाकी दिनों में यही बैंक कर्मचारी किसी काम के लिए कितना डेरी लगते हैं पर मोदी जी का डर ही कुछ ऐसा है किउनके खिलाफ कोई एक शब्द न तो बोल सकता हैं नहीं लिख सकता है …आपके पोस्ट पर भी जो कॉमेंट आएंगे उन्हें पढ़ लीजियेगा… कोई सरकार २८ रूपये में अमीर बनती है तो कोई जीरो बैलेंस में भी…जय हो भारत की विकास यात्रा…अब बुलेट ट्रैन लाने गए हैं मोदी जी वहां भी मछलियों को दाना खिलने से नहीं चूके.

    D33P के द्वारा
    August 31, 2014

    नमस्कार जवाहर जी मछलियों को दाना खिलाएंगे तभी तो मछली जाल में आएगी ! ये जन धन योजना का बीमा और क्रेडिट कार्ड ये दाने है जो मोदी जी गरीबो को खिला रहे है ये दाने गरीब को बैंक में खाते खुलवाएंगे और बड़े बड़े मॉल में उधार में खरीदारी करने को मजबूर करेंगे और कर्ज के जाल में फंसेंगे एक दिन में डेढ़ करोड़ खाते ..!!!! शायद इतने खाते तो कोई एक बैंक पूरे साल में भी नहीं खोलती ,ये सब सरकारी आंकड़े है !गरीबो के लिए बहुत योजनाएं पहले भी चली उनसे गरीबो को कितना लाभ हुआ ..फायदा सिर्फ ऊपर वालो को हुआ ,हम भी निवेशकों के लिए बहुत योजनाएं चलाते थे ,असलियत क्या है कोई अनजान नहीं , परदे के पीछे असली फायदा किसे होता है ,हक़दार को तो कभी हुआ नहीं, अगर हुआ तो केवल कुछ प्रतिशत .. प्रतिक्रिया के लिए आभार … शीशे का अक्स तो सुन्दर दिख रहा है पर फोटोशॉप न हो यही बेहतर होगा


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